अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَمْ خَلَقُوا: क्या उन्होंने पैदा किया?
- السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ: आसमानों और ज़मीन को
- بَل لَا يُوقِنُونَ: बल्कि वे यक़ीन नहीं रखते
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों को नसीहत देती है जो अल्लाह की क़ुदरत और उसकी वहदानियत पर ग़ौर नहीं करते। अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या इन मुशरिकों ने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया है? क्या इनके पास ऐसी ताक़त है कि ये इस विशाल ब्रह्मांड को रच सकें? हरगिज़ नहीं! ये तो सिर्फ़ अल्लाह की मख़लूक़ हैं, और ये लोग ख़ुद भी उसी की पैदा की हुई चीज़ हैं।
असल में ये लोग यक़ीन नहीं रखते कि अल्लाह ही इस कायनात का ख़ालिक़ है। अगर वे सच्चे दिल से यक़ीन कर लेते कि अल्लाह ही सब कुछ पैदा करने वाला है, तो वे उसकी इबादत करते, उसे अकेला मानते, और उसके रसूल पर ईमान लाते। लेकिन उनका दिल अंधा है, वे अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर नहीं करते, इसलिए वे सच्चाई को समझ नहीं पाते।
यह आयत हमें ग़ौर और फ़िक्र की दावत देती है। जब हम आसमान की बुलंदियों को देखते हैं, ज़मीन की फ़राश को देखते हैं, पहाड़ों की मज़बूती को देखते हैं, समंदरों की गहराई को देखते हैं, तो क्या हमारा दिल ये गवाही नहीं देता कि इन सबका एक ख़ालिक़ है? क्या ये सब अपने आप बन गए? हरगिज़ नहीं! ये सब उस अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है जो बेमिसाल है।
प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अल्लाह की बनाई हुई चीज़ों पर ग़ौर करें, उसकी निशानियों पर फ़िक्र करें, ताकि हमारा ईमान मज़बूत हो और हम सच्चे दिल से उसकी इबादत करें। यक़ीन रखें कि अल्लाह ही हमारा रब है, उसी ने हमें पैदा किया, उसी ने हमें रिज़्क़ दिया, और उसी की तरफ़ हमें लौटना है। जो शख्स इस यक़ीन पर ज़िंदगी गुज़ारता है, वही कामयाब है।
📜 आयत 34-38 — अत-तूर
अनुवाद — अत-तूर 36
सूरा अत-तूर आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या इन्होने ही ने सारे आसमान व ज़मीन पैदा किए…सूरा आयत 36/49 — अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तूर सुनें, अत-तूर अनुवाद, अत-तूर mp3, अत-तूर pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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