अद-दुखान · 38/59
अनुवाद उच्चारण — सूरा अद-दुखान
وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَاعِبِينَ ۝٣٨
Wa maa khalaqnas samaawaati wal arda wa maa baina humaa laa`ibeen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने सारे आसमान व ज़मीन और जो चीज़े उन दोनों के दरमियान में हैं उनको खेलते हुए नहीं बनाया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • लाअिबीन: खेल-कूद में लगे हुए, बेकार और व्यर्थ काम करने वाले।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने आसमानों, ज़मीन और उनके बीच की सभी चीज़ों को खेल-कूद के तौर पर या बेकार और व्यर्थ नहीं बनाया। यह पूरी कायनात (ब्रह्मांड) एक गहरे उद्देश्य, अद्भुत व्यवस्था और पूर्ण हिकमत (बुद्धिमत्ता) के साथ पैदा की गई है। हर चीज़ अपनी जगह पर एक ख़ास नियम और संतुलन के साथ क़ायम है, जो इस बात का सबूत है कि इसका ख़ालिक़ (रचयिता) एक महान और हकीम (बुद्धिमान) है।

यह कायनात किसी लापरवाह या खेलने वाले की रचना नहीं हो सकती, बल्कि यह उस अल्लाह की रचना है जो हर चीज़ को हक़ (सत्य) के साथ पैदा करता है। इसका मतलब यह है कि यह दुनिया कोई बेकार की चीज़ नहीं है, बल्कि इसका एक मक़सद है — अल्लाह की इबादत करना, उसके हुक्मों को समझना और उसके सामने जवाबदेह होना। यही वह हक़ है जिस पर यह सारी रचना टिकी हुई है।

लेकिन अफ़सोस! अधिकतर मुशरिकीन (बहुदेववादी) लोग इस हक़ीक़त को नहीं समझते। वे न तो इस कायनात पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं और न ही इसके पीछे छिपी हिकमत को जानने की कोशिश करते हैं। उनके दिलों में न तो अल्लाह के सवाब (इनाम) की उम्मीद होती है और न ही उसके अज़ाब (सज़ा) का डर। इसीलिए वे इस ब्रह्मांड को बेकार और लापरवाही से बना हुआ समझते हैं।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयो और बहनों! ज़रा सोचिए — जब हम इस विशाल आसमान, चमकते सितारों, फैले हुए समुद्रों, ऊँचे पहाड़ों और हरियाली से भरी ज़मीन को देखते हैं, तो क्या हमारा दिल यह गवाही नहीं देता कि इन सबका बनाने वाला कोई महान और हकीम है? यह सब कुछ अकारण नहीं बनाया गया। यह हमें बुला रहा है कि अपने रब को पहचानो, उसकी इबादत करो और उसके दिए हुए इन नेमतों पर शुक्र अदा करो। यह कायनात हमारे लिए एक खुली किताब है, जो हर पल हमें अल्लाह की याद दिलाती है। आओ, हम इस पर ग़ौर करें और अपने जीवन को एक मक़सद के साथ जिएँ — अल्लाह की रज़ा और उसकी मग़फ़िरत की तलाश में। यही हमारी कामयाबी है, यही हमारी सच्ची भलाई है।



📜 आयत 36-40 — सूरा अद-दुखान

36فَأْتُوا بِآبَائِنَا إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
तो अगर तुम सच्चे हो तो हमारे बाप दादाओं को (ज़िन्दा करके) ले आओ
37أَهُمْ خَيْرٌ أَمْ قَوْمُ تُبَّعٍ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ أَهْلَكْنَاهُمْ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا مُجْرِمِينَ
भला ये लोग (क़ूवत में) अच्छे हैं या तुब्बा की क़ौम और वह लोग जो उनसे पहले हो चुके हमने उन सबको हलाक कर दिया (क्योंकि) वह ज़रूर गुनाहगार थे
38وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَاعِبِينَ
और हमने सारे आसमान व ज़मीन और जो चीज़े उन दोनों के दरमियान में हैं उनको खेलते हुए नहीं बनाया
39مَا خَلَقْنَاهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
इन दोनों को हमने बस ठीक (मसलहत से) पैदा किया मगर उनमें के बहुतेरे लोग नहीं जानते
40إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ مِيقَاتُهُمْ أَجْمَعِينَ
बेशक फ़ैसला (क़यामत) का दिन उन सब (के दोबार ज़िन्दा होने) का मुक़र्रर वक्त है
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — अद-दुखान 38

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Friday, October 2, 2026

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