अज़-ज़ारियात · 40/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
فَأَخَذْنَاهُ وَجُنُودَهُ فَنَبَذْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌ ۝٤٠
Fa akhaznaahu wa junoo dahoo fanabaznaahum fil yammi wa huwa muleem
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने उसको और उसके लशकर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में पटक दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَنَبَذْنَاهُمْ: हमने उन्हें फेंक दिया।
  • الْيَمِّ: समुद्र (यहाँ अर्थ: समुद्र का पानी)।
  • مُلِيمٌ: वह जो ऐसा कार्य करे जिस पर उसे दोष दिया जाए, अर्थात निन्दा के योग्य।

तफसीर:

अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसके सैनिकों को पकड़ा और उन सबको समुद्र में फेंक दिया, यानी उन्हें समुद्र में डुबोकर हलाक कर दिया। यह अल्लाह की उस सज़ा का हिस्सा था जो उसने अपने नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) को झुठलाने और अल्लाह की आयतों का इनकार करने पर उन्हें दी। फ़िरऔन अपने उस कृत्य के कारण निन्दा और मलामत का पात्र बना, क्योंकि उसने कुफ्र और ज़ुल्म का रास्ता अपनाया, अल्लाह के साथ कुफ्र किया और यहाँ तक दावा किया कि "मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूँ।" उसका यह घमंड और सरकशी आख़िरकार उसे समुद्र में डुबोकर हलाकत के गड्ढे में ले गई।

यह घटना हमारे लिए एक बड़ी सीख और नसीहत है कि अल्लाह की शक्ति के आगे कोई ताकतवर नहीं ठहर सकता। फ़िरऔन के पास विशाल सेना, धन-दौलत और ताकत थी, लेकिन जब अल्लाह का फैसला आया तो उसकी सारी ताकत उसके किसी काम न आई। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह के हुक्मों के आगे सर झुकाना चाहिए, उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए और अपनी ताकत या दौलत पर घमंड नहीं करना चाहिए। अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो विनम्र हों, उसकी इबादत करें और उसके रास्ते पर चलें। यह क़िस्सा हमें यह भी बताता है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह ज़ालिमों को कभी नहीं छोड़ता। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह से डरना चाहिए और उसकी रहमत की उम्मीद रखनी चाहिए, क्योंकि वही सबसे बड़ा मददगार और क्षमा करने वाला है।



📜 आयत 38-42 — सूरा अज़-ज़ारियात

38وَفِي مُوسَىٰ إِذْ أَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
जब हमने उनको फिरऔन के पास खुला हुआ मौजिज़ा देकर भेजा
39فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِ وَقَالَ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ
तो उसने अपने लशकर के बिरते पर मुँह मोड़ लिया और कहने लगा ये तो (अच्छा ख़ासा) जादूगर या सौदाई है
40فَأَخَذْنَاهُ وَجُنُودَهُ فَنَبَذْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌ
तो हमने उसको और उसके लशकर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में पटक दिया
41وَفِي عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الرِّيحَ الْعَقِيمَ
और वह तो क़ाबिले मलामत काम करता ही था और आद की क़ौम (के हाल) में भी निशानी है हमने उन पर एक बे बरकत ऑंधी चलायी
42مَا تَذَرُ مِن شَيْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَالرَّمِيمِ
कि जिस चीज़ पर चलती उसको बोसीदा हडडी की तरह रेज़ा रेज़ा किए बग़ैर न छोड़ती
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 40

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Friday, October 2, 2026

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