Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَاذَا عَلَيْهِمْ: उन पर क्या (हानि) है? अर्थात उन्हें क्या नुकसान होगा?
- لَوْ آمَنُوا: यदि वे ईमान लाते।
- أَنفَقُوا: खर्च करते।
- رَزَقَهُمُ: जो उन्हें दिया।
- عَلِيمًا: सब कुछ जानने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों को संबोधित कर रहा है जो ईमान लाने और अल्लाह के रास्ते में खर्च करने से कतराते हैं। अल्लाह फ़रमाता है: उन पर क्या हानि है, यदि वे अल्लाह पर और आख़िरत के दिन पर सच्चे दिल से ईमान लाएँ, और अल्लाह ने उन्हें जो कुछ भी धन-संपत्ति, ज्ञान, शक्ति आदि दी है, उसमें से अल्लाह की खुशी के लिए खर्च करें? क्या उन्हें इससे कोई नुकसान उठाना पड़ेगा? हरगिज़ नहीं! बल्कि इसी में उनकी भलाई और सफलता है। ईमान और खर्च से उन्हें कोई हानि नहीं, बल्कि यही उनके लिए फ़ायदेमंद है।
यह एक तोबीख़ (फटकार) का अंदाज़ है, जिसमें अल्लाह उन्हें समझाता है कि ईमान और नेक काम करने में उनका कोई नुकसान नहीं, बल्कि यह उनके लिए बेहतर है। अल्लाह उनके हाल से पूरी तरह वाक़िफ़ है, वह जानता है कि वे क्यों ईमान नहीं लाते और क्यों खर्च नहीं करते। उनके इरादे और नीयतें सब उसके सामने स्पष्ट हैं, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देगा। यदि वे ईमान लाते और खर्च करते तो अल्लाह उन्हें इसका अच्छा बदला देता, और अब जो वे ऐसा नहीं कर रहे, अल्लाह उनके इस रवैये से भी अवगत है और उसकी पकड़ से वे बच नहीं सकते।
फ़ायदे (लाभ):
- ईमान और अल्लाह के रास्ते में खर्च करना किसी भी इंसान के लिए नुकसानदेह नहीं है, बल्कि यही उसकी भलाई का ज़रिया है। अल्लाह ने जो दिया है, उसमें से खर्च करने से रिज़्क़ में कमी नहीं होती, बल्कि बरकत होती है।
- अल्लाह अपने बंदों के हर अमल से वाक़िफ़ है, चाहे वह अच्छा हो या बुरा। यह विश्वास इंसान को नेक कामों की तरफ़ राग़िब करता है और बुरे कामों से रोकता है।
- इस्लाम एक ऐसा दीन है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई देता है। ईमान और खर्च से इंसान का दिल साफ़ होता है, समाज में भाईचारा पैदा होता है और अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के दीन की तरफ़ बुलाने वाले लोगों को डरना नहीं चाहिए कि ईमान लाने से उन्हें क्या नुकसान होगा। असल नुकसान तो ईमान से दूर रहने में है।
📜 आयत 37-41 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 39
सूरा अन-निसा आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर ये लोग ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाते…सूरा आयत 39/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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