अज़-ज़ुमर · 40/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُّقِيمٌ ۝٤٠
Mai yaateehi `azaabuny yukhzeehi wa yahillu `alaihi `azaabum muqeem
📖 हिंदी अर्थ
भी (अपनी जगह) कुछ कर रहा हूँ, फिर अनक़रीब ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर वह आफत आती है जो उसको (दुनिया में) रूसवा कर देगी और (आख़िर में) उस पर दायमी अज़ाब भी नाज़िल होगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُخْزِيهِ: उसे अपमानित करे, उसे रुसवा करे।
  • مُقِيمٌ: स्थायी, हमेशा रहने वाला, जो कभी समाप्त न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अपनी क़ौम के ज़िद्दी लोगों से कह दीजिए कि तुम लोग अपनी उसी हालत पर काम करते रहो जिसे तुमने अपने लिए पसंद किया है—यानी उन्हें छोड़कर जो सच्ची इबादत के लायक़ नहीं, उनकी पूजा करना। मैं अपने उस काम पर चलता रहूँगा जिसका मुझे हुक्म दिया गया है—यानी अकेले अल्लाह की तरफ़ अपने क़ौल और अमल में मुतवज्जह रहना।

फिर बहुत जल्द तुम्हें यह मालूम हो जाएगा कि उन दोनों में से कौन है जिसके पास ऐसा अज़ाब आता है जो उसे दुनिया में रुसवा और ज़लील कर देगा, और कौन है जिस पर आख़िरत में ऐसा अज़ाब नाज़िल होगा जो हमेशा रहने वाला है—ना वह टलेगा, ना ख़त्म होगा।

यह अज़ाब जो दुनिया में रुसवा करने वाला है, वह बद्र के दिन का अज़ाब था जो कुफ़्फ़ार पर आया, और आख़िरत का स्थायी अज़ाब जहन्नुम की आग है जो कभी बुझने वाली नहीं।

अल्लाह हम सबको अपनी रहमत से इस अज़ाब से महफ़ूज़ रखे।

यह आयत हर उस शख़्स के लिए बड़ी नसीहत है जो अल्लाह के रसूल की बात को झुठलाता है और अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है। अल्लाह की तरफ़ से देर ज़रूर होती है, लेकिन पकड़ बहुत सख्त होती है। जो शख्स आज अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ता है, कल उसे उसका नतीजा भुगतना ही पड़ेगा।

इसलिए ऐ इंसान! अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को अल्लाह की इताअत में गुज़ार, क्योंकि आज का एक पल नेकी में गुज़ारना कल के हमेशा रहने वाले अज़ाब से निजात का ज़रिया बन सकता है। अल्लाह की रहमत उसके बंदों के बहुत करीब है, बस ज़रूरत है अपने गुनाहों से तौबा करके उसकी तरफ़ पलटने की। जो शख्स दुनिया में अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुका लेता है, अल्लाह उसे आख़िरत में वह इज़्ज़त देता है जो कभी ख़त्म नहीं होती।

🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — अज़-ज़ुमर

38وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ اللَّهُ ۚ قُلْ أَفَرَأَيْتُم مَّا تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ إِنْ أَرَادَنِيَ اللَّهُ بِضُرٍّ هَلْ هُنَّ كَاشِفَاتُ ضُرِّهِ أَوْ أَرَادَنِي بِرَحْمَةٍ هَلْ هُنَّ مُمْسِكَاتُ رَحْمَتِهِ ۚ قُلْ حَسْبِيَ اللَّهُ ۖ عَلَيْهِ يَتَوَكَّلُ الْمُتَوَكِّلُونَ
और (ऐ रसूल) अगर तुम इनसे पूछो कि सारे आसमान व ज़मीन को किसने पैदा किया तो ये लोग यक़ीनन कहेंगे कि ख़ुदा ने, तुम कह दो कि तो क्या तुमने ग़ौर किया है कि ख़ुदा को छोड़ कर जिन लोगों की तुम इबादत करते हो अगर ख़ुदा मुझे कोई तक़लीफ पहुँचाना चाहे तो क्या वह लोग उसके नुक़सान को (मुझसे) रोक सकते हैं या अगर ख़ुदा मुझ पर मेहरबानी करना चाहे तो क्या वह लोग उसकी मेहरबानी रोक सकते हैं (ऐ रसूल) तुम कहो कि ख़ुदा मेरे लिए काफ़ी है उसी पर भरोसा करने वाले भरोसा करते हैं
39قُلْ يَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّي عَامِلٌ ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरी क़ौम तुम अपनी जगह (जो चाहो) अमल किए जाओ मै
40مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُّقِيمٌ
भी (अपनी जगह) कुछ कर रहा हूँ, फिर अनक़रीब ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर वह आफत आती है जो उसको (दुनिया में) रूसवा कर देगी और (आख़िर में) उस पर दायमी अज़ाब भी नाज़िल होगा
41إِنَّا أَنزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ لِلنَّاسِ بِالْحَقِّ ۖ فَمَنِ اهْتَدَىٰ فَلِنَفْسِهِ ۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَا ۖ وَمَا أَنتَ عَلَيْهِم بِوَكِيلٍ
(ऐ रसूल) हमने तुम्हारे पास (ये) किताब (क़ुरान) सच्चाई के साथ लोगों (की हिदायत) के वास्ते नाज़िल की है, पस जो राह पर आया तो अपने ही (भले के) लिए और जो गुमराह हुआ तो उसकी गुमराही का वबाल भी उसी पर है और फिर तुम कुछ उनके ज़िम्मेदार तो हो नहीं
42اللَّهُ يَتَوَفَّى الْأَنفُسَ حِينَ مَوْتِهَا وَالَّتِي لَمْ تَمُتْ فِي مَنَامِهَا ۖ فَيُمْسِكُ الَّتِي قَضَىٰ عَلَيْهَا الْمَوْتَ وَيُرْسِلُ الْأُخْرَىٰ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
ख़ुदा ही लोगों के मरने के वक्त उनकी रूहें (अपनी तरफ़) खींच बुलाता है और जो लोग नहीं मरे (उनकी रूहें) उनकी नींद में (खींच ली जाती हैं) बस जिन के बारे में ख़ुदा मौत का हुक्म दे चुका है उनकी रूहों को रोक रखता है और बाक़ी (सोने वालों की रूहों) को फिर एक मुक़र्रर वक्त तक के वास्ते भेज देता है जो लोग (ग़ौर) और फिक्र करते हैं उनके लिए (क़ुदरते ख़ुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
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मक्कीRevelation
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अनुवाद — अज़-ज़ुमर 40

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Tuesday, August 18, 2026

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