अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَسْتَتِرُونَ – तुम छिपते थे, गोपन करते थे
- يَشْهَدَ – गवाही दे
- سَمْعُكُمْ – तुम्हारे कान (श्रवण शक्ति)
- أَبْصَارُكُمْ – तुम्हारी आँखें (दृष्टि)
- جُلُودُكُمْ – तुम्हारी खालें (त्वचा)
तफ़सीर:
ऐ अज़ाब में डाले गए लोगो! जब तुम दुनिया में गुनाह करते थे, तो तुम लोगों से छिपते थे कि कोई तुम्हें न देख ले, लेकिन क्या तुम इसलिए छिपते थे कि तुम्हारे कान, तुम्हारी आँखें और तुम्हारी खालें क़ियामत के दिन तुम्हारे खिलाफ़ गवाही न दें? हरगिज़ नहीं! तुम तो यह सोचकर गुनाह करते थे कि अल्लाह तआला को तुम्हारे बहुत से कामों का इल्म ही नहीं है। तुमने यह ग़लत गुमान किया कि अल्लाह तुम्हारे छिपे हुए कामों को नहीं जानता, इसलिए तुम बेख़ौफ होकर गुनाहों में मुब्तिला हो गए।
यह तुम्हारा बहुत बुरा अंदाज़ा था जो तुमने अपने रब के बारे में किया। यही बुरा गुमान तुम्हारी हलाकत का सबब बना और तुम्हें जहन्नम की आग तक ले गया। अगर तुम यक़ीन करते कि अल्लाह हर चीज़ का जानने वाला है, छोटी-बड़ी कोई चीज़ उससे पोशीदा नहीं, तो तुम कभी इतनी जुर्रत से गुनाह न करते। तुम्हारा यही ग़लत अक़ीदा तुम्हारे लिए तबाही का बाइस बना।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह तआला की निगरानी का एहसास हमें हर वक़्त अपने दिल में ज़िंदा रखना चाहिए। जब हमें यक़ीन होगा कि अल्लाह हमारे हर अमल को देख रहा है, हमारे हर क़ौल को सुन रहा है, और हमारे दिल के राज़ तक जानता है, तो हम गुनाहों से बचेंगे। यही तक़वा है — अल्लाह की निगरानी का एहसास। याद रखिए! क़ियामत के दिन हमारे अपने अंग हमारे खिलाफ़ गवाही देंगे, इसलिए आज ही अपने आपको सुधार लें और अल्लाह की रहमत की तरफ़ लौट आएं। अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत पसंद करता है और अपनी रहमत से उन्हें माफ़ कर देता है।
📜 आयत 20-24 — सूरा फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 22
सूरा फुस्सिलत आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (तुम्हारी तो ये हालत थी कि) तुम लोग इस…सूरा आयत 22/54 — सूरा फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फुस्सिलत सुनें, सूरा फुस्सिलत अनुवाद, सूरा फुस्सिलत mp3, सूरा फुस्सिलत pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 7, 2026
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