अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- جُزْءًا (जुज़'अन): हिस्सा, भाग, या नसीब।
- كَفُورٌ (कफ़ूर): अत्यधिक कृतघ्न, नेमतों का इनकार करने वाला।
- مُبِينٌ (मुबीन): स्पष्ट, खुला हुआ, ज़ाहिर।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने मुशरिकीन (बहुदेववादियों) के उस बड़े कुफ़्र और गुमराही का ज़िक्र किया है, जिसमें उन्होंने अल्लाह के बंदों में से कुछ को उसका हिस्सा ठहरा दिया। उनका कहना था कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं — नाउज़ुबिल्लाह! यानी उन्होंने अल्लाह के लिए संतान होने का झूठा दावा किया, जबकि संतान माता-पिता का हिस्सा होती है और अल्लाह तो हर कमी और हर साथी से पाक और मुकद्दस है। यह उनकी सबसे बड़ी जहालत और अक़्ल का इंकार था कि उन्होंने मख़लूक़ (प्राणियों) को ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता) का हिस्सा बना दिया।
इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है: "बेशक इंसान स्पष्ट कृतघ्न है।" यानी इंसान अपने रब की नेमतों का बहुत बड़ा इनकारी है। वह मुसीबतों को याद रखता है और नेमतों को भूल जाता है। जब उस पर कोई मुसीबत आती है तो वह चिल्लाता है, लेकिन जब अल्लाह उसे नेमत देता है तो वह उसका शुक्र अदा नहीं करता। यहाँ तक कि वह अल्लाह के बारे में ऐसी बातें कहता है जो उसकी शान के लिए हरगिज़ मुनासिब नहीं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ज़ात, उसके नाम और उसकी सिफ़ात में कोई शरीक नहीं है। हमें चाहिए कि हम अपने रब की नेमतों को पहचानें और उसका शुक्र अदा करें। जो इंसान अल्लाह की नेमतों को भूलकर उसके बारे में बुरे ख़यालात रखता है या उसकी शान में कमी लाता है, वह अपने नुक़्सान में है। अल्लाह तआला हमें शुक्रगुज़ार बंदे बनाए और हमें उसकी ज़ात और सिफ़ात के बारे में सही अक़ीदा अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 13-17 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 15
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन लोगों ने उसके बन्दों में से उसके लिए…सूरा आयत 15/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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