अन-नज्म · 55/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ ۝٥٥
Fabi ayyi aalaaa`i Rabbika tatamaaraa
📖 हिंदी अर्थ
तो तू (ऐ इन्सान आख़िर) अपने परवरदिगार की कौन सी नेअमत पर शक़ किया करेगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آلاء: अल्लाह की नेमतें और एहसान।
  • تَتَمَارَى: संदेह करना, शक करना, झगड़ा करना।

व्याख्या:

हे इंसान! तुम अपने रब की उन अनगिनत नेमतों और एहसानों में से किस नेमत पर संदेह करते हो? अल्लाह ने तुम्हें देखने के लिए आँखें दीं, सुनने के लिए कान दिए, बोलने के लिए ज़ुबान दी, और सोचने-समझने के लिए दिमाग़ दिया। उसने तुम्हें धरती पर रहने की सुविधाएँ दीं, आसमान से पानी बरसाया, अन्न और फल उगाए, और तुम्हारी हर ज़रूरत का इंतज़ाम किया। ये सारी नेमतें उसकी वहदानियत (एकता) और कुदरत (शक्ति) की साफ़ गवाह हैं।

फिर भी तुम इन सबको देखकर भी अल्लाह की क़ुदरत पर शक करते हो? क्या तुम्हें यक़ीन नहीं कि जिसने ये सब बनाया, वही तुम्हें दोबारा ज़िंदा करके हिसाब लेने पर भी क़ादिर है? ये कैसी नादानी है कि इंसान अपने रब की इतनी बड़ी नेमतों को भूलकर उसके वादे पर संदेह करता है।

दावत और नसीहत:

ऐ इंसान! अपने रब की नेमतों को गिनना चाहे तो गिन नहीं सकता। हर साँस, हर धड़कन, हर पल में उसका एहसान छिपा है। जब तुम्हें कोई मुश्किल आती है, तो तुम सिर्फ़ उसी से मदद माँगते हो, और जब आराम मिलता है, तो उसे भूल जाते हो। ये नेमतें तुम्हें इसलिए दी गई हैं कि तुम उसकी इबादत करो, उसका शुक्र अदा करो और उसके बताए रास्ते पर चलो। शक और संदेह तुम्हें सिर्फ़ गुमराही की तरफ़ ले जाएगा। अल्लाह की नेमतों पर ध्यान दो, उसकी कुदरत के निशानों पर ग़ौर करो, और यक़ीन करो कि वही सब कुछ करने पर क़ादिर है। यक़ीन ही वह चीज़ है जो तुम्हें सुकून देगी और अल्लाह की रहमत के क़रीब ले जाएगी।



📜 आयत 53-57 — सूरा अन-नज्म

53وَالْمُؤْتَفِكَةَ أَهْوَىٰ
और उसी ने (क़ौमे लूत की) उलटी हुई बस्तियों को दे पटका
54فَغَشَّاهَا مَا غَشَّىٰ
(फिर उन पर) जो छाया सो छाया
55فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ
तो तू (ऐ इन्सान आख़िर) अपने परवरदिगार की कौन सी नेअमत पर शक़ किया करेगा
56هَٰذَا نَذِيرٌ مِّنَ النُّذُرِ الْأُولَىٰ
ये (मोहम्मद भी अगले डराने वाले पैग़म्बरों में से एक डरने वाला) पैग़म्बर है
57أَزِفَتِ الْآزِفَةُ
कयामत क़रीब आ गयी
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
55आयत

अनुवाद — अन-नज्म 55

सूरा अन-नज्म आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तू (ऐ इन्सान आख़िर) अपने परवरदिगार की कौन सी…

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Thursday, October 1, 2026

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