अन-निसा · 38/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَالَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ رِئَاءَ النَّاسِ وَلَا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَلَا بِالْيَوْمِ الْآخِرِ ۗ وَمَن يَكُنِ الشَّيْطَانُ لَهُ قَرِينًا فَسَاءَ قَرِينًا ۝٣٨
Wallazeena yunfiqoona amwaalahum ri`aaa`an naasi wa laa yu`minoona billaahi wa laa bil Yawmil Aakhir; wa mai yakunish shaitaanu lahoo qareenan fasaaa`a qareenaa
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग महज़ लोगों को दिखाने के वास्ते अपने माल ख़र्च करते हैं और न खुदा ही पर ईमान रखते हैं और न रोजे आख़ेरत पर ख़ुदा भी उनके साथ नहीं क्योंकि उनका साथी तो शैतान है और जिसका साथी शैतान हो तो क्या ही बुरा साथी है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رِئَاءَ النَّاسِ: लोगों को दिखाने के लिए, दिखावे के लिए।
  • قَرِينًا: साथी, मित्र, साथ रहने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने उन लोगों के लिए भी अपमानजनक यातना तैयार की है जो अपने माल को केवल लोगों को दिखाने और उनकी प्रशंसा पाने के लिए खर्च करते हैं, और वे अल्लाह पर तथा आख़िरत के दिन पर ईमान नहीं रखते। उनका यह कार्य पूर्णतः शैतानी प्रेरणा से है, क्योंकि शैतान ही उन्हें दिखावे, कंजूसी और हर बुराई की ओर ले जाता है। जिस व्यक्ति का साथी शैतान हो, वह कितना बुरा साथी है! वह उसे सीधे मार्ग से भटकाकर विनाश की ओर ले जाता है। यह आयत उन मुशरिकों के बारे में उतरी जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की शत्रुता पर एकजुट थे और अपने धन को इसी उद्देश्य से खर्च करते थे।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. दिखावे के लिए खर्च करना अल्लाह के यहाँ बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर पाप है जो व्यक्ति को अल्लाह की यातना का पात्र बनाता है।
  2. ईमान और नेक कार्य आपस में जुड़े हुए हैं; बिना ईमान के कोई भी अच्छा काम अल्लाह के यहाँ क़बूल नहीं होता।
  3. शैतान व्यक्ति का सबसे बुरा साथी है, जो उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में नुक़सान पहुँचाता है। मुसलमान को चाहिए कि वह शैतान की पैरवी से बचे और अल्लाह की राह में खर्च करते समय सिर्फ उसी की रज़ा का इरादा रखे।
  4. यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि अपने अच्छे कार्यों को शुद्ध नीयत से करें, ताकि वे अल्लाह के यहाँ पुरस्कृत हों और शैतान के साथी बनने से बचें।
🎧 सुनें

📜 आयत 36-40 — अन-निसा

36۞ وَاعْبُدُوا اللَّهَ وَلَا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا ۖ وَبِالْوَالِدَيْنِ إِحْسَانًا وَبِذِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينِ وَالْجَارِ ذِي الْقُرْبَىٰ وَالْجَارِ الْجُنُبِ وَالصَّاحِبِ بِالْجَنبِ وَابْنِ السَّبِيلِ وَمَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ مَن كَانَ مُخْتَالًا فَخُورًا
और ख़ुदा ही की इबादत करो और किसी को उसका शरीक न बनाओ और मॉ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों और रिश्तेदार पड़ोसियों और अजनबी पड़ोसियों और पहलू में बैठने वाले मुसाहिबों और पड़ोसियों और ज़र ख़रीद लौन्डी और गुलाम के साथ एहसान करो बेशक ख़ुदा अकड़ के चलने वालों और शेख़ीबाज़ों को दोस्त नहीं रखता
37الَّذِينَ يَبْخَلُونَ وَيَأْمُرُونَ النَّاسَ بِالْبُخْلِ وَيَكْتُمُونَ مَا آتَاهُمُ اللَّهُ مِن فَضْلِهِ ۗ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ عَذَابًا مُّهِينًا
ये वह लोग हैं जो ख़ुद तो बुख्ल करते ही हैं और लोगों को भी बुख्ल का हुक्म देते हैं और जो माल ख़ुदा ने अपने फ़ज़ल व (करम) से उन्हें दिया है उसे छिपाते हैं और हमने तो कुफ़राने नेअमत करने वालों के वास्ते सख्त ज़िल्लत का अज़ाब तैयार कर रखा है
38وَالَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَالَهُمْ رِئَاءَ النَّاسِ وَلَا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَلَا بِالْيَوْمِ الْآخِرِ ۗ وَمَن يَكُنِ الشَّيْطَانُ لَهُ قَرِينًا فَسَاءَ قَرِينًا
और जो लोग महज़ लोगों को दिखाने के वास्ते अपने माल ख़र्च करते हैं और न खुदा ही पर ईमान रखते हैं और न रोजे आख़ेरत पर ख़ुदा भी उनके साथ नहीं क्योंकि उनका साथी तो शैतान है और जिसका साथी शैतान हो तो क्या ही बुरा साथी है
39وَمَاذَا عَلَيْهِمْ لَوْ آمَنُوا بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقَهُمُ اللَّهُ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِهِمْ عَلِيمًا
अगर ये लोग ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाते और जो कुछ ख़ुदा ने उन्हें दिया है उसमें से राहे ख़ुदा में ख़र्च करते तो उन पर क्या आफ़त आ जाती और ख़ुदा तो उनसे ख़ूब वाक़िफ़ है
40إِنَّ اللَّهَ لَا يَظْلِمُ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ ۖ وَإِن تَكُ حَسَنَةً يُضَاعِفْهَا وَيُؤْتِ مِن لَّدُنْهُ أَجْرًا عَظِيمًا
ख़ुदा तो हरगिज़ ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं करता बल्कि अगर ज़र्रा बराबर भी किसी की कोई नेकी हो तो उसको दूना करता है और अपनी तरफ़ से बड़ा सवाब अता फ़रमाता है
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अनुवाद — अन-निसा 38

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Tuesday, August 18, 2026

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