अन-नज्म · 56/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
هَٰذَا نَذِيرٌ مِّنَ النُّذُرِ الْأُولَىٰ ۝٥٦
Haazaa nazeerum minan nuzuril oolaa
📖 हिंदी अर्थ
ये (मोहम्मद भी अगले डराने वाले पैग़म्बरों में से एक डरने वाला) पैग़म्बर है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नज़ीर (نذير): डराने वाला, सचेत करने वाला, वह व्यक्ति जो लोगों को अल्लाह के अज़ाब से आगाह करे।
  • नुज़ुर (النذر): 'नज़ीर' का बहुवचन, अर्थात सभी पैग़म्बर और रसूल।
  • उला (الأولى): पहले वाले, पूर्व के, प्राचीन।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें बताती है कि ये पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ कोई नई और अनोखी चीज़ लेकर नहीं आए, बल्कि वे उन्हीं पैग़म्बरों की श्रृंखला की एक कड़ी हैं जो अल्लाह ने शुरू से भेजे हैं। जिस प्रकार अल्लाह ने आदम, नूह, इब्राहीम, मूसा और ईसा (अलैहिमुस्सलाम) को उनकी क़ौमों के लिए डराने वाला और सचेत करने वाला बनाकर भेजा, ठीक उसी प्रकार मुहम्मद ﷺ को भी पूरी मानवजाति के लिए भेजा गया। वे कोई पहले नबी नहीं हैं, बल्कि उन्हीं पैग़म्बरों की परंपरा के अंतिम और सबसे उत्तम नबी हैं।

यह आयत उन लोगों के लिए एक स्पष्ट उत्तर है जो यह कहते थे कि यह व्यक्ति कोई नई बात लेकर आया है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह तो वही सत्य है जो पहले के पैग़म्बर लाए थे। उनका मूल संदेश एक ही था — अल्लाह की इबादत करो, उसके साथ किसी को साझी मत बनाओ, और आख़िरत के दिन पर ईमान रखो।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे दिलों में यह बात बिठाती है कि इस्लाम कोई नया या अजनबी धर्म नहीं है, बल्कि यह वही सच्चा दीन है जो अल्लाह ने शुरू से सभी पैग़म्बरों के माध्यम से भेजा। यह हमें बताती है कि मुहम्मद ﷺ पर ईमान लाना और उनकी शिक्षाओं पर चलना, वास्तव में उन सभी पैग़म्बरों पर ईमान लाना है जो पहले आए। इसलिए हमें उनकी सुन्नत को अपनाना चाहिए, क्योंकि वे सभी पैग़म्बरों की शिक्षाओं की पूर्णता और अंतिम रूप हैं।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह ने कभी भी किसी क़ौम को बिना चेतावनी के नहीं छोड़ा। हर युग में उसने अपने नबी भेजे। आज हमारे पास जो आख़िरी नबी ﷺ हैं, उनकी शिक्षाएँ हमारे लिए काफ़ी हैं। हमें उनके बताए रास्ते पर चलकर दुनिया और आख़िरत दोनों की सफलता हासिल करनी चाहिए। यह अल्लाह की सबसे बड़ी रहमत है कि उसने हमें ऐसा नबी दिया जो पूरी मानवजाति के लिए रहमत बनकर आया। हमें उनकी उस नेमत का शुक्र अदा करना चाहिए और उनके पैग़ाम को दूसरों तक पहुँचाना चाहिए, ताकि हर इंसान इस सत्य से वाकिफ़ हो सके।



📜 आयत 54-58 — सूरा अन-नज्म

54فَغَشَّاهَا مَا غَشَّىٰ
(फिर उन पर) जो छाया सो छाया
55فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ
तो तू (ऐ इन्सान आख़िर) अपने परवरदिगार की कौन सी नेअमत पर शक़ किया करेगा
56هَٰذَا نَذِيرٌ مِّنَ النُّذُرِ الْأُولَىٰ
ये (मोहम्मद भी अगले डराने वाले पैग़म्बरों में से एक डरने वाला) पैग़म्बर है
57أَزِفَتِ الْآزِفَةُ
कयामत क़रीब आ गयी
58لَيْسَ لَهَا مِن دُونِ اللَّهِ كَاشِفَةٌ
ख़ुदा के सिवा उसे कोई टाल नहीं सकता
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
56आयत

अनुवाद — अन-नज्म 56

सूरा अन-नज्म आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये (मोहम्मद भी अगले डराने वाले पैग़म्बरों में से एक…

सूरा आयत 56/62 — सूरा अन-नज्म النجم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नज्म सुनें, सूरा अन-नज्म अनुवाद, सूरा अन-नज्म mp3, सूरा अन-नज्म pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए