फुस्सिलत · 22/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा फुस्सिलत
وَمَا كُنتُمْ تَسْتَتِرُونَ أَن يَشْهَدَ عَلَيْكُمْ سَمْعُكُمْ وَلَا أَبْصَارُكُمْ وَلَا جُلُودُكُمْ وَلَٰكِن ظَنَنتُمْ أَنَّ اللَّهَ لَا يَعْلَمُ كَثِيرًا مِّمَّا تَعْمَلُونَ ۝٢٢
Wa maa kuntum tastatiroona ai-yashhada `alaikum sam`ukum wa laaa absaarukum wa laa juloodukum wa laakin zanantum annal laaha laa ya`lamu kaseeram mimmaa ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और (तुम्हारी तो ये हालत थी कि) तुम लोग इस ख्याल से (अपने गुनाहों की) पर्दा दारी भी तो नहीं करते थे कि तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे और तुम्हारे आज़ा तुम्हारे बरख़िलाफ गवाही देंगे बल्कि तुम इस ख्याल मे (भूले हुए) थे कि ख़ुदा को तुम्हारे बहुत से कामों की ख़बर ही नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَسْتَتِرُونَ – तुम छिपते थे, गोपन करते थे
  • يَشْهَدَ – गवाही दे
  • سَمْعُكُمْ – तुम्हारे कान (श्रवण शक्ति)
  • أَبْصَارُكُمْ – तुम्हारी आँखें (दृष्टि)
  • جُلُودُكُمْ – तुम्हारी खालें (त्वचा)

तफ़सीर:

ऐ अज़ाब में डाले गए लोगो! जब तुम दुनिया में गुनाह करते थे, तो तुम लोगों से छिपते थे कि कोई तुम्हें न देख ले, लेकिन क्या तुम इसलिए छिपते थे कि तुम्हारे कान, तुम्हारी आँखें और तुम्हारी खालें क़ियामत के दिन तुम्हारे खिलाफ़ गवाही न दें? हरगिज़ नहीं! तुम तो यह सोचकर गुनाह करते थे कि अल्लाह तआला को तुम्हारे बहुत से कामों का इल्म ही नहीं है। तुमने यह ग़लत गुमान किया कि अल्लाह तुम्हारे छिपे हुए कामों को नहीं जानता, इसलिए तुम बेख़ौफ होकर गुनाहों में मुब्तिला हो गए।

यह तुम्हारा बहुत बुरा अंदाज़ा था जो तुमने अपने रब के बारे में किया। यही बुरा गुमान तुम्हारी हलाकत का सबब बना और तुम्हें जहन्नम की आग तक ले गया। अगर तुम यक़ीन करते कि अल्लाह हर चीज़ का जानने वाला है, छोटी-बड़ी कोई चीज़ उससे पोशीदा नहीं, तो तुम कभी इतनी जुर्रत से गुनाह न करते। तुम्हारा यही ग़लत अक़ीदा तुम्हारे लिए तबाही का बाइस बना।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह तआला की निगरानी का एहसास हमें हर वक़्त अपने दिल में ज़िंदा रखना चाहिए। जब हमें यक़ीन होगा कि अल्लाह हमारे हर अमल को देख रहा है, हमारे हर क़ौल को सुन रहा है, और हमारे दिल के राज़ तक जानता है, तो हम गुनाहों से बचेंगे। यही तक़वा है — अल्लाह की निगरानी का एहसास। याद रखिए! क़ियामत के दिन हमारे अपने अंग हमारे खिलाफ़ गवाही देंगे, इसलिए आज ही अपने आपको सुधार लें और अल्लाह की रहमत की तरफ़ लौट आएं। अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत पसंद करता है और अपनी रहमत से उन्हें माफ़ कर देता है।



📜 आयत 20-24 — सूरा फुस्सिलत

20حَتَّىٰ إِذَا مَا جَاءُوهَا شَهِدَ عَلَيْهِمْ سَمْعُهُمْ وَأَبْصَارُهُمْ وَجُلُودُهُم بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
यहाँ तक की जब सब के सब जहन्नुम के पास जाएँगे तो उनके कान और उनकी ऑंखें और उनके (गोश्त पोस्त) उनके ख़िलाफ उनके मुक़ाबले में उनकी कारस्तानियों की गवाही देगें
21وَقَالُوا لِجُلُودِهِمْ لِمَ شَهِدتُّمْ عَلَيْنَا ۖ قَالُوا أَنطَقَنَا اللَّهُ الَّذِي أَنطَقَ كُلَّ شَيْءٍ وَهُوَ خَلَقَكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और ये लोग अपने आज़ा से कहेंगे कि तुमने हमारे ख़िलाफ क्यों गवाही दी तो वह जवाब देंगे कि जिस ख़ुदा ने हर चीज़ को गोया किया उसने हमको भी (अपनी क़ुदरत से) गोया किया और उसी ने तुमको पहली बार पैदा किया था और (आख़िर) उसी की तरफ लौट कर जाओगे
22وَمَا كُنتُمْ تَسْتَتِرُونَ أَن يَشْهَدَ عَلَيْكُمْ سَمْعُكُمْ وَلَا أَبْصَارُكُمْ وَلَا جُلُودُكُمْ وَلَٰكِن ظَنَنتُمْ أَنَّ اللَّهَ لَا يَعْلَمُ كَثِيرًا مِّمَّا تَعْمَلُونَ
और (तुम्हारी तो ये हालत थी कि) तुम लोग इस ख्याल से (अपने गुनाहों की) पर्दा दारी भी तो नहीं करते थे कि तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे और तुम्हारे आज़ा तुम्हारे बरख़िलाफ गवाही देंगे बल्कि तुम इस ख्याल मे (भूले हुए) थे कि ख़ुदा को तुम्हारे बहुत से कामों की ख़बर ही नहीं
23وَذَٰلِكُمْ ظَنُّكُمُ الَّذِي ظَنَنتُم بِرَبِّكُمْ أَرْدَاكُمْ فَأَصْبَحْتُم مِّنَ الْخَاسِرِينَ
और तुम्हारी इस बदख्याली ने जो तुम अपने परवरदिगार के बारे में रखते थे तुम्हें तबाह कर छोड़ा आख़िर तुम घाटे में रहे
24فَإِن يَصْبِرُوا فَالنَّارُ مَثْوًى لَّهُمْ ۖ وَإِن يَسْتَعْتِبُوا فَمَا هُم مِّنَ الْمُعْتَبِينَ
फिर अगर ये लोग सब्र भी करें तो भी इनका ठिकाना दोज़ख़ ही है और अगर तौबा करें तो भी इनकी तौबा क़ुबूल न की जाएगी
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22आयत

अनुवाद — फुस्सिलत 22

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Monday, September 28, 2026

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