अन-निसा · 166/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
لَّٰكِنِ ٱللَّهُ يَشۡهَدُ بِمَآ أَنزَلَ إِلَيۡكَۖ أَنزَلَهُۥ بِعِلۡمِهِۦۖ وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ يَشۡهَدُونَۚ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدًا  ۝١٦٦
Laakinil laahu yashhadu bimaaa anzala ilaika anzalahoo bi`ilmihee wal malaaa`ikatu yashhadoon; wa kafaa billaahi Shaheeda
📖 हिंदी अर्थ
मगर ख़ुदा तो इस पर गवाही देता है जो कुछ तुम पर नाज़िल किया है ख़ूब समझ बूझ कर नाज़िल किया है (बल्कि) उसकी गवाही तो फ़रिश्ते तक देते हैं हालॉकि ख़ुदा गवाही के लिए काफ़ी है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ (معاني الكلمات):

  • لَٰكِنِ – बल्कि, इसके विपरीत (यहाँ पर यह विरोध के लिए नहीं, बल्कि तर्क को मज़बूत करने के लिए आया है)।
  • يَشْهَدُ – गवाही देता है, साक्षी होता है।
  • أَنزَلَهُ بِعِلْمِهِ – उसे अपने ज्ञान के साथ उतारा, अर्थात वह सब कुछ जानता हुआ जो उतारा गया।
  • وَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا – और अल्लाह का गवाह होना ही काफ़ी है।

तफ़सीर (व्याख्या):

प्रिय नबी! अगर यहूदी और दूसरे काफ़िर आपको झुठलाते हैं और आपके ऊपर उतारी गई वह़ी (प्रकाशना) को नहीं मानते, तो आप चिंतित न हों। अल्लाह तआला ख़ुद आपके सच्चे होने की गवाही देता है। उसने यह क़ुरआन आप पर अपने इल्म (ज्ञान) के साथ उतारा है—यानी वह पूरी तरह जानता है कि यह किताब क्यों उतारी गई, किस हिकमत (बुद्धिमत्ता) के साथ उतारी गई, और यह भी जानता है कि आप ही इसके सच्चे संदेशवाहक हैं, जो इसे बिल्कुल सही तरीके से लोगों तक पहुँचाएँगे।

यह केवल अल्लाह की गवाही ही नहीं है, बल्कि उसके फ़रिश्ते भी आपकी सच्चाई की गवाही देते हैं। वे उस वह़ी की सच्चाई पर साक्षी हैं जो आप पर उतारी गई। और जब अल्लाह ख़ुद गवाह हो, तो किसी और की गवाही की ज़रूरत ही नहीं रहती। अल्लाह की गवाही ही सबसे बड़ी और सबसे पूर्ण गवाही है।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई पर चलने वाले को किसी के झुठलाने की परवाह नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह की गवाही और उसका समर्थन ही सबसे बड़ी ताक़त है। जब अल्लाह आपके साथ हो, तो दुनिया की सारी ताक़तें भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं। यही विश्वास एक मुसलमान को हर मुश्किल में मज़बूत रखता है। अल्लाह हमें सच्चाई पर साबित-क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 164-168 — अन-निसा

164وَرُسُلًا قَدۡ قَصَصۡنَٰهُمۡ عَلَيۡكَ مِن قَبۡلُ وَرُسُلًا لَّمۡ نَقۡصُصۡهُمۡ عَلَيۡكَۚ وَكَلَّمَ ٱللَّهُ مُوسَىٰ تَكۡلِيمًا 
जिनका हाल हमने तुमसे पहले ही बयान कर दिया और बहुत से ऐसे रसूल (भेजे) जिनका हाल तुमसे बयान नहीं किया और ख़ुदा ने मूसा से (बहुत सी) बातें भी कीं
165رُّسُلًا مُّبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَى ٱللَّهِ حُجَّةُۢ بَعۡدَ ٱلرُّسُلِۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا 
और हमने नेक लोगों को बेहिश्त की ख़ुशख़बरी देने वाले और बुरे लोगों को अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बर (भेजे) ताकि पैग़म्बरों के आने के बाद लोगों की ख़ुदा पर कोई हुज्जत बाक़ी न रह जाए और ख़ुदा तो बड़ा ज़बरदस्त हकीम है (ये कुफ्फ़ार नहीं मानते न मानें)
166لَّٰكِنِ ٱللَّهُ يَشۡهَدُ بِمَآ أَنزَلَ إِلَيۡكَۖ أَنزَلَهُۥ بِعِلۡمِهِۦۖ وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ يَشۡهَدُونَۚ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدًا 
मगर ख़ुदा तो इस पर गवाही देता है जो कुछ तुम पर नाज़िल किया है ख़ूब समझ बूझ कर नाज़िल किया है (बल्कि) उसकी गवाही तो फ़रिश्ते तक देते हैं हालॉकि ख़ुदा गवाही के लिए काफ़ी है
167إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ قَدۡ ضَلُّواْ ضَلَٰلَۢا بَعِيدًا 
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और ख़ुदा की राह से (लोगों) को रोका वह राहे रास्त से भटक के बहुत दूर जा पडे
168إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَظَلَمُواْ لَمۡ يَكُنِ ٱللَّهُ لِيَغۡفِرَ لَهُمۡ وَلَا لِيَهۡدِيَهُمۡ طَرِيقًا 
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और (उस पर) ज़ुल्म (भी) करते रहे न तो ख़ुदा उनको बख्शेगा ही और न ही उन्हें किसी तरीक़े की हिदायत करेगा
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीRevelation
166आयत

अनुवाद — अन-निसा 166

सूरा आयत 166/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 164–168. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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