अत-तूर · 35/49
अनुवाद उच्चारण — अत-तूर
أَمْ خُلِقُوا مِنْ غَيْرِ شَيْءٍ أَمْ هُمُ الْخَالِقُونَ ۝٣٥
Am khuliqoo min ghairi shai`in am humul khaaliqoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या ये लोग किसी के (पैदा किये) बग़ैर ही पैदा हो गए हैं या यही लोग (मख़लूक़ात के) पैदा करने वाले हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَمْ خُلِقُوا مِنْ غَيْرِ شَيْءٍ: क्या वे बिना किसी सृष्टिकर्ता के पैदा हो गए?
  • أَمْ هُمُ الْخَالِقُونَ: या क्या वे स्वयं अपने आप को पैदा करने वाले हैं?

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों से प्रश्न कर रही है जो ईश्वर की एकता और उसकी क़ुदरत को नहीं मानते। अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या ये मुशरिक लोग बिना किसी सृष्टिकर्ता के पैदा हो गए? यानी क्या इन्हें किसी ने पैदा नहीं किया और ये अपने आप अस्तित्व में आ गए? यह बात बिल्कुल असंभव और निराधार है, क्योंकि हर मख़लूक़ (प्राणी) का एक ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता) होना ज़रूरी है।

और यदि वे यह कहें कि उन्होंने स्वयं अपने आप को पैदा किया है, तो यह भी पूर्णतः असंभव है, क्योंकि कोई भी चीज़ अपने आप को पैदा नहीं कर सकती। पैदा होने से पहले वह थी ही नहीं, तो वह अपने आप को कैसे पैदा कर सकती है?

इस प्रकार, दोनों ही बातें बिल्कुल ग़लत और असंभव हैं। जब ये दोनों रास्ते बंद हैं, तो यह बात साबित हो जाती है कि इन्हें और पूरी कायनात को अल्लाह तआला ने ही पैदा किया है। वही एकमात्र सृष्टिकर्ता है, और जब वही सृष्टिकर्ता है, तो इबादत (पूजा) और बंदगी के योग्य भी वही है।

तो फिर ये लोग अपने उस सृष्टिकर्ता की इबादत क्यों नहीं करते? क्यों वे उसे छोड़कर दूसरों की पूजा करते हैं, जिन्होंने न कुछ पैदा किया और न ही किसी चीज़ के मालिक हैं?

यह आयत हमें गहरी सोच की दावत देती है। अगर इंसान अपनी पैदाइश पर थोड़ा भी ग़ौर करे, तो वह समझ सकता है कि यह सब एक महान सृष्टिकर्ता की कारीगरी है। जिसने हमें पैदा किया, हमारा पालन-पोषण किया, हमें सुनने, देखने और समझने की शक्तियाँ दीं, क्या वह हमारी इबादत का हक़दार नहीं?

अल्लाह तआला हमें हिदायत दे कि हम उसकी नेमतों को पहचानें और सिर्फ उसी की इबादत करें। आमीन।



📜 आयत 33-37 — अत-तूर

33أَمْ يَقُولُونَ تَقَوَّلَهُ ۚ بَل لَّا يُؤْمِنُونَ
क्या ये लोग कहते हैं कि इसने क़ुरान ख़ुद गढ़ लिया है बात ये है कि ये लोग ईमान ही नहीं रखते
34فَلْيَأْتُوا بِحَدِيثٍ مِّثْلِهِ إِن كَانُوا صَادِقِينَ
तो अगर ये लोग सच्चे हैं तो ऐसा ही कलाम बना तो लाएँ
35أَمْ خُلِقُوا مِنْ غَيْرِ شَيْءٍ أَمْ هُمُ الْخَالِقُونَ
क्या ये लोग किसी के (पैदा किये) बग़ैर ही पैदा हो गए हैं या यही लोग (मख़लूक़ात के) पैदा करने वाले हैं
36أَمْ خَلَقُوا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۚ بَل لَّا يُوقِنُونَ
या इन्होने ही ने सारे आसमान व ज़मीन पैदा किए हैं (नहीं) बल्कि ये लोग यक़ीन ही नहीं रखते
37أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَبِّكَ أَمْ هُمُ الْمُصَيْطِرُونَ
क्या तुम्हारे परवरदिगार के ख़ज़ाने इन्हीं के पास हैं या यही लोग हाकिम हैं
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अनुवाद — अत-तूर 35

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Tuesday, August 18, 2026

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