अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُخْزِيهِ: उसे अपमानित करे, उसे रुसवा करे।
- مُقِيمٌ: स्थायी, हमेशा रहने वाला, जो कभी समाप्त न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अपनी क़ौम के ज़िद्दी लोगों से कह दीजिए कि तुम लोग अपनी उसी हालत पर काम करते रहो जिसे तुमने अपने लिए पसंद किया है—यानी उन्हें छोड़कर जो सच्ची इबादत के लायक़ नहीं, उनकी पूजा करना। मैं अपने उस काम पर चलता रहूँगा जिसका मुझे हुक्म दिया गया है—यानी अकेले अल्लाह की तरफ़ अपने क़ौल और अमल में मुतवज्जह रहना।
फिर बहुत जल्द तुम्हें यह मालूम हो जाएगा कि उन दोनों में से कौन है जिसके पास ऐसा अज़ाब आता है जो उसे दुनिया में रुसवा और ज़लील कर देगा, और कौन है जिस पर आख़िरत में ऐसा अज़ाब नाज़िल होगा जो हमेशा रहने वाला है—ना वह टलेगा, ना ख़त्म होगा।
यह अज़ाब जो दुनिया में रुसवा करने वाला है, वह बद्र के दिन का अज़ाब था जो कुफ़्फ़ार पर आया, और आख़िरत का स्थायी अज़ाब जहन्नुम की आग है जो कभी बुझने वाली नहीं।
अल्लाह हम सबको अपनी रहमत से इस अज़ाब से महफ़ूज़ रखे।
यह आयत हर उस शख़्स के लिए बड़ी नसीहत है जो अल्लाह के रसूल की बात को झुठलाता है और अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है। अल्लाह की तरफ़ से देर ज़रूर होती है, लेकिन पकड़ बहुत सख्त होती है। जो शख्स आज अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ता है, कल उसे उसका नतीजा भुगतना ही पड़ेगा।
इसलिए ऐ इंसान! अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को अल्लाह की इताअत में गुज़ार, क्योंकि आज का एक पल नेकी में गुज़ारना कल के हमेशा रहने वाले अज़ाब से निजात का ज़रिया बन सकता है। अल्लाह की रहमत उसके बंदों के बहुत करीब है, बस ज़रूरत है अपने गुनाहों से तौबा करके उसकी तरफ़ पलटने की। जो शख्स दुनिया में अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुका लेता है, अल्लाह उसे आख़िरत में वह इज़्ज़त देता है जो कभी ख़त्म नहीं होती।
📜 आयत 38-42 — अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 40
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भी (अपनी जगह) कुछ कर रहा हूँ, फिर अनक़रीब ही…सूरा आयत 40/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








