अल-माइदा · 21/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
يَا قَوْمِ ادْخُلُوا الْأَرْضَ الْمُقَدَّسَةَ الَّتِي كَتَبَ اللَّهُ لَكُمْ وَلَا تَرْتَدُّوا عَلَىٰ أَدْبَارِكُمْ فَتَنقَلِبُوا خَاسِرِينَ ۝٢١
Yaa qawmid khulul Ardal MMuqaddasatal latee katabal laahu lakum wa laa tartaddoo `alaaa adbaarikum fatanqaliboo khaasireen
📖 हिंदी अर्थ
ऐ मेरी क़ौम (शाम) की उस मुक़द्दस ज़मीन में जाओ जहॉ ख़ुदा ने तुम्हारी तक़दीर में (हुकूमत) लिख दी है और दुशमन के मुक़ाबले पीठ न फेरो (क्योंकि) इसमें तो तुम ख़ुद उलटा घाटा उठाओगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الأَرْضَ الْمُقَدَّسَةَ: पवित्र भूमि, जिसे पाक और बरकत वाली भूमि कहा गया है।
  • كَتَبَ اللَّهُ لَكُمْ: अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है, यानी तक़दीर में और अपने वादे में तय कर दिया है।
  • وَلَا تَرْتَدُّوا عَلَىٰ أَدْبَارِكُمْ: अपनी पीठ के बल न लौटो, यानी पीछे मत हटो और भागो मत।
  • فَتَنقَلِبُوا خَاسِرِينَ: तो तुम घाटे में पड़ जाओगे, यानी दुनिया और आख़िरत दोनों में नुक़सान उठाओगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम बनी इसराइल को ख़िताब करते हुए कहा: "ऐ मेरी क़ौम! उस पवित्र भूमि में दाख़िल हो जाओ, जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए मुक़र्रर की है — यानी बैतुल-मुक़द्दस (यरूशलम) और उसके आस-पास का इलाक़ा। यह वही ज़मीन है जो अल्लाह ने अपने फ़रमान और अपने वादे में तुम्हें दी है, और तुम्हें वहाँ के ज़ालिमों से जंग करके उसे अपने क़ब्ज़े में लेना है।"

फिर उन्होंने उन्हें सबसे ज़रूरी नसीहत दी: "और अपनी पीठ के बल न लौटना, यानी दुश्मन के डर से मैदान-ए-जंग से भागना मत। क्योंकि अगर तुम ऐसा करोगे, तो तुम घाटे में पड़ जाओगे — दुनिया में तुम्हारी ज़िल्लत होगी, और आख़िरत में अल्लाह की पकड़ और उसका अज़ाब तुम्हारा इंतज़ार कर रहा होगा। तुम दोनों जहान की भलाई से महरूम हो जाओगे।"

यह पुकार सिर्फ़ बनी इसराइल के लिए नहीं थी, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक सबक़ है जो अल्लाह के वादे पर भरोसा करता है। अल्लाह ने अपने बंदों से वादा किया है कि अगर वे उसकी राह में सब्र और इस्तिक़ामत (स्थिरता) दिखाएँ, तो वह उन्हें ज़मीन में ख़िलाफ़त (अधिकार) अता करेगा। लेकिन शर्त यह है कि मुसीबतों और दुश्मनों के सामने पीठ न दिखाएँ, क्योंकि पीछे हटने वाला कभी कामयाब नहीं होता।

याद रखिए, अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसकी मदद उन्हीं के साथ होती है जो उसके दीन पर जमे रहते हैं। जो लोग अल्लाह की राह में आगे बढ़ते हैं, अल्लाह उनके क़दमों को मज़बूत करता है और उन्हें फ़तह (विजय) अता करता है। और जो लोग डर के मारे पीछे हट जाते हैं, वे दुनिया में भी रुसवा होते हैं और आख़िरत में भी नाकाम। इसलिए हमें चाहिए कि अल्लाह के वादों पर पूरा यक़ीन रखें, उसकी राह में हिम्मत और सब्र से काम लें, और कभी भी हार न मानें — क्योंकि अल्लाह की मदद सब्र और इस्तिक़ामत के साथ है।



📜 आयत 19-23 — सूरा अल-माइदा

19يَا أَهْلَ الْكِتَابِ قَدْ جَاءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ عَلَىٰ فَتْرَةٍ مِّنَ الرُّسُلِ أَن تَقُولُوا مَا جَاءَنَا مِن بَشِيرٍ وَلَا نَذِيرٍ ۖ فَقَدْ جَاءَكُم بَشِيرٌ وَنَذِيرٌ ۗ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
ऐ अहले किताब जब पैग़म्बरों की आमद में बहुत रूकावट हुई तो हमारा रसूल तुम्हारे पास आया जो एहकामे ख़ुदा को साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम कहीं ये न कह बैठो कि हमारे पास तो न कोई ख़ुशख़बरी देने वाला (पैग़म्बर) आया न (अज़ाब से) डराने वाला अब तो (ये नहीं कह सकते क्योंकि) यक़ीनन तुम्हारे पास ख़ुशख़बरी देने वाला और डराने वाला पैग़म्बर आ गया और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
20وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ يَا قَوْمِ اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ جَعَلَ فِيكُمْ أَنبِيَاءَ وَجَعَلَكُم مُّلُوكًا وَآتَاكُم مَّا لَمْ يُؤْتِ أَحَدًا مِّنَ الْعَالَمِينَ
ऐ रसूल उनको वह वक्त याद (दिलाओ) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा था कि ऐ मेरी क़ौम जो नेअमते ख़ुदा ने तुमको दी है उसको याद करो इसलिए कि उसने तुम्हीं लोगों से बहुतेरे पैग़म्बर बनाए और तुम ही लोगों को बादशाह (भी) बनाया और तुम्हें वह नेअमतें दी हैं जो सारी ख़ुदायी में किसी एक को न दीं
21يَا قَوْمِ ادْخُلُوا الْأَرْضَ الْمُقَدَّسَةَ الَّتِي كَتَبَ اللَّهُ لَكُمْ وَلَا تَرْتَدُّوا عَلَىٰ أَدْبَارِكُمْ فَتَنقَلِبُوا خَاسِرِينَ
ऐ मेरी क़ौम (शाम) की उस मुक़द्दस ज़मीन में जाओ जहॉ ख़ुदा ने तुम्हारी तक़दीर में (हुकूमत) लिख दी है और दुशमन के मुक़ाबले पीठ न फेरो (क्योंकि) इसमें तो तुम ख़ुद उलटा घाटा उठाओगे
22قَالُوا يَا مُوسَىٰ إِنَّ فِيهَا قَوْمًا جَبَّارِينَ وَإِنَّا لَن نَّدْخُلَهَا حَتَّىٰ يَخْرُجُوا مِنْهَا فَإِن يَخْرُجُوا مِنْهَا فَإِنَّا دَاخِلُونَ
वह लोग कहने लगे कि ऐ मूसा इस मुल्क में तो बड़े ज़बरदस्त (सरकश) लोग रहते हैं और जब तक वह लोग इसमें से निकल न जाएं हम तो उसमें कभी पॉव भी न रखेंगे हॉ अगर वह लोग ख़ुद इसमें से निकल जाएं तो अलबत्ता हम ज़रूर जाएंगे
23قَالَ رَجُلَانِ مِنَ الَّذِينَ يَخَافُونَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِمَا ادْخُلُوا عَلَيْهِمُ الْبَابَ فَإِذَا دَخَلْتُمُوهُ فَإِنَّكُمْ غَالِبُونَ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَتَوَكَّلُوا إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
(मगर) वह आदमी (यूशा कालिब) जो ख़ुदा का ख़ौफ़ रखते थे और जिनपर ख़ुदा ने ख़ास अपना फ़ज़ल (करम) किया था बेधड़क बोल उठे कि (अरे) उनपर हमला करके (बैतुल मुक़दस के फाटक में तो घुस पड़ो फिर देखो तो यह ऐसे बोदे हैं कि) इधर तुम फाटक में घुसे और (ये सब भाग खड़े हुए और) तुम्हारी जीत हो गयी और अगर सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखो
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
21आयत

अनुवाद — अल-माइदा 21

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सूरा आयत 21/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.





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Saturday, October 3, 2026

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