अत-तूर · 45/49
अनुवाद उच्चारण — अत-तूर
فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي فِيهِ يُصْعَقُونَ ۝٤٥
Fazarhum hatta yulaaqoo yawmahumul lazee feehi yus`aqoon
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) तुम इनको इनकी हालत पर छोड़ दो यहाँ तक कि वह जिसमें ये बेहोश हो जाएँगे

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَذَرْهُمْ: उन्हें छोड़ दो, उनसे किनारा कर लो।
  • يُلَاقُوا: वे सामना करें, मिलें।
  • يَوْمَهُمُ: उनका दिन (वह दिन जो उनके लिए नियत है)।
  • يُصْعَقُونَ: वे बेहोश कर दिए जाएंगे, हलाक कर दिए जाएंगे (सख्त अज़ाब में मारे जाएंगे)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! इन मुशरिकों को उनकी हालत पर छोड़ दो, उनकी जिद और इनकार पर उन्हें टालते रहो। उनसे बहस या ज़बरदस्ती की कोई ज़रूरत नहीं, क्योंकि उनका अंजाम तय हो चुका है। वह दिन दूर नहीं जब वे अपने उस दिन से दो-चार होंगे जिसमें वे सख्त अज़ाब से बेहोश कर दिए जाएंगे और हलाक कर दिए जाएंगे — यानी क़यामत का दिन। उस दिन पहली सूर (नरसिंगा) फूंकी जाएगी और सारी मख़लूक़ात हैरान और बेहोश होकर गिर पड़ेगी, फिर दूसरी सूर पर दोबारा उठाई जाएगी और हर शख्स को उसके किए का बदला मिलेगा। यह दिन उनके लिए बहुत भयानक और दर्दनाक होगा, और उस दिन उनका कोई साथी या मददगार नहीं होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हक़ की तबलीग़ के बाद अगर लोग ज़िद और इनकार पर अड़े रहें, तो हमें उनके साथ बेहद नर्मी और हिकमत से पेश आना चाहिए और उनका फैसला अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। अल्लाह ने अपने नबी को तसल्ली दी कि इनकी सज़ा का वक़्त ज़रूर आएगा, और हमें भी इस बात पर यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह का इंसाफ़ कभी नाकाम नहीं होता। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम अपने अमल को दुरुस्त करें, क़यामत के दिन के लिए तैयारी करें, और उस दिन से डरें जब कोई माल या औलाद काम नहीं आएगा, बल्कि सिर्फ़ ईमान और नेक अमल ही काम आएंगे। अल्लाह की रहमत और मग़फिरत उन्हीं के लिए है जो उसकी तरफ़ रुजू करें और उसके हुक्मों पर अमल करें।



📜 आयत 43-47 — अत-तूर

43أَمْ لَهُمْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ
या ख़ुदा के सिवा इनका कोई (दूसरा) माबूद है जिन चीज़ों को ये लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हैं वह उससे पाक और पाक़ीज़ा है
44وَإِن يَرَوْا كِسْفًا مِّنَ السَّمَاءِ سَاقِطًا يَقُولُوا سَحَابٌ مَّرْكُومٌ
और अगर ये लोग आसमान से कोई अज़ाब (अज़ाब का) टुकड़ा गिरते हुए देखें तो बोल उठेंगे ये तो दलदार बादल है
45فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي فِيهِ يُصْعَقُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम इनको इनकी हालत पर छोड़ दो यहाँ तक कि वह जिसमें ये बेहोश हो जाएँगे
46يَوْمَ لَا يُغْنِي عَنْهُمْ كَيْدُهُمْ شَيْئًا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
इनके सामने आ जाए जिस दिन न इनकी मक्कारी ही कुछ काम आएगी और न इनकी मदद ही की जाएगी
47وَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا عَذَابًا دُونَ ذَٰلِكَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और इसमें शक़ नहीं कि ज़ालिमों के लिए इसके अलावा और भी अज़ाब है मगर उनमें बहुतेरे नहीं जानते हैं
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीRevelation
45आयत

अनुवाद — अत-तूर 45

सूरा अत-तूर आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (ऐ रसूल) तुम इनको इनकी हालत पर छोड़ दो…

सूरा आयत 45/49 — अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तूर सुनें, अत-तूर अनुवाद, अत-तूर mp3, अत-तूर pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए