Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مُلْكُ – स्वामित्व, राज्य
- يَخْلُقُ – पैदा करता है, सृजन करता है
- يَهَبُ – प्रदान करता है, दान करता है
- إِنَاثًا – बेटियाँ (लड़कियाँ)
- الذُّكُورَ – बेटे (लड़के)
तफ़सीर (व्याख्या):
आसमानों और ज़मीन का पूरा राज्य, उनकी सारी चीज़ें, उनके सारे राज़ और उनके सारे ख़ज़ाने—सब कुछ सिर्फ़ अल्लाह ही के हैं। वही इस सारी कायनात का मालिक है, और उसकी मलकियत में किसी का कोई हिस्सा नहीं। वह जो चाहता है, पैदा करता है, और जिस तरह चाहता है, बनाता है। उसकी रचना पर किसी को कोई एतराज़ नहीं हो सकता, क्योंकि वही सबसे बुद्धिमान, सबसे जानने वाला और सबसे दयालु है।
अल्लाह तआला अपनी असीम शक्ति और हिकमत से इंसानों को संतान देता है। वह जिसे चाहता है, सिर्फ़ बेटियाँ देता है, और जिसे चाहता है, सिर्फ़ बेटे देता है। यह उसका फ़ैसला है, और उसके फ़ैसले में कोई कमी नहीं होती। कुछ लोगों को वह बेटे और बेटियाँ दोनों देता है, तो कुछ को वह बिल्कुल संतान से वंचित रखता है और उन्हें निस्संतान कर देता है। यह सब उसकी मर्ज़ी और उसकी हिकमत के मुताबिक़ होता है।
इस आयत में अल्लाह तआला हमें यह सिखा रहा है कि संतान देना या न देना, बेटा देना या बेटी देना—यह सब अल्लाह के हाथ में है, इंसान के हाथ में नहीं। अरब के जाहिलिया दौर में लोग बेटियों को बुरा मानते थे और उन्हें ज़िंदा दफ़न कर देते थे। अल्लाह ने इस आयत में उस बुरी सोच का खंडन किया और बताया कि बेटी देना भी अल्लाह की तरफ़ से एक नेमत है, और बेटा देना भी एक नेमत है। दोनों में कोई कमी नहीं। अल्लाह जो देता है, उसमें भलाई होती है, चाहे वह बेटा हो या बेटी।
यह आयत हमें अल्लाह पर पूरा भरोसा रखने की तालीम देती है। हमें अपनी पसंद और नापसंद को अल्लाह की मर्ज़ी के आगे झुकाना चाहिए। अल्लाह जो फ़ैसला करता है, वही बेहतरीन होता है, भले ही हमें उसकी हिकमत समझ न आए। जिसे बेटियाँ मिलती हैं, उसे चाहिए कि वह अल्लाह का शुक्र अदा करे और उनकी अच्छी परवरिश करे। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि जिसने दो बेटियों की परवरिश अच्छे तरीक़े से की, वह मेरे साथ जन्नत में इस तरह होगा जैसे दो उंगलियाँ एक साथ हों।
अल्लाह तआला हर चीज़ से बाख़बर है। वह जानता है कि किसे क्या देना है, कब देना है, और कितना देना है। उसका इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है, और उसकी क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है। उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। इसलिए हमें अपने रब की रज़ा पर राज़ी रहना चाहिए और उसके हर फ़ैसले को खुशी से क़ुबूल करना चाहिए। यही सच्चे मुसलमान की पहचान है कि वह अल्लाह के फ़ैसले पर संतुष्ट रहे और उसकी रहमत से कभी निराश न हो।
📜 आयत 47-51 — सूरा अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 49
सूरा अश-शूरा आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सारे आसमान व ज़मीन की हुकूमत ख़ास ख़ुदा ही की…सूरा आयत 49/53 — सूरा अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शूरा सुनें, सूरा अश-शूरा अनुवाद, सूरा अश-शूरा mp3, सूरा अश-शूरा pdf. आयत 47–51. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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