अन-निसा · 130/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَإِن يَتَفَرَّقَا يُغْنِ اللَّهُ كُلًّا مِّن سَعَتِهِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ وَاسِعًا حَكِيمًا ۝١٣٠
Wa iny-yatafarraqaa yughnil laahu kullam min sa`atih; wa kaanal laahu Waasi`an Hakeemaa
📖 हिंदी अर्थ
और अगर दोनों मियॉ बीवी एक दूसरे से बाज़रिए तलाक़ जुदा हो जाएं तो ख़ुदा अपने वसी ख़ज़ाने से (फ़रागुल बाली अता फ़रमाकर) दोनों को (एक दूसरे से) बेनियाज़ कर देगा और ख़ुदा तो बड़ी गुन्जाइश और तदबीर वाला है और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) ख़ुदा ही का है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَتَفَرَّقَا: दोनों (पति-पत्नी) अलग हो जाएँ, तलाक़ या ख़ुल्अ के माध्यम से।
  • يُغْنِ: अल्लाह उन्हें पर्याप्तता और बे-नियाज़ी प्रदान करे।
  • سَعَتِهِ: उसकी विशाल क्षमता, उसके विस्तृत रिज़्क़ और फ़ज़्ल से।
  • وَاسِعًا: बड़ी गुंजाइश और विशाल दानशीलता वाला।
  • حَكِيمًا: हर काम में पूर्ण ज्ञान और निपुणता वाला, जो उचित और सही फ़ैसला करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यदि पति और पत्नी के बीच आपसी मेल-मिलाप और सुलह की कोई सूरत न बन सके, और वे तलाक़ या ख़ुल्अ के ज़रिए अलग हो जाएँ, तो अल्लाह तआला अपने विशाल फ़ज़्ल और रहमत से दोनों को बे-नियाज़ कर देगा। वह हर एक को उसकी ज़रूरत के अनुसार रिज़्क़ और सहारा प्रदान करेगा — पुरुष को दूसरी पत्नी मिल सकती है, और स्त्री को दूसरा पति। अल्लाह की क्षमता और दानशीलता असीम है, और वह अपने बंदों के मामलों में पूर्ण ज्ञान और हिकमत के साथ फ़ैसला करता है। वह जो कुछ करता है, उसमें भलाई और न्याय छिपा होता है, भले ही इंसान उसे तुरंत न समझ पाए।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह तआला अपने बंदों पर कभी बुरा नहीं चाहता; जब कोई रिश्ता टूट जाता है, तो वह दोनों के लिए बेहतर विकल्प और नई राहें खोल देता है। इसलिए निराश नहीं होना चाहिए।
  2. यह आयत उन लोगों के लिए तसल्ली है जो तलाक़ के बाद परेशानी और चिंता में डूब जाते हैं — अल्लाह का भरोसा रखें, वह हर हाल में रिज़्क़ और सहारे का इंतज़ाम करता है।
  3. अल्लाह की सिफ़ात "वासिअ" (विशाल) और "हकीम" (हिकमत वाला) हमें सिखाती हैं कि उसके फ़ैसलों पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि वह जो करता है, उसमें गहरी भलाई होती है।
  4. इस्लाम में तलाक़ कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक ज़रूरी और जायज़ राहत है जब मेल-मिलाप नामुमकिन हो — और अल्लाह उसके बाद भी अपने बंदों का साथ नहीं छोड़ता।
  5. यह आयत हौसला देती है कि मुसीबत के बाद आसानी आती है; अल्लाह की रहमत और रिज़्क़ के दरवाज़े कभी बंद नहीं होते।


📜 आयत 128-132 — अन-निसा

128وَإِنِ امْرَأَةٌ خَافَتْ مِن بَعْلِهَا نُشُوزًا أَوْ إِعْرَاضًا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا أَن يُصْلِحَا بَيْنَهُمَا صُلْحًا ۚ وَالصُّلْحُ خَيْرٌ ۗ وَأُحْضِرَتِ الْأَنفُسُ الشُّحَّ ۚ وَإِن تُحْسِنُوا وَتَتَّقُوا فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرًا
और अगर कोई औरत अपने शौहर की ज्यादती व बेतवज्जोही से (तलाक़ का) ख़ौफ़ रखती हो तो मियॉ बीवी के बाहम किसी तरह मिलाप कर लेने में दोनों (में से किसी पर) कुछ गुनाह नहीं है और सुलह तो (बहरहाल) बेहतर है और बुख्ल से तो क़रीब क़रीब हर तबियत के हम पहलू है और अगर तुम नेकी करो और परहेजदारी करो तो ख़ुदा तुम्हारे हर काम से ख़बरदार है (वही तुमको अज्र देगा)
129وَلَن تَسْتَطِيعُوا أَن تَعْدِلُوا بَيْنَ النِّسَاءِ وَلَوْ حَرَصْتُمْ ۖ فَلَا تَمِيلُوا كُلَّ الْمَيْلِ فَتَذَرُوهَا كَالْمُعَلَّقَةِ ۚ وَإِن تُصْلِحُوا وَتَتَّقُوا فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ غَفُورًا رَّحِيمًا
और अगरचे तुम बहुतेरा चाहो (लेकिन) तुममें इतनी सकत तो हरगिज़ नहीं है कि अपनी कई बीवियों में (पूरा पूरा) इन्साफ़ कर सको (मगर) ऐसा भी तो न करो कि (एक ही की तरफ़) हमातन माएल हो जाओ कि (दूसरी को अधड़ में) लटकी हुई छोड़ दो और अगर बाहम मेल कर लो और (ज्यादती से) बचे रहो तो ख़ुदा यक़ीनन बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
130وَإِن يَتَفَرَّقَا يُغْنِ اللَّهُ كُلًّا مِّن سَعَتِهِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ وَاسِعًا حَكِيمًا
और अगर दोनों मियॉ बीवी एक दूसरे से बाज़रिए तलाक़ जुदा हो जाएं तो ख़ुदा अपने वसी ख़ज़ाने से (फ़रागुल बाली अता फ़रमाकर) दोनों को (एक दूसरे से) बेनियाज़ कर देगा और ख़ुदा तो बड़ी गुन्जाइश और तदबीर वाला है और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) ख़ुदा ही का है
131وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ وَلَقَدْ وَصَّيْنَا الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ مِن قَبْلِكُمْ وَإِيَّاكُمْ أَنِ اتَّقُوا اللَّهَ ۚ وَإِن تَكْفُرُوا فَإِنَّ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ غَنِيًّا حَمِيدًا
और जिन लोगों को तुमसे पहले किताबे ख़ुदा अता की गयी है उनको और तुमको भी उसकी हमने वसीयत की थी कि (ख़ुदा) (की नाफ़रमानी) से डरते रहो और अगर (कहीं) तुमने कुफ़्र इख्तेयार किया तो (याद रहे कि) जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) ख़ुदा ही का है (जो चाहे कर सकता है) और ख़ुदा तो सबसे बेपरवा और (हमा सिफ़त) मौसूफ़ हर हम्द वाला है
132وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ وَكِيلًا
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) ख़ास ख़ुदा ही का है और ख़ुदा तो कारसाज़ी के लिये काफ़ी है
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अनुवाद — अन-निसा 130

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Wednesday, August 19, 2026

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