अज़-ज़ुमर · 70/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
وَوُفِّيَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَا يَفْعَلُونَ ۝٧٠
Wa wuffiyat kullu nafsim maa `amilat wa Huwa a`lamubimaa yaf`aloon
📖 हिंदी अर्थ
और जिस शख्स ने जैसा किया हो उसे उसका पूरा पूरा बदला मिल जाएगा, और जो कुछ ये लोग करते हैं वह उससे ख़ूब वाक़िफ है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وُفِّيَتْ – पूरा-पूरा दिया गया, बदला पूरा चुका दिया गया।
  • كُلُّ نَفْسٍ – हर एक प्राणी, हर एक व्यक्ति।
  • مَّا عَمِلَتْ – जो कुछ उसने किया (अच्छा या बुरा)।
  • وَهُوَ أَعْلَمُ – और वह (अल्लाह) सबसे अधिक जानने वाला है।
  • بِمَا يَفْعَلُونَ – उसके बारे में जो वे करते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत क़यामत के दिन के उस महान न्याय का वर्णन कर रही है, जब अल्लाह तआला हर एक व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देंगे। कोई भी अच्छा या बुरा काम, चाहे वह कितना ही छोटा या बड़ा हो, उसका हिसाब रखा जाएगा और हर व्यक्ति को उसके किए का पूरा फल मिलेगा। यह अल्लाह का पूर्ण न्याय है, जिसमें कोई कमी नहीं होगी, न किसी के साथ कोई ज़ुल्म होगा।

अल्लाह तआला को हर चीज़ का इल्म है। उसे किसी गवाह या लेखक की ज़रूरत नहीं, क्योंकि वह खुद हर चीज़ को जानता है — जो लोगों ने खुलेआम किया और जो छिपकर किया, जो उन्होंने सोचा और जो उन्होंने अमल में लाया। उसके इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है, न धरती में और न आसमान में।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सच्चाई की याद दिलाती है: हमारा हर अमल, हर बात, हर नीयत — सब कुछ अल्लाह के सामने है। यदि हम अच्छा करेंगे, तो हमें अच्छा बदला मिलेगा, और यदि बुरा करेंगे, तो उसका सामना करना पड़ेगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता।

इस आयत में हमारे लिए एक प्यारा संदेश है: अल्लाह न्याय करने वाला है, लेकिन वह रहम करने वाला भी है। जो लोग दुनिया में नेकी करते हैं, अल्लाह उन्हें उनकी नेकी का पूरा इनाम देंगे, और जो गुनाह करते हैं, उन्हें उनके गुनाह का अंजाम भुगतना होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार बनाएं, नेक काम करें, बुराई से बचें, और याद रखें कि हमारा रब हमेशा हमें देख रहा है और हमारे हर अमल का हिसाब रख रहा है।

यह आयत हमें उम्मीद भी देती है और डर भी — उम्मीद इसलिए कि अल्लाह न्यायी है और किसी की नेकी को बेकार नहीं जाने देगा, और डर इसलिए कि हमें अपने गुनाहों से तौबा करना चाहिए और अल्लाह की रहमत की तरफ लौटना चाहिए। अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 68-72 — अज़-ज़ुमर

68وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَصَعِقَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَن شَاءَ اللَّهُ ۖ ثُمَّ نُفِخَ فِيهِ أُخْرَىٰ فَإِذَا هُمْ قِيَامٌ يَنظُرُونَ
और जब (पहली बार) सूर फँका जाएगा तो जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं (मौत से) बेहोश होकर गिर पड़ेंगें) मगर (हाँ) जिस को ख़ुदा चाहे वह अलबत्ता बच जाएगा) फिर जब दोबारा सूर फूँका जाएगा तो फौरन सब के सब खड़े हो कर देखने लगेंगें
69وَأَشْرَقَتِ الْأَرْضُ بِنُورِ رَبِّهَا وَوُضِعَ الْكِتَابُ وَجِيءَ بِالنَّبِيِّينَ وَالشُّهَدَاءِ وَقُضِيَ بَيْنَهُم بِالْحَقِّ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और ज़मीन अपने परवरदिगार के नूर से जगमगा उठेगी और (आमाल की) किताब (लोगों के सामने) रख दी जाएगी और पैग़म्बर और गवाह ला हाज़िर किए जाएँगे और उनमें इन्साफ के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर ( ज़र्रा बराबर ) ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
70وَوُفِّيَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَا يَفْعَلُونَ
और जिस शख्स ने जैसा किया हो उसे उसका पूरा पूरा बदला मिल जाएगा, और जो कुछ ये लोग करते हैं वह उससे ख़ूब वाक़िफ है
71وَسِيقَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ جَهَنَّمَ زُمَرًا ۖ حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوهَا فُتِحَتْ أَبْوَابُهَا وَقَالَ لَهُمْ خَزَنَتُهَا أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَتْلُونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِ رَبِّكُمْ وَيُنذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا ۚ قَالُوا بَلَىٰ وَلَٰكِنْ حَقَّتْ كَلِمَةُ الْعَذَابِ عَلَى الْكَافِرِينَ
और जो लोग काफिर थे उनके ग़ोल के ग़ोल जहन्नुम की तरफ हॅकाए जाएँगे और यहाँ तक की जब जहन्नुम के पास पहुँचेगें तो उसके दरवाज़े खोल दिए जाएगें और उसके दरोग़ा उनसे पूछेंगे कि क्या तुम लोगों में के पैग़म्बर तुम्हारे पास नहीं आए थे जो तुमको तुम्हारे परवरदिगार की आयतें पढ़कर सुनाते और तुमको इस रोज़ (बद) के पेश आने से डराते वह लोग जवाब देगें कि हाँ (आए तो थे) मगर (हमने न माना) और अज़ाब का हुक्म काफिरों के बारे में पूरा हो कर रहेगा
72قِيلَ ادْخُلُوا أَبْوَابَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۖ فَبِئْسَ مَثْوَى الْمُتَكَبِّرِينَ
(तब उनसे) कहा जाएगा कि जहन्नुम के दरवाज़ों में धँसो और हमेशा इसी में रहो ग़रज़ तकब्बुर करने वाले का (भी) क्या बुरा ठिकाना है
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अनुवाद — अज़-ज़ुमर 70

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Tuesday, August 18, 2026

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