अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नज्जैना (नजात दी): हमने बचा लिया, मुक्त कर दिया।
- आमनू (ईमान लाए): अल्लाह और उसके रसूल पर पूर्ण विश्वास किया।
- यत्तक़ून (डरते थे): अल्लाह का भय रखते हुए उसके आदेशों का पालन करने वाले और उसकी मनाही से बचने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने उन लोगों का ज़िक्र किया है जो ईमान लाए और तक़वा (अल्लाह का डर) अपनाया। जब आद और समूद जैसी क़ौमों पर अल्लाह का अज़ाब (यातना) आया, तो उस विनाश से केवल वही लोग बचाए गए जो सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखते थे और अपने अमल में उसकी इताअत (आज्ञाकारिता) करते थे। उन्होंने अल्लाह के हुक्मों का पालन किया, उसकी मना की हुई चीज़ों से परहेज़ किया, और अपने नबी की बात मानी। इसी ईमान और तक़वा की बरकत से अल्लाह ने उन्हें उस भयानक अज़ाब से महफ़ूज़ रखा जो उनके क़ौम के काफ़िरों पर नाज़िल हुआ।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त उन्हीं को मिलती है जो ईमान और तक़वा के साथ जीते हैं। जब कोई क़ौम गुनाह और नाफ़रमानी में डूब जाती है, तो अल्लाह का अज़ाब आता है, लेकिन उसी क़ौम में बसे हुए नेक और मोमिन लोग भी अल्लाह की ख़ास रहमत से बचा लिए जाते हैं। यह अल्लाह का वादा है कि वह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।
दावती पहलू:
यह आयत हर मोमिन के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी और उम्मीद का पैग़ाम है। अल्लाह तआला हमें सिखा रहा है कि अगर हम सच्चे दिल से ईमान लाएँ और अपनी ज़िंदगी में तक़वा (अल्लाह का डर) अपनाएँ, तो अल्लाह हमें हर मुसीबत, हर अज़ाब और हर बुराई से बचा लेगा। चाहे दुनिया में कितनी भी फ़ित्ने (परीक्षाएँ) क्यों न आएँ, अल्लाह अपने मोमिन बंदों को हिफ़ाज़त में रखता है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है। आओ, हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने अंदर तक़वा पैदा करें, ताकि हम भी उन ख़ुशनसीब लोगों में शामिल हो सकें जिन्हें अल्लाह की पनाह और रहमत हासिल है। अल्लाह हमें सच्चा ईमान और पक्का तक़वा अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 16-20 — फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 18
सूरा फुस्सिलत आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग ईमान लाए और परहेज़गारी करते थे उनको…सूरा आयत 18/54 — फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फुस्सिलत सुनें, फुस्सिलत अनुवाद, फुस्सिलत mp3, फुस्सिलत pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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