अन-निसा · 39/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَمَاذَا عَلَيْهِمْ لَوْ آمَنُوا بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقَهُمُ اللَّهُ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِهِمْ عَلِيمًا ۝٣٩
Wa maazaa `alaihim law aamanoo billaahi wal Yawmil Aakhiri wa anfaqoo mimmaa razaqahumul laah; wa kaanallaahu bihim Aaleemaa
📖 हिंदी अर्थ
अगर ये लोग ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाते और जो कुछ ख़ुदा ने उन्हें दिया है उसमें से राहे ख़ुदा में ख़र्च करते तो उन पर क्या आफ़त आ जाती और ख़ुदा तो उनसे ख़ूब वाक़िफ़ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَاذَا عَلَيْهِمْ: उन पर क्या (हानि) है? अर्थात उन्हें क्या नुकसान होगा?
  • لَوْ آمَنُوا: यदि वे ईमान लाते।
  • أَنفَقُوا: खर्च करते।
  • رَزَقَهُمُ: जो उन्हें दिया।
  • عَلِيمًا: सब कुछ जानने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों को संबोधित कर रहा है जो ईमान लाने और अल्लाह के रास्ते में खर्च करने से कतराते हैं। अल्लाह फ़रमाता है: उन पर क्या हानि है, यदि वे अल्लाह पर और आख़िरत के दिन पर सच्चे दिल से ईमान लाएँ, और अल्लाह ने उन्हें जो कुछ भी धन-संपत्ति, ज्ञान, शक्ति आदि दी है, उसमें से अल्लाह की खुशी के लिए खर्च करें? क्या उन्हें इससे कोई नुकसान उठाना पड़ेगा? हरगिज़ नहीं! बल्कि इसी में उनकी भलाई और सफलता है। ईमान और खर्च से उन्हें कोई हानि नहीं, बल्कि यही उनके लिए फ़ायदेमंद है।

यह एक तोबीख़ (फटकार) का अंदाज़ है, जिसमें अल्लाह उन्हें समझाता है कि ईमान और नेक काम करने में उनका कोई नुकसान नहीं, बल्कि यह उनके लिए बेहतर है। अल्लाह उनके हाल से पूरी तरह वाक़िफ़ है, वह जानता है कि वे क्यों ईमान नहीं लाते और क्यों खर्च नहीं करते। उनके इरादे और नीयतें सब उसके सामने स्पष्ट हैं, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देगा। यदि वे ईमान लाते और खर्च करते तो अल्लाह उन्हें इसका अच्छा बदला देता, और अब जो वे ऐसा नहीं कर रहे, अल्लाह उनके इस रवैये से भी अवगत है और उसकी पकड़ से वे बच नहीं सकते।

फ़ायदे (लाभ):

  1. ईमान और अल्लाह के रास्ते में खर्च करना किसी भी इंसान के लिए नुकसानदेह नहीं है, बल्कि यही उसकी भलाई का ज़रिया है। अल्लाह ने जो दिया है, उसमें से खर्च करने से रिज़्क़ में कमी नहीं होती, बल्कि बरकत होती है।
  2. अल्लाह अपने बंदों के हर अमल से वाक़िफ़ है, चाहे वह अच्छा हो या बुरा। यह विश्वास इंसान को नेक कामों की तरफ़ राग़िब करता है और बुरे कामों से रोकता है।
  3. इस्लाम एक ऐसा दीन है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई देता है। ईमान और खर्च से इंसान का दिल साफ़ होता है, समाज में भाईचारा पैदा होता है और अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के दीन की तरफ़ बुलाने वाले लोगों को डरना नहीं चाहिए कि ईमान लाने से उन्हें क्या नुकसान होगा। असल नुकसान तो ईमान से दूर रहने में है।


📜 आयत 37-41 — अन-निसा

37الَّذِينَ يَبْخَلُونَ وَيَأْمُرُونَ النَّاسَ بِالْبُخْلِ وَيَكْتُمُونَ مَا آتَاهُمُ اللَّهُ مِن فَضْلِهِ ۗ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا مُّهِينًا
ये वह लोग हैं जो ख़ुद तो बुख्ल करते ही हैं और लोगों को भी बुख्ल का हुक्म देते हैं और जो माल ख़ुदा ने अपने फ़ज़ल व (करम) से उन्हें दिया है उसे छिपाते हैं और हमने तो कुफ़राने नेअमत करने वालों के वास्ते सख्त ज़िल्लत का अज़ाब तैयार कर रखा है
38وَالَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ رِئَاءَ النَّاسِ وَلَا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَلَا بِالْيَوْمِ الْآخِرِ ۗ وَمَن يَكُنِ الشَّيْطَانُ لَهُ قَرِينًا فَسَاءَ قَرِينًا
और जो लोग महज़ लोगों को दिखाने के वास्ते अपने माल ख़र्च करते हैं और न खुदा ही पर ईमान रखते हैं और न रोजे आख़ेरत पर ख़ुदा भी उनके साथ नहीं क्योंकि उनका साथी तो शैतान है और जिसका साथी शैतान हो तो क्या ही बुरा साथी है
39وَمَاذَا عَلَيْهِمْ لَوْ آمَنُوا بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقَهُمُ اللَّهُ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِهِمْ عَلِيمًا
अगर ये लोग ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाते और जो कुछ ख़ुदा ने उन्हें दिया है उसमें से राहे ख़ुदा में ख़र्च करते तो उन पर क्या आफ़त आ जाती और ख़ुदा तो उनसे ख़ूब वाक़िफ़ है
40إِنَّ اللَّهَ لَا يَظْلِمُ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ ۖ وَإِن تَكُ حَسَنَةً يُضَاعِفْهَا وَيُؤْتِ مِن لَّدُنْهُ أَجْرًا عَظِيمًا
ख़ुदा तो हरगिज़ ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं करता बल्कि अगर ज़र्रा बराबर भी किसी की कोई नेकी हो तो उसको दूना करता है और अपनी तरफ़ से बड़ा सवाब अता फ़रमाता है
41فَكَيْفَ إِذَا جِئْنَا مِن كُلِّ أُمَّةٍ بِشَهِيدٍ وَجِئْنَا بِكَ عَلَىٰ هَٰؤُلَاءِ شَهِيدًا
(ख़ैर दुनिया में तो जो चाहे करें) भला उस वक्त क्या हाल होगा जब हम हर गिरोह के गवाह तलब करेंगे और (मोहम्मद) तुमको उन सब पर गवाह की हैसियत में तलब करेंगे
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अनुवाद — अन-निसा 39

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Tuesday, August 18, 2026

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