अज़-ज़ुमर · 58/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
أَوْ تَقُولَ حِينَ تَرَى الْعَذَابَ لَوْ أَنَّ لِي كَرَّةً فَأَكُونَ مِنَ الْمُحْسِنِينَ ۝٥٨
Aw taqoola heena taral `azaaba law anna lee karratan fa akoona minal muhsineen
📖 हिंदी अर्थ
या जब अज़ाब को (आते) देखें तो कहने लगे कि काश मुझे (दुनिया में) फिर दोबारा जाना मिले तो मैं नेकी कारों में हो जाऊँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • कर्रतन (कर्रा): दुनिया में वापस लौटना, दोबारा जीवन पाना।
  • मुहसिनीन: नेकी करने वाले, अल्लाह की इबादत और उसके आदेशों का पालन करने वाले।

तफ़सीर:

यह आयत उस हालत का वर्णन कर रही है जब इंसान आख़िरत में अल्लाह का अज़ाब (यातना) अपनी आँखों से देख लेगा। उस वक़्त वह हैरान और पछतावे में डूबा हुआ कहेगा: "काश! मुझे एक बार फिर दुनिया में लौटने का मौक़ा मिलता, तो मैं नेकियाँ करता, अल्लाह की इबादत करता और उन अच्छे लोगों में शामिल होता जिन्होंने अपने रब की आज्ञा का पालन किया और उसकी राह में भलाई के काम किए।"

लेकिन यह तमन्ना उस वक़्त बिल्कुल बेकार होगी, क्योंकि मौका हाथ से निकल चुका होगा। यह वही हालत है जब इंसान को अपनी गलतियों का एहसास होता है, लेकिन पछतावे का वक़्त गुज़र चुका होता है। अल्लाह तआला ने यह बात इसलिए बयान की ताकि हम दुनिया में रहते हुए ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, और उस दिन की शर्मिंदगी और पछतावे से बचें।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और मौका हमेशा नहीं मिलता। जो आज नेकी कर सकता है, उसे कल पर टालना नहीं चाहिए। अल्लाह ने हमें दुनिया में भेजा है ताकि हम उसकी इबादत करें, उसके आदेशों का पालन करें और अपने जीवन को नेकियों से भर दें। जो लोग ऐसा करते हैं, वे क़ियामत के दिन किसी पछतावे में नहीं होंगे, बल्कि उन्हें अल्लाह की जन्नत और उसकी खुशी मिलेगी।

इसलिए, प्यारे भाइयों और बहनों! आज ही का दिन है अपनी ज़िंदगी को बदलने का। अल्लाह की राह में कदम बढ़ाएँ, नमाज़ की पाबंदी करें, अच्छे काम करें और बुराइयों से बचें। याद रखें, यह दुनिया आज़माइश की जगह है, और आख़िरत में हमें अपने कर्मों का फल मिलेगा। अल्लाह हम सबको उस दिन की शर्मिंदगी से बचाए और हमें नेक बंदों में शामिल करे। आमीन।



📜 आयत 56-60 — अज़-ज़ुमर

56أَن تَقُولَ نَفْسٌ يَا حَسْرَتَا عَلَىٰ مَا فَرَّطتُ فِي جَنبِ اللَّهِ وَإِن كُنتُ لَمِنَ السَّاخِرِينَ
(कहीं ऐसा न हो कि) (तुममें से) कोई शख्स कहने लगे कि हाए अफ़सोस मेरी इस कोताही पर जो मैने ख़ुदा (की बारगाह) का तक़र्रुब हासिल करने में की और मैं तो बस उन बातों पर हँसता ही रहा
57أَوْ تَقُولَ لَوْ أَنَّ اللَّهَ هَدَانِي لَكُنتُ مِنَ الْمُتَّقِينَ
या ये कहने लगे कि अगर ख़ुदा मेरी हिदायत करता तो मैं ज़रूर परहेज़गारों में से होता
58أَوْ تَقُولَ حِينَ تَرَى الْعَذَابَ لَوْ أَنَّ لِي كَرَّةً فَأَكُونَ مِنَ الْمُحْسِنِينَ
या जब अज़ाब को (आते) देखें तो कहने लगे कि काश मुझे (दुनिया में) फिर दोबारा जाना मिले तो मैं नेकी कारों में हो जाऊँ
59بَلَىٰ قَدْ جَاءَتْكَ آيَاتِي فَكَذَّبْتَ بِهَا وَاسْتَكْبَرْتَ وَكُنتَ مِنَ الْكَافِرِينَ
उस वक्त ख़ुदा कहेगा ( हाँ ) हाँ तेरे पास मेरी आयतें पहुँची तो तूने उन्हें झुठलाया और शेख़ी कर बैठा और तू भी काफिरों में से था (अब तेरी एक न सुनी जाएगी)
60وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ تَرَى الَّذِينَ كَذَبُوا عَلَى اللَّهِ وُجُوهُهُم مُّسْوَدَّةٌ ۚ أَلَيْسَ فِي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِّلْمُتَكَبِّرِينَ
और जिन लोगों ने ख़ुदा पर झूठे बोहतान बाँधे - तुम क़यामत के दिन देखोगे उनके चेहरे सियाह होंगे क्या गुरूर करने वालों का ठिकाना जहन्नुम में नहीं है (ज़रूर है)
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
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मक्कीRevelation
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अनुवाद — अज़-ज़ुमर 58

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Tuesday, August 18, 2026

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