साद · 69/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
مَا كَانَ لِيَ مِنْ عِلْمٍ بِالْمَلَإِ الْأَعْلَىٰ إِذْ يَخْتَصِمُونَ ۝٦٩
Maa kaana liya min `ilmim bilmala il a`laaa iz yakhtasimoon
📖 हिंदी अर्थ
आलम बाला के रहने वाले (फरिश्ते) जब वाहम बहस करते थे उसकी मुझे भी ख़बर न थी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْمَلَإِ الْأَعْلَىٰ — ऊपरी दुनिया के फ़रिश्ते, जो आसमान में हैं।
  • يَخْتَصِمُونَ — वे आपस में बहस कर रहे थे (हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाइश के बारे में)।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप फ़रमा दीजिए कि मुझे उन ऊपरी दुनिया के फ़रिश्तों के आपसी विवाद का कोई इल्म नहीं था, जब वे हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाइश के मामले में बहस कर रहे थे। यह बात मुझे अपनी तरफ से नहीं मालूम हुई, बल्कि अल्लाह तआला ने अपने इल्म और वह़ी (प्रकाशना) के ज़रिए मुझे यह ख़बर दी। यानी यह क़ुरआन और यह जानकारी मेरी अपनी उपज नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ से भेजी गई है।

यह आयत नबी करीम ﷺ की सच्चाई की सबसे बड़ी गवाह है। आप ﷺ ने उस घटना का पूरा विवरण सुनाया जो आपकी पैदाइश से हज़ारों साल पहले आसमानों में हुई थी — जब अल्लाह ने फ़रिश्तों से हज़रत आदम को सजदा करने का हुक्म दिया, तो इबलीस ने घमंड की वजह से इनकार किया। यह वाक़िया किसी इंसान को किताब या रिवायत से मालूम नहीं हो सकता था, सिवाय उसके जिसे अल्लाह ने ख़ुद बताया हो। यही सबूत है कि मुहम्मद ﷺ सच्चे नबी हैं और उन पर जो क़ुरआन उतरा है वह अल्लाह का कलाम है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि इल्म सिर्फ़ अल्लाह के पास है। जो बातें हमें नहीं बताई गईं, उनके बारे में बहस करना या अटकलें लगाना हमारा काम नहीं। हमें चाहिए कि जो अल्लाह ने बताया है उस पर ईमान लाएँ और जो नहीं बताया उसे उसी के हवाले कर दें। यही ईमान की पहचान है। और यह भी याद रखें कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर छाया हुआ है — जो हुआ, जो हो रहा है और जो होगा, सब उसे मालूम है। हमें उसी पर भरोसा रखना चाहिए और उसी से हिदायत माँगनी चाहिए।



📜 आयत 67-71 — सूरा साद

67قُلْ هُوَ نَبَأٌ عَظِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये (क़यामत) एक बहुत बड़ा वाक़िया है
68أَنتُمْ عَنْهُ مُعْرِضُونَ
जिससे तुम लोग (ख्वाहमाख्वाह) मुँह फेरते हो
69مَا كَانَ لِيَ مِنْ عِلْمٍ بِالْمَلَإِ الْأَعْلَىٰ إِذْ يَخْتَصِمُونَ
आलम बाला के रहने वाले (फरिश्ते) जब वाहम बहस करते थे उसकी मुझे भी ख़बर न थी
70إِن يُوحَىٰ إِلَيَّ إِلَّا أَنَّمَا أَنَا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
मेरे पास तो बस वही की गयी है कि मैं (खुदा के अज़ाब से) साफ-साफ डराने वाला हूँ
71إِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَائِكَةِ إِنِّي خَالِقٌ بَشَرًا مِّن طِينٍ
(वह बहस ये थी कि) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं गीली मिट्टी से एक आदमी बनाने वाला हूँ
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
69आयत

अनुवाद — साद 69

सूरा साद आयत 69 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : आलम बाला के रहने वाले (फरिश्ते) जब वाहम बहस करते…

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Monday, September 28, 2026

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