अज़-ज़ुमर · 45/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
وَإِذَا ذُكِرَ اللَّهُ وَحْدَهُ اشْمَأَزَّتْ قُلُوبُ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ ۖ وَإِذَا ذُكِرَ الَّذِينَ مِن دُونِهِ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ ۝٤٥
Wa izaa zukiral laahu wahdahush ma azzat quloobul lazeena laa yu`minoona bil Aakhirati wa izaa zukiral lazeena min dooniheee izaa hum yastabshiroon
📖 हिंदी अर्थ
और जब सिर्फ अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल मुतनफ़िफ़र हो जाते हैं और जब ख़ुदा के सिवा और (माबूदों) का ज़िक्र किया जाता है तो बस फौरन उनकी बाछें खिल जाती हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اشْمَأَزَّتْ: क्रोधित होना, घृणा करना, जी घबराना, सिकुड़ जाना।
  • يَسْتَبْشِرُونَ: खुश होना, प्रसन्नता का इज़हार करना, आनंदित होना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की मानसिकता और दिल की हालत को उजागर करती है जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते। जब अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है—यानी जब उसकी एकता (तौहीद) का उल्लेख होता है और उसके साथ किसी को साझीदार नहीं बताया जाता—तो उनके दिल सिकुड़ जाते हैं, घृणा और क्रोध से भर जाते हैं। उन्हें यह बात बर्दाश्त नहीं होती कि केवल अल्लाह ही पूजा के योग्य है, क्योंकि यह उनके अहंकार और उनकी मूर्तियों के प्रति लगाव के खिलाफ़ जाती है।

लेकिन जब उनके तथाकथित देवताओं—चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, या अन्य चीज़ें जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पूजते हैं—का ज़िक्र किया जाता है, तो वे अचानक खुशी से झूम उठते हैं, उनके चेहरे खिल जाते हैं और वे प्रसन्नता का इज़हार करने लगते हैं। यह उनकी हालत की विडंबना है कि सच्चे मालिक और रज़्ज़ाक़ (रोज़ी देने वाले) का नाम सुनकर वे नफ़रत करते हैं, और बेजान मूर्तियों का नाम सुनकर खुश होते हैं।

यह आयत हमें बताती है कि ईमान और कुफ़्र के बीच सबसे बड़ा फ़र्क़ यही है—मोमिन का दिल अल्लाह के ज़िक्र से शांति और सुकून पाता है, जबकि काफ़िर का दिल उससे घृणा करता है। यह उन लोगों की गिरी हुई मानसिकता को दर्शाता है जिन्होंने सत्य को ठुकरा दिया और अपनी मनमानी इच्छाओं को अपना देवता बना लिया।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि हम अपने दिलों को अल्लाह के ज़िक्र से जोड़ें। जब हम अल्लाह का नाम लेते हैं, तो हमारे दिलों को सुकून मिलना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही असली ख़ुशी और शांति का स्रोत है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हम उन लोगों की तरह न बनें जो सत्य से नफ़रत करते हैं और झूठ से मुहब्बत रखते हैं। बल्कि हमें उन लोगों में से होना चाहिए जिनके दिल अल्लाह के ज़िक्र से नरम होते हैं, उसकी याद में आंसू बहाते हैं, और उसकी एकता पर गर्व महसूस करते हैं। याद रखिए, जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं, उनके दिल अल्लाह के ज़िक्र से प्रसन्न होते हैं, और यही सच्ची कामयाबी की निशानी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 43-47 — अज़-ज़ुमर

43أَمِ اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ شُفَعَاءَ ۚ قُلْ أَوَلَوْ كَانُوا لَا يَمْلِكُونَ شَيْئًا وَلَا يَعْقِلُونَ
क्या उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा (दूसरे) सिफारिशी बना रखे है (ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगरचे वह लोग न कुछ एख़तेयार रखते हों न कुछ समझते हों
44قُل لِّلَّهِ الشَّفَاعَةُ جَمِيعًا ۖ لَّهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
(तो भी सिफारिशी बनाओगे) तुम कह दो कि सारी सिफारिश तो ख़ुदा के लिए ख़ास है- सारे आसमान व ज़मीन की हुकूमत उसी के लिए ख़ास है, फिर तुम लोगों को उसकी तरफ लौट कर जाना है
45وَإِذَا ذُكِرَ اللَّهُ وَحْدَهُ اشْمَأَزَّتْ قُلُوبُ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ ۖ وَإِذَا ذُكِرَ الَّذِينَ مِن دُونِهِ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ
और जब सिर्फ अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल मुतनफ़िफ़र हो जाते हैं और जब ख़ुदा के सिवा और (माबूदों) का ज़िक्र किया जाता है तो बस फौरन उनकी बाछें खिल जाती हैं
46قُلِ اللَّهُمَّ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ أَنتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ فِي مَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ ख़ुदा (ऐ) सारे आसमान और ज़मीन पैदा करने वाले, ज़ाहिर व बातिन के जानने वाले हक़ बातों में तेरे बन्दे आपस में झगड़ रहे हैं तू ही उनके दरमियान फैसला कर देगा
47وَلَوْ أَنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا مَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا وَمِثْلَهُ مَعَهُ لَافْتَدَوْا بِهِ مِن سُوءِ الْعَذَابِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ وَبَدَا لَهُم مِّنَ اللَّهِ مَا لَمْ يَكُونُوا يَحْتَسِبُونَ
और अगर नाफरमानों के पास रूए ज़मीन की सारी काएनात मिल जाएग बल्कि उनके साथ उतनी ही और भी हो तो क़यामत के दिन ये लोग यक़ीनन सख्त अज़ाब का फ़िदया दे निकलें (और अपना छुटकारा कराना चाहें) और (उस वक्त) उनके सामने ख़ुदा की तरफ से वह बात पेश आएगी जिसका उन्हें वहम व गुमान भी न था
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अनुवाद — अज़-ज़ुमर 45

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Tuesday, August 18, 2026

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