साद · 37/88
अनुवाद उच्चारण — साद
وَالشَّيَاطِينَ كُلَّ بَنَّاءٍ وَغَوَّاصٍ ۝٣٧
Wash Shayaateena kulla bannaaa`inw wa ghawwaas
📖 हिंदी अर्थ
और (इसी तरह) जितने शयातीन (देव) इमारत बनाने वाले और ग़ोता लगाने वाले थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الشَّيَاطِينَ: यहाँ शैतानों से अभिप्राय जिन्नात के उन शक्तिशाली और कुशल प्राणियों से है जो आज्ञा मानने वाले थे।
  • بَنَّاءٍ: भवन निर्माण करने वाला, जो महल और ऊँची इमारतें बनाता हो।
  • غَوَّاصٍ: गोताखोर, जो समुद्र की गहराई में गोता लगाकर मोती और रत्न निकालता हो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी सुलेमान (अलैहिस्सलाम) को जो महान राज्य और अद्भुत शक्तियाँ प्रदान की थीं, उनमें से एक यह भी थी कि उन्होंने शैतानों (जिन्नात) को उनके अधीन कर दिया। ये शैतान उनकी हर आज्ञा का पालन करते थे और उनके आदेश पर विभिन्न कार्य करते थे। उनमें से कुछ कुशल बिल्डर (राजमिस्त्री) थे, जो अद्भुत और विशाल भवन, ऊँचे महल और मजबूत किले बनाते थे। वहीं कुछ ऐसे थे जो गोताखोर थे, जो समुद्र की गहराइयों में गोता लगाकर बहुमूल्य मोती, लाल और अन्य रत्न निकालकर लाते थे। यह सब कुछ अल्लाह की विशेष कृपा और उसकी ओर से सुलेमान (अलैहिस्सलाम) को दिया गया अनोखा उपहार था, जो उनके पैगंबर होने और उनकी आज्ञाकारिता के कारण उन्हें प्राप्त हुआ।

यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला जिसे चाहता है, अपनी विशेष शक्ति और अधिकार प्रदान करता है। सुलेमान (अलैहिस्सलाम) की यह शक्ति केवल सांसारिक राज्य के लिए नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य अल्लाह की आयतों को स्थापित करना और उसके धर्म को फैलाना था। यह भी सबूत है कि अल्लाह के वफादार बंदे जब उसकी इबादत और आज्ञाकारिता में लगे रहते हैं, तो अल्लाह उन्हें ऐसी ताकतें और साधन प्रदान करता है जो आम इंसानों के लिए असंभव होती हैं। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि हम भी अल्लाह की आज्ञा का पालन करें और उसकी राह में अपनी क्षमताओं का उपयोग करें, ताकि हमें भी उसकी मदद और बरकत प्राप्त हो सके। याद रखें, अल्लाह की दी हुई नेमतें उन्हीं को मिलती हैं जो उसके शुक्रगुज़ार और आज्ञाकारी होते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 35-39 — साद

35قَالَ رَبِّ اغْفِرْ لِي وَهَبْ لِي مُلْكًا لَّا يَنبَغِي لِأَحَدٍ مِّن بَعْدِي ۖ إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ
फिर (सुलेमान ने मेरी तरफ) रूजू की (और) कहा परवरदिगार मुझे बख्श दे और मुझे वह मुल्क अता फरमा जो मेरे बाद किसी के वास्ते शायाँह न हो इसमें तो शक नहीं कि तू बड़ा बख्शने वाला है
36فَسَخَّرْنَا لَهُ الرِّيحَ تَجْرِي بِأَمْرِهِ رُخَاءً حَيْثُ أَصَابَ
तो हमने हवा को उनका ताबेए कर दिया कि जहाँ वह पहुँचना चाहते थे उनके हुक्म के मुताबिक़ धीमी चाल चलती थी
37وَالشَّيَاطِينَ كُلَّ بَنَّاءٍ وَغَوَّاصٍ
और (इसी तरह) जितने शयातीन (देव) इमारत बनाने वाले और ग़ोता लगाने वाले थे
38وَآخَرِينَ مُقَرَّنِينَ فِي الْأَصْفَادِ
सबको (ताबेए कर दिया और इसके अलावा) दूसरे देवों को भी जो ज़ंज़ीरों में जकड़े हुए थे
39هَٰذَا عَطَاؤُنَا فَامْنُنْ أَوْ أَمْسِكْ بِغَيْرِ حِسَابٍ
ऐ सुलेमान ये हमारी बेहिसाब अता है पस (उसे लोगों को देकर) एहसान करो या (सब) अपने ही पास रखो
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अनुवाद — साद 37

सूरा साद आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (इसी तरह) जितने शयातीन (देव) इमारत बनाने वाले और…

सूरा आयत 37/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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