अद-दुखान · 39/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
مَا خَلَقْنَاهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ۝٣٩
Maa khalaqnaahumaaa illaa bilhaqqi wa laakinna aksarahum laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
इन दोनों को हमने बस ठीक (मसलहत से) पैदा किया मगर उनमें के बहुतेरे लोग नहीं जानते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا خَلَقْنَاهُمَا: हमने उन दोनों (आसमानों और ज़मीन) को पैदा नहीं किया।
  • بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, यानी एक उद्देश्य और हिकमत के साथ।
  • لَا يَعْلَمُونَ: वे नहीं जानते।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने आसमानों और ज़मीन को बेकार और खेल-तमाशे के लिए पैदा नहीं किया। बल्कि इन दोनों को सत्य और एक महान उद्देश्य के साथ पैदा किया गया है — यह अल्लाह की क़ुदरत की निशानी हैं, उसकी हिकमत का प्रमाण हैं, और इनमें बंदों के लिए अनगिनत फ़ायदे और सबक छिपे हैं। यह सृष्टि किसी लापरवाह खिलाड़ी का काम नहीं, बल्कि उस हकीम (सर्वज्ञानी) और क़ादिर (सर्वशक्तिमान) की रचना है जिसने हर चीज़ को एक माप और उद्देश्य के साथ बनाया है।

लेकिन अफ़सोस! इनमें से अधिकतर लोग — ख़ासकर मुशरिकीन (बहुदेववादी) — इस सच्चाई को नहीं जानते। उनकी निगाहें इन निशानियों पर नहीं जातीं, और उनके दिल इन पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं करते। वजह यह है कि उन्हें न किसी सवाब (पुण्य) की उम्मीद है और न किसी अज़ाब (दंड) का डर। अगर उन्हें यक़ीन होता कि यह कायनात एक हक़ के साथ बनाई गई है और इसका एक अंजाम है, तो वे ज़रूर इन निशानियों से सबक लेते और अपने रब की तरफ़ रुजू करते।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें ग़ौर-ओ-फ़िक्र की दावत देती है। जब हम आसमान की बुलंदियों, ज़मीन की फ़राग़त, और इनके बीच की अजीबो-ग़रीब मख़लूक़ात को देखें, तो हमारा दिल अपने ख़ालिक़ (रचयिता) की अज़मत से भर जाना चाहिए। यह कायनात कोई अंधी और बेमक़सद चीज़ नहीं, बल्कि हर ज़र्रा एक हिकमत की गवाही देता है। जो शख्स इस हक़ को पहचान ले, वह कभी ज़िंदगी को बेमक़सद नहीं जी सकता। वह जानता है कि उसका रब हक़ के साथ पैदा करने वाला है, और एक दिन उसे अपने आमाल का हिसाब देना है। यही ईमान इंसान को सीधे रास्ते पर चलाता है और उसे उस मक़सद की तरफ ले जाता है जिसके लिए उसे पैदा किया गया है। तो आओ, हम इस कायनात की निशानियों पर ग़ौर करें और अपने रब की तरफ़ पलटें — क्योंकि यही कामयाबी का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — अद-दुखान

37أَهُمْ خَيْرٌ أَمْ قَوْمُ تُبَّعٍ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ أَهْلَكْنَاهُمْ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا مُجْرِمِينَ
भला ये लोग (क़ूवत में) अच्छे हैं या तुब्बा की क़ौम और वह लोग जो उनसे पहले हो चुके हमने उन सबको हलाक कर दिया (क्योंकि) वह ज़रूर गुनाहगार थे
38وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَاعِبِينَ
और हमने सारे आसमान व ज़मीन और जो चीज़े उन दोनों के दरमियान में हैं उनको खेलते हुए नहीं बनाया
39مَا خَلَقْنَاهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
इन दोनों को हमने बस ठीक (मसलहत से) पैदा किया मगर उनमें के बहुतेरे लोग नहीं जानते
40إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ مِيقَاتُهُمْ أَجْمَعِينَ
बेशक फ़ैसला (क़यामत) का दिन उन सब (के दोबार ज़िन्दा होने) का मुक़र्रर वक्त है
41يَوْمَ لَا يُغْنِي مَوْلًى عَن مَّوْلًى شَيْئًا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
जिस दिन कोई दोस्त किसी दोस्त के कुछ काम न आएगा और न उन की मदद की जाएगी
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
39आयत

अनुवाद — अद-दुखान 39

सूरा अद-दुखान आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इन दोनों को हमने बस ठीक (मसलहत से) पैदा किया…

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Tuesday, August 18, 2026

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