साद · 83/88
अनुवाद उच्चारण — साद
إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ الْمُخْلَصِينَ ۝٨٣
Illaa `ibaadaka minhumul mukhlaseen
📖 हिंदी अर्थ
खुदा ने फरमाया तो (हम भी) हक़ बात (कहे देते हैं)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِلَّا = सिवाय, के अलावा
  • عِبَادَكَ = आपके बंदे (अल्लाह के सेवक)
  • مِنْهُمُ = उनमें से (आदम की संतान में से)
  • الْمُخْلَصِينَ = जिन्हें आपने (अल्लाह ने) ख़ालिस और चुनिंदा बना लिया हो, यानी जिन्हें आपने अपनी इबादत के लिए विशेष रूप से चुन लिया हो और उन्हें शैतान के वश से बचा लिया हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में शैतान (इब्लीस) की उस घिनौनी क़सम का ज़िक्र जारी है जो उसने अल्लाह की इज़्ज़त और अज़मत की क़सम खाकर खाई थी। उसने कहा था: "तेरी इज़्ज़त की क़सम! मैं आदम की सारी औलाद को गुमराह करके रहूँगा, उन्हें रास्ते से भटकाऊँगा, उनके दिलों में बुराई डालूँगा और उन्हें तेरी इबादत से रोकूँगा।"

लेकिन इसी के साथ उसने एक अपवाद भी बयान किया: "मगर तेरे उन बंदों के सिवाय जिन्हें तूने अपने लिए ख़ालिस कर लिया है।" यानी शैतान ने ख़ुद स्वीकार किया कि उसकी ताक़त सीमित है और अल्लाह के कुछ ख़ास बंदे ऐसे हैं जिन पर उसका कोई वश नहीं चलता। ये वो लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने अपनी विशेष रहमत से नवाज़ा है, उनके दिलों को ईमान की रोशनी से मुनव्वर किया है, और उन्हें शैतान के वसवसों और जाल से महफ़ूज़ रखा है। ये वो मुख़लिस बंदे हैं जिनकी नीयत ख़ालिस है, जिनका ईमान पक्का है, और जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी अल्लाह की रज़ा के लिए समर्पित कर दी है।

इस आयत से हमें कई अहम सबक़ मिलते हैं:

पहला सबक़: शैतान की ताक़त सीमित है। वह सिर्फ़ उन्हीं लोगों को गुमराह कर सकता है जो ख़ुद उसकी पैरवी करना चाहते हैं। जो लोग अल्लाह से जुड़े होते हैं, उन पर शैतान का कोई असर नहीं होता।

दूसरा सबक़: अल्लाह की तरफ़ से ख़ास मदद और हिफ़ाज़त उन्हीं को मिलती है जो सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करते हैं और उसकी राह पर चलते हैं। जब बंदा अल्लाह की तरफ़ एक क़दम बढ़ाता है, तो अल्लाह उसकी तरफ़ दस क़दम बढ़कर आता है।

तीसरा सबक़: हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम उन मुख़लिस बंदों में शामिल हों जिनके बारे में शैतान ने ख़ुद कहा कि उन पर मेरा कोई वश नहीं चलता। यह मुक़ाम हासिल करने के लिए ज़रूरी है कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें, अपनी नीयत को ख़ालिस करें, और हर अमल में सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा का ख़याल रखें।

चौथा सबक़: यह आयत हमें उम्मीद देती है कि चाहे शैतान कितना भी ताक़तवर क्यों न दिखे, अल्लाह की पनाह में आने वाला बंदा हमेशा महफ़ूज़ रहता है। इसलिए हमें हर वक़्त अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें शैतान के शर से बचाए और हमें अपने मुख़लिस बंदों में शामिल करे।

याद रखिए! अल्लाह अपने बंदों से बेहद मुहब्बत करता है और जो बंदा सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करता है, अल्लाह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उसकी हिफ़ाज़त करता है, उसे राह दिखाता है, और शैतान के हर हमले से उसे बचाता है। आइए, हम सब मिलकर अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें अपने मुख़लिस बंदों में शामिल करे और शैतान के शर से हमारी हिफ़ाज़त करे। आमीन।



📜 आयत 81-85 — साद

81إِلَىٰ يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُومِ
वह बोला तेरी ही इज्ज़त व जलाल की क़सम
82قَالَ فَبِعِزَّتِكَ لَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ
उनमें से तेरे ख़ालिस बन्दों के सिवा सब के सब को ज़रूर गुमराह करूँगा
83إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ الْمُخْلَصِينَ
खुदा ने फरमाया तो (हम भी) हक़ बात (कहे देते हैं)
84قَالَ فَالْحَقُّ وَالْحَقَّ أَقُولُ
और मैं तो हक़ ही कहा करता हूँ
85لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكَ وَمِمَّن تَبِعَكَ مِنْهُمْ أَجْمَعِينَ
कि मैं तुझसे और जो लोग तेरी ताबेदारी करेंगे उन सब से जहन्नुम को ज़रूर भरूँगा
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अनुवाद — साद 83

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Tuesday, August 18, 2026

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