काफ · 29/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा काफ
مَا يُبَدَّلُ الْقَوْلُ لَدَيَّ وَمَا أَنَا بِظَلَّامٍ لِّلْعَبِيدِ ۝٢٩
Maa yubaddalul qawlu ladaiya wa maaa ana bizal laamil lil`abeed
📖 हिंदी अर्थ
मेरे यहाँ बात बदला नहीं करती और न मैं बन्दों पर (ज़र्रा बराबर) ज़ुल्म करने वाला हूँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا يُبَدَّلُ الْقَوْلُ: बात नहीं बदली जाती, यानी मेरा फैसला और वादा अटल है।
  • لَدَيَّ: मेरे पास, मेरी ओर से।
  • ظَلَّامٌ لِلْعَبِيدِ: बंदों पर अत्याचार करने वाला (यहाँ "ظَلَّام" अत्याचार की अत्यधिकता को दर्शाता है, यानी मैं बिल्कुल भी ज़ुल्म करने वाला नहीं हूँ)।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि मेरा क़ौल (वचन और फैसला) कभी नहीं बदलता। जो बात मैंने कह दी, वह अटल है — चाहे वह इनाम का वादा हो या अज़ाब की चेतावनी। मेरे यहाँ कोई परिवर्तन, कोई रद्दोबदल, और कोई टालमटोल नहीं होती। मेरा हर फैसला हिकमत और अदल (न्याय) पर आधारित है।

और मैं अपने बंदों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं हूँ। मैं किसी को किसी दूसरे के गुनाह की सज़ा नहीं देता, न ही किसी की नेकियों को घटाता हूँ, और न ही किसी की बुराइयों को बढ़ाकर उसे सज़ा देता हूँ। बल्कि हर इंसान को उसके अपने कर्मों का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा — अगर नेकी है तो नेकी का बदला, और अगर गुनाह है तो उसी के अनुसार सज़ा, बशर्ते कि उस पर हुज्जत (प्रमाण) क़ायम हो चुकी हो।

यह अल्लाह का परम न्याय है — वह अपने बंदों पर रत्ती भर भी ज़ुल्म नहीं करता। अगर कोई जहन्नम में जाता है, तो वह अपने कर्मों की वजह से जाता है, और अगर कोई जन्नत में जाता है, तो यह अल्लाह का फज़ल (कृपा) और करम है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के न्याय और उसकी रहमत का गहरा एहसास कराती है। जिस रब का फैसला बदलता नहीं, उसका वादा सच्चा है — और उसने जन्नत का वादा किया है उन लोगों के लिए जो ईमान लाएँ और नेक काम करें। साथ ही, यह जानकर दिल को सुकून मिलता है कि अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता — न दुनिया में, न आख़िरत में। हर इंसान को उसकी मेहनत का फल मिलेगा। तो आओ, हम अपने रब की तरफ़ रुजू करें, उसके वादों पर भरोसा रखें, और अपने कर्मों को सुधारें — क्योंकि आज का हर अच्छा काम कल हमारे लिए रोशनी बनेगा, और अल्लाह का न्याय कभी किसी को निराश नहीं करता।



📜 आयत 27-31 — सूरा काफ

27۞ قَالَ قَرِينُهُ رَبَّنَا مَا أَطْغَيْتُهُ وَلَٰكِن كَانَ فِي ضَلَالٍ بَعِيدٍ
(उस वक्त) उसका साथी (शैतान) कहेगा परवरदिगार हमने इसको गुमराह नहीं किया था बल्कि ये तो ख़ुद सख्त गुमराही में मुब्तिला था
28قَالَ لَا تَخْتَصِمُوا لَدَيَّ وَقَدْ قَدَّمْتُ إِلَيْكُم بِالْوَعِيدِ
इस पर ख़ुदा फ़रमाएगा हमारे सामने झगड़े न करो मैं तो तुम लोगों को पहले ही (अज़ाब से) डरा चुका था
29مَا يُبَدَّلُ الْقَوْلُ لَدَيَّ وَمَا أَنَا بِظَلَّامٍ لِّلْعَبِيدِ
मेरे यहाँ बात बदला नहीं करती और न मैं बन्दों पर (ज़र्रा बराबर) ज़ुल्म करने वाला हूँ
30يَوْمَ نَقُولُ لِجَهَنَّمَ هَلِ امْتَلَأْتِ وَتَقُولُ هَلْ مِن مَّزِيدٍ
उस दिन हम दोज़ख़ से पूछेंगे कि तू भर चुकी और वह कहेगी क्या कुछ और भी हैं
31وَأُزْلِفَتِ الْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ غَيْرَ بَعِيدٍ
और बेहिश्त परहेज़गारों के बिलकुल करीब कर दी जाएगी
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
29आयत

अनुवाद — काफ 29

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Thursday, October 1, 2026

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