अज़-ज़ुमर · 44/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुमर
قُل لِّلَّهِ الشَّفَاعَةُ جَمِيعًا ۖ لَّهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ ۝٤٤
Qul lillaahish shafaa`atu jamee`aa; lahoo mulkus samaawaati wal ardi summa ilaihi turj`oon
📖 हिंदी अर्थ
(तो भी सिफारिशी बनाओगे) तुम कह दो कि सारी सिफारिश तो ख़ुदा के लिए ख़ास है- सारे आसमान व ज़मीन की हुकूमत उसी के लिए ख़ास है, फिर तुम लोगों को उसकी तरफ लौट कर जाना है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الشَّفَاعَةُ (शफ़ाअत): सिफ़ारिश, किसी के लिए क्षमा या भलाई की प्रार्थना करना।
  • جَمِيعًا (जमीअन): पूर्ण रूप से, सब कुछ।
  • مُلْكُ (मुल्क): राज्य, स्वामित्व, अधिकार।
  • تُرْجَعُونَ (तुरजऊन): तुम लौटाए जाओगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! इन मुशरिकों से कह दीजिए कि शफ़ाअत (सिफ़ारिश) का पूरा अधिकार केवल अल्लाह ही को है। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह नबी हो या फरिश्ता या कोई और बुज़ुर्ग, अल्लाह की अनुमति के बिना किसी की सिफ़ारिश नहीं कर सकता। यह अधिकार पूर्ण रूप से अल्लाह के हाथ में है, और वही तय करेगा कि किसके लिए सिफ़ारिश की जाएगी और किसे माफ़ किया जाएगा।

यह इसलिए है क्योंकि आसमानों और ज़मीन का पूरा राज्य अकेले अल्लाह ही का है। वही सब कुछ चलाता है, वही सब कुछ नियंत्रित करता है। जब सब कुछ उसी का है, तो फिर उसके सिवा किसी और से सिफ़ारिश की उम्मीद क्यों रखी जाए? ये मूर्तियाँ और झूठे देवता जिन्हें तुम पुकारते हो, उनके पास तो कुछ भी नहीं है, न वे किसी को नुकसान पहुँचा सकते हैं और न ही किसी को फ़ायदा।

फिर ऐ लोगों! तुम सबको एक दिन अल्लाह की ओर लौटना है। मरने के बाद तुम क़ब्रों से उठाए जाओगे और हिसाब के लिए अल्लाह के सामने पेश किए जाओगे। वहाँ वह तुम्हारे अच्छे और बुरे सभी कर्मों का हिसाब लेगा और तुम्हें तुम्हारे किए का पूरा बदला देगा।

तो फिर क्यों न तुम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए समर्पित कर दो? क्यों न तुम उसी से मदद माँगो और उसी से शफ़ाअत की उम्मीद रखो? याद रखो, जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा करता है और उसी की ओर रुजू करता है, अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता। वह उसके लिए रास्ते खोलता है और उसे अपनी रहमत से नवाज़ता है। इसलिए अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत में बिताओ, ताकि उस दिन तुम्हें शर्मिंदा न होना पड़े और तुम जन्नत की नेमतों से हमेशा के लिए लाभान्वित हो सको।



📜 आयत 42-46 — सूरा अज़-ज़ुमर

42اللَّهُ يَتَوَفَّى الْأَنفُسَ حِينَ مَوْتِهَا وَالَّتِي لَمْ تَمُتْ فِي مَنَامِهَا ۖ فَيُمْسِكُ الَّتِي قَضَىٰ عَلَيْهَا الْمَوْتَ وَيُرْسِلُ الْأُخْرَىٰ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
ख़ुदा ही लोगों के मरने के वक्त उनकी रूहें (अपनी तरफ़) खींच बुलाता है और जो लोग नहीं मरे (उनकी रूहें) उनकी नींद में (खींच ली जाती हैं) बस जिन के बारे में ख़ुदा मौत का हुक्म दे चुका है उनकी रूहों को रोक रखता है और बाक़ी (सोने वालों की रूहों) को फिर एक मुक़र्रर वक्त तक के वास्ते भेज देता है जो लोग (ग़ौर) और फिक्र करते हैं उनके लिए (क़ुदरते ख़ुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं
43أَمِ اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ شُفَعَاءَ ۚ قُلْ أَوَلَوْ كَانُوا لَا يَمْلِكُونَ شَيْئًا وَلَا يَعْقِلُونَ
क्या उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा (दूसरे) सिफारिशी बना रखे है (ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगरचे वह लोग न कुछ एख़तेयार रखते हों न कुछ समझते हों
44قُل لِّلَّهِ الشَّفَاعَةُ جَمِيعًا ۖ لَّهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
(तो भी सिफारिशी बनाओगे) तुम कह दो कि सारी सिफारिश तो ख़ुदा के लिए ख़ास है- सारे आसमान व ज़मीन की हुकूमत उसी के लिए ख़ास है, फिर तुम लोगों को उसकी तरफ लौट कर जाना है
45وَإِذَا ذُكِرَ اللَّهُ وَحْدَهُ اشْمَأَزَّتْ قُلُوبُ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ ۖ وَإِذَا ذُكِرَ الَّذِينَ مِن دُونِهِ إِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ
और जब सिर्फ अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल मुतनफ़िफ़र हो जाते हैं और जब ख़ुदा के सिवा और (माबूदों) का ज़िक्र किया जाता है तो बस फौरन उनकी बाछें खिल जाती हैं
46قُلِ اللَّهُمَّ فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ أَنتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ فِي مَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ ख़ुदा (ऐ) सारे आसमान और ज़मीन पैदा करने वाले, ज़ाहिर व बातिन के जानने वाले हक़ बातों में तेरे बन्दे आपस में झगड़ रहे हैं तू ही उनके दरमियान फैसला कर देगा
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीअवतरण स्थान
44आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 44

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Friday, October 2, 2026

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