अत-तूर · 30/49
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तूर
أَمْ يَقُولُونَ شَاعِرٌ نَّتَرَبَّصُ بِهِ رَيْبَ الْمَنُونِ ۝٣٠
Am yaqooloona shaa`irun natarabbasu bihee raibal manoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या (तुमको) ये लोग कहते हैं कि (ये) शायर हैं (और) हम तो उसके बारे में ज़माने के हवादिस का इन्तेज़ार कर रहे हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • شَاعِرٌ – कवि (शायर)
  • نَّتَرَبَّصُ – हम प्रतीक्षा करते हैं
  • رَيْبَ الْمَنُونِ – मौत की घटनाएँ, समय की आपदाएँ (यानी मृत्यु के कारण)

तफ़सीर (व्याख्या):

ये मक्का के मुशरिकीन (बहुदेववादियों) की बात है, जो अल्लाह के रसूल ﷺ के बारे में कहते थे कि ये कोई नबी नहीं, बल्कि एक शायर (कवि) हैं। उनका कहना था कि जिस तरह पुराने ज़माने के शायर मर जाते थे, उसी तरह हम इनकी मौत का इंतज़ार करते हैं, कि कब ये मर जाएँ और हम इनके दावे से छुटकारा पा लें। वे सोचते थे कि समय की घटनाएँ और मौत का सितम इन्हें भी ख़त्म कर देगा, जैसे पहले के कवियों को ख़त्म कर चुका है।

ये उनकी नादानी और हठधर्मिता की चरम सीमा थी कि वे सच्चाई को मानने के बजाय मौत की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्हें समझ नहीं था कि अल्लाह का भेजा हुआ रसूल उनकी बुरी सोच से ऊपर होता है। अल्लाह तआला ने इसका जवाब आगे की आयतों में दिया है कि ऐ नबी! आप उनसे कह दें कि तुम मेरी मौत का इंतज़ार करो, मैं भी तुम्हारे साथ अल्लाह के अज़ाब का इंतज़ार करता हूँ। फिर देख लेना कि किसकी मौत बेहतर होती है और किसे सच्चाई का सामना करना पड़ता है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि सच्चाई पर क़ायम रहने वालों को मुख़ालिफ़ों की बातों से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। वे चाहे कुछ भी कहें, चाहे मौत की दुआएँ माँगें, लेकिन अल्लाह अपने नबी और अपने दीन की हिफ़ाज़त करता है। आज भी इस्लाम की तरक़्क़ी इस बात की गवाह है कि अल्लाह का वादा सच्चा है, और जो लोग इस्लाम के दुश्मन हैं, वे आख़िर में नाकाम होते हैं।

ये आयत हमें सिखाती है कि जब हम सच्चाई पर हों, तो दुश्मनों की धमकियों और तंज़ से घबराना नहीं चाहिए। अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि वही सबसे बड़ा हिमायती है। और जो लोग नबी ﷺ की शान में ऐसी बातें कहते थे, आज उनका नामो-निशान मिट चुका है, जबकि नबी ﷺ का नाम हर जगह गूँजता है। यही अल्लाह की मदद का सबूत है।



📜 आयत 28-32 — सूरा अत-तूर

28إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْبَرُّ الرَّحِيمُ
इससे क़ब्ल हम उनसे दुआएँ किया करते थे बेशक वह एहसान करने वाला मेहरबान है
29فَذَكِّرْ فَمَا أَنتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍ
तो (ऐ रसूल) तुम नसीहत किए जाओ तो तुम अपने परवरदिगार के फज़ल से न काहिन हो और न मजनून किया
30أَمْ يَقُولُونَ شَاعِرٌ نَّتَرَبَّصُ بِهِ رَيْبَ الْمَنُونِ
क्या (तुमको) ये लोग कहते हैं कि (ये) शायर हैं (और) हम तो उसके बारे में ज़माने के हवादिस का इन्तेज़ार कर रहे हैं
31قُلْ تَرَبَّصُوا فَإِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُتَرَبِّصِينَ
तुम कह दो कि (अच्छा) तुम भी इन्तेज़ार करो मैं भी इन्तेज़ार करता हूँ
32أَمْ تَأْمُرُهُمْ أَحْلَامُهُم بِهَٰذَا ۚ أَمْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ
क्या उनकी अक्लें उन्हें ये (बातें) बताती हैं या ये लोग हैं ही सरकश
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीअवतरण स्थान
30आयत

अनुवाद — अत-तूर 30

सूरा अत-तूर आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या (तुमको) ये लोग कहते हैं कि (ये) शायर हैं…

सूरा आयत 30/49 — सूरा अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तूर सुनें, सूरा अत-तूर अनुवाद, सूरा अत-तूर mp3, सूरा अत-तूर pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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