Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَتَوَلَّ عَنْهُمْ – उनसे मुँह फेर लो, उनकी ओर ध्यान देना बंद कर दो।
- بِمَلُومٍ – मलामत किया गया, दोषी ठहराया गया, निन्दित।
व्याख्या:
हे नबी! जब ये मुशरिकीन आपकी दावत को ठुकरा चुके हैं और अपनी सरकशी पर अड़े हुए हैं, तो आप उनसे किनारा कर लें और उनके इनकार पर अपने दिल को परेशान न करें। आप पर कोई मलामत या इल्ज़ाम नहीं है, क्योंकि आपने अपना फर्ज़ पूरा कर दिया—उन्हें सच्चा पैग़ाम पहुँचा दिया, उन्हें सीधा रास्ता दिखा दिया और उन्हें अज़ाब से डरा दिया। अब जो हिदायत नहीं पाता, उसका वबाल उसी पर है। आपने जो ज़िम्मेदारी उठाई थी, वह आपने पूरी अदा कर दी। यही आपकी सबसे बड़ी सफलता है कि आपने पैग़ाम-ए-हक़ पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
दावती पहलू:
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी को एक बहुत बड़ी तसल्ली दे रहा है—कि जब आपने हक़ पहुँचा दिया, तो आप पर कोई इल्ज़ाम नहीं। यह हमारे लिए भी एक सबक़ है कि हमारा काम सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचाना है, लोगों को हिदायत देना हमारे बस में नहीं। अगर हमने दीन की बात साफ़-साफ़, ख़ुलूस के साथ पहुँचा दी, तो हमें अपने अंजाम की फ़िक्र नहीं करनी चाहिए। अल्लाह के दीन की नुसरत करने वालों को अल्लाह कभी नाकाम नहीं करता। यह आयत हर दाई-ए-इस्लाम के लिए हौसला है कि वह अपनी ज़िम्मेदारी निभाए, और बाक़ी अल्लाह पर छोड़ दे। जो लोग हक़ को ठुकराते हैं, उनका मामला अल्लाह के हवाले है—और अल्लाह बेहतरीन फ़ैसला करने वाला है।
📜 आयत 52-56 — सूरा अज़-ज़ारियात
अनुवाद — अज़-ज़ारियात 54
सूरा अज़-ज़ारियात आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (ऐ रसूल) तुम इनसे मुँह फेर लो तुम पर…सूरा आयत 54/60 — सूरा अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ारियात सुनें, सूरा अज़-ज़ारियात अनुवाद, सूरा अज़-ज़ारियात mp3, सूरा अज़-ज़ारियात pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ारियात
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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