साद · 16/88
अनुवाद उच्चारण — साद
وَقَالُوا رَبَّنَا عَجِّل لَّنَا قِطَّنَا قَبْلَ يَوْمِ الْحِسَابِ ۝١٦
Wa qaaloo Rabbanaa `ajjil lanaa qittanaa qabla Yawmil Hisaab
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग (मज़ाक से) कहते हैं कि परवरदिगार हिसाब के दिन (क़यामत के) क़ब्ल ही (जो) हमारी क़िस्मत को लिखा (हो) हमें जल्दी दे दे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قِطَّنَا (हमारा हिस्सा): इसका अर्थ है हमारा वह हिस्सा जो हमारे लिए लिखा गया है, चाहे वह अच्छा हो या बुरा। यहाँ इसका अर्थ अज़ाब (यातना) का हिस्सा है।
  • يَوْمِ الْحِسَابِ (हिसाब के दिन): क़ियामत का दिन जब सभी प्राणियों को उनके कर्मों का हिसाब दिया जाएगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों और मुक़ज़्ज़िबों (झुठलाने वालों) का ज़िक्र करती है जो अल्लाह के रसूल का मज़ाक उड़ाते थे और सच्चाई को समझने के बावजूद उसे नकारते थे। उन्होंने अज्ञानता और हठधर्मिता से भरे हुए अंदाज़ में कहा: "ऐ हमारे रब! हमारा हिस्सा (अज़ाब) हमें जल्दी दे दे, क़ियामत के दिन से पहले ही।"

यह उनका उपहास और मज़ाक था। वे अल्लाह की यातना को दूर की चीज़ समझते थे और इसलिए उसे जल्दी माँग रहे थे। उनका यह कहना उनकी मूर्खता और अहंकार की पराकाष्ठा थी, क्योंकि वे जानते थे कि सच्चाई क्या है, फिर भी उसे झुठलाते रहे।

अल्लाह ने उनकी इस बात का जवाब अपनी किताब में दिया और उन्हें चेतावनी दी कि उनका अज़ाब निश्चित रूप से आएगा, चाहे वे उसे जल्दी माँगें या न माँगें। यह आयत उन लोगों के लिए एक सबक़ है जो अल्लाह की निशानियों का मज़ाक उड़ाते हैं और उसके अज़ाब को दूर समझते हैं।

दावत और नसीहत:

ऐ अल्लाह के बंदो! यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह की यातना से डरना चाहिए और उसे दूर नहीं समझना चाहिए। जो लोग अल्लाह के दीन का मज़ाक उड़ाते हैं, वे अपने ही नुक़सान का सामान करते हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की रहमत के तलबगार बनें और उसके अज़ाब से पनाह माँगें। याद रखें, अल्लाह की यातना बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत उससे भी बड़ी है। जो लोग तौबा कर लें और सच्चे दिल से उसकी ओर लौट आएं, अल्लाह उन्हें माफ़ कर देता है और उन्हें जन्नत की खुशखबरी देता है। आइए, हम उन लोगों की तरह न बनें जो अल्लाह की निशानियों का मज़ाक उड़ाते हैं, बल्कि हम उन लोगों में से बनें जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी रहमत के उम्मीदवार होते हैं।



📜 आयत 14-18 — साद

14إِن كُلٌّ إِلَّا كَذَّبَ الرُّسُلَ فَحَقَّ عِقَابِ
(जो शिकस्त खा चुके) सब ही ने तो पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा अज़ाब ठीक आ नाज़िल हुआ
15وَمَا يَنظُرُ هَٰؤُلَاءِ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً مَّا لَهَا مِن فَوَاقٍ
और ये (काफिर) लोग बस एक चिंघाड़ (सूर के मुन्तज़िर हैं जो फिर उन्हें) चश्में ज़दन की मोहलत न देगी
16وَقَالُوا رَبَّنَا عَجِّل لَّنَا قِطَّنَا قَبْلَ يَوْمِ الْحِسَابِ
और ये लोग (मज़ाक से) कहते हैं कि परवरदिगार हिसाब के दिन (क़यामत के) क़ब्ल ही (जो) हमारी क़िस्मत को लिखा (हो) हमें जल्दी दे दे
17اصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَاذْكُرْ عَبْدَنَا دَاوُودَ ذَا الْأَيْدِ ۖ إِنَّهُ أَوَّابٌ
(ऐ रसूल) जैसी जैसी बातें ये लोग करते हैं उन पर सब्र करो और हमारे बन्दे दाऊद को याद करो जो बड़े कूवत वाले थे
18إِنَّا سَخَّرْنَا الْجِبَالَ مَعَهُ يُسَبِّحْنَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِشْرَاقِ
बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े रूजू करने वाले थे हमने पहाड़ों को भी ताबेदार बना दिया था कि उनके साथ सुबह और शाम (खुदा की) तस्बीह करते थे
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अनुवाद — साद 16

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Tuesday, August 18, 2026

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