अल-माइदा · 22/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
قَالُوا يَا مُوسَىٰ إِنَّ فِيهَا قَوْمًا جَبَّارِينَ وَإِنَّا لَن نَّدْخُلَهَا حَتَّىٰ يَخْرُجُوا مِنْهَا فَإِن يَخْرُجُوا مِنْهَا فَإِنَّا دَاخِلُونَ ۝٢٢
Qaaloo yaa Moosaaa innaa feehaa qwman jabbaareena wa innaa lan nadkhulahaa hattaa yakhrujoo minhaa fa innaa daakhiloon
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग कहने लगे कि ऐ मूसा इस मुल्क में तो बड़े ज़बरदस्त (सरकश) लोग रहते हैं और जब तक वह लोग इसमें से निकल न जाएं हम तो उसमें कभी पॉव भी न रखेंगे हॉ अगर वह लोग ख़ुद इसमें से निकल जाएं तो अलबत्ता हम ज़रूर जाएंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • जब्बारीन (جبّارين): अत्यंत शक्तिशाली, बलवान और सरकश लोग, जो दूसरों पर अपनी इच्छा थोपते हैं। ये लोग 'अमालिक़ा' (अद के वंशज) कहलाते थे और अत्यंत विशालकाय व बलशाली थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को अल्लाह का हुक्म सुनाया कि वे पवित्र भूमि (बैतुल-मुक़द्दस) में प्रवेश करें, जो अल्लाह ने उनके लिए निर्धारित की है, तो उनकी क़ौम ने डर और कायरता दिखाते हुए उत्तर दिया: "ऐ मूसा! वहाँ अत्यंत शक्तिशाली और सरकश लोग रहते हैं। वे इतने बलवान हैं कि हम उनसे युद्ध करने की सामर्थ्य नहीं रखते। हम उस भूमि में तब तक प्रवेश नहीं कर सकते जब तक वे वहाँ से निकल न जाएँ। यदि वे वहाँ से निकल जाएँ, तो हम अवश्य प्रवेश कर लेंगे।"

यह उत्तर उनके ईमान की कमज़ोरी और अल्लाह पर भरोसे की कमी को दर्शाता है। उन्होंने अल्लाह के वादे पर विश्वास नहीं किया और अपनी सीमित शक्ति को देखकर अल्लाह की मदद को भूल गए। उन्होंने यह नहीं सोचा कि अल्लाह ने जिस भूमि को उनके लिए निर्धारित किया है, वह उन्हें विजय भी दिलाएगा, बशर्ते वे सच्चे दिल से उस पर भरोसा करें और उसके आदेश का पालन करें।

यहाँ से हमें एक महत्वपूर्ण शिक्षा मिलती है कि जब अल्लाह किसी कार्य का आदेश देता है, तो हमें उस पर भरोसा करके आगे बढ़ना चाहिए, न कि अपनी कमज़ोरी और बाधाओं को देखकर पीछे हटना चाहिए। अल्लाह की मदद उन्हीं के साथ होती है जो उसके आदेशों का पालन करते हैं और उस पर पूर्ण विश्वास रखते हैं। यह क़ौम इसलिए विफल रही क्योंकि उसने अल्लाह के वादे की अपेक्षा अपने डर को अधिक महत्व दिया।

इस घटना से हमें यह भी सीख मिलती है कि मुसलमान को कठिनाइयों के समय घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा करके साहस और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता है: "और जो कोई अल्लाह पर भरोसा करेगा, वह (अल्लाह) उसके लिए काफ़ी है।" (सूरह तलाक़: 3) — यानी जो अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए पर्याप्त है।



📜 आयत 20-24 — सूरा अल-माइदा

20وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ يَا قَوْمِ اذْكُرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ جَعَلَ فِيكُمْ أَنبِيَاءَ وَجَعَلَكُم مُّلُوكًا وَآتَاكُم مَّا لَمْ يُؤْتِ أَحَدًا مِّنَ الْعَالَمِينَ
ऐ रसूल उनको वह वक्त याद (दिलाओ) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा था कि ऐ मेरी क़ौम जो नेअमते ख़ुदा ने तुमको दी है उसको याद करो इसलिए कि उसने तुम्हीं लोगों से बहुतेरे पैग़म्बर बनाए और तुम ही लोगों को बादशाह (भी) बनाया और तुम्हें वह नेअमतें दी हैं जो सारी ख़ुदायी में किसी एक को न दीं
21يَا قَوْمِ ادْخُلُوا الْأَرْضَ الْمُقَدَّسَةَ الَّتِي كَتَبَ اللَّهُ لَكُمْ وَلَا تَرْتَدُّوا عَلَىٰ أَدْبَارِكُمْ فَتَنقَلِبُوا خَاسِرِينَ
ऐ मेरी क़ौम (शाम) की उस मुक़द्दस ज़मीन में जाओ जहॉ ख़ुदा ने तुम्हारी तक़दीर में (हुकूमत) लिख दी है और दुशमन के मुक़ाबले पीठ न फेरो (क्योंकि) इसमें तो तुम ख़ुद उलटा घाटा उठाओगे
22قَالُوا يَا مُوسَىٰ إِنَّ فِيهَا قَوْمًا جَبَّارِينَ وَإِنَّا لَن نَّدْخُلَهَا حَتَّىٰ يَخْرُجُوا مِنْهَا فَإِن يَخْرُجُوا مِنْهَا فَإِنَّا دَاخِلُونَ
वह लोग कहने लगे कि ऐ मूसा इस मुल्क में तो बड़े ज़बरदस्त (सरकश) लोग रहते हैं और जब तक वह लोग इसमें से निकल न जाएं हम तो उसमें कभी पॉव भी न रखेंगे हॉ अगर वह लोग ख़ुद इसमें से निकल जाएं तो अलबत्ता हम ज़रूर जाएंगे
23قَالَ رَجُلَانِ مِنَ الَّذِينَ يَخَافُونَ أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِمَا ادْخُلُوا عَلَيْهِمُ الْبَابَ فَإِذَا دَخَلْتُمُوهُ فَإِنَّكُمْ غَالِبُونَ ۚ وَعَلَى اللَّهِ فَتَوَكَّلُوا إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
(मगर) वह आदमी (यूशा कालिब) जो ख़ुदा का ख़ौफ़ रखते थे और जिनपर ख़ुदा ने ख़ास अपना फ़ज़ल (करम) किया था बेधड़क बोल उठे कि (अरे) उनपर हमला करके (बैतुल मुक़दस के फाटक में तो घुस पड़ो फिर देखो तो यह ऐसे बोदे हैं कि) इधर तुम फाटक में घुसे और (ये सब भाग खड़े हुए और) तुम्हारी जीत हो गयी और अगर सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखो
24قَالُوا يَا مُوسَىٰ إِنَّا لَن نَّدْخُلَهَا أَبَدًا مَّا دَامُوا فِيهَا ۖ فَاذْهَبْ أَنتَ وَرَبُّكَ فَقَاتِلَا إِنَّا هَاهُنَا قَاعِدُونَ
वह कहने लगे एक मूसा (चाहे जो कुछ हो) जब तक वह लोग इसमें हैं हम तो उसमें हरगिज़ (लाख बरस) पॉव न रखेंगे हॉ तुम जाओ और तुम्हारा ख़ुदा जाए ओर दोनों (जाकर) लड़ो हम तो यहीं जमे बैठे हैं
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
22आयत

अनुवाद — अल-माइदा 22

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Wednesday, September 30, 2026

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