अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- हासिबन (حَاصِبًا): वह तेज़ हवा जो पत्थर और कंकड़ बरसाती है।
- आल-ए-लूत (آلَ لُوطٍ): हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) के घराने के लोग, यानी उनकी पत्नी के अलावा उनके अनुयायी और बेटियाँ।
- बिसहर (بِسَحَرٍ): रात के आखिरी हिस्से में, सुबह से पहले का समय।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने क़ौम-ए-लूत पर अपना अज़ाब भेजा, जो एक भयानक आपदा थी — उन पर पत्थर बरसाने वाली हवा भेजी गई, जिसने उन्हें तबाह कर दिया। यह अज़ाब उनके कुकर्मों और नाफ़रमानी का नतीजा था। लेकिन अल्लाह की रहमत ने हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके घराने को इस अज़ाब से महफ़ूज़ रखा। अल्लाह ने उन्हें रात के आखिरी हिस्से (सहर के वक़्त) में वहाँ से निकाल लिया, ताकि वे इस तबाही से बच जाएँ।
यह अल्लाह की उस नेमत और करम का ज़रिया था, जो उसने अपने नबी और उनके साथियों पर किया। अल्लाह ने उन्हें इसलिए बचाया क्योंकि वे ईमानवाले थे और अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुकाने वाले थे। यह उन लोगों के लिए एक इनाम है जो अल्लाह पर ईमान लाते हैं, उसके शुक्रगुज़ार होते हैं और अपने नबी की पैरवी करते हैं।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से बड़ी है। जो लोग अल्लाह की तरफ़ रुजू करते हैं और उसके रसूलों पर ईमान लाते हैं, अल्लाह उन्हें हर मुसीबत से निकाल लेता है। यहाँ तक कि जब पूरी क़ौम पर अज़ाब आता है, तो अल्लाह अपने नेक बंदों को उससे अलग कर लेता है। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है जो हमेशा से रही है — वह अपने वली (दोस्त) बंदों को हर हाल में महफ़ूज़ रखता है।
इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इबादत में मज़बूती से जुड़े रहें, उसके हुक्मों की पैरवी करें और उसकी रहमत के तलबगार रहें। अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है और जो उसकी तरफ़ एक क़दम बढ़ाता है, अल्लाह उसकी तरफ़ दौड़कर आता है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की हर मुसीबत से बचाता है और अल्लाह की जन्नत तक पहुँचाता है।
📜 आयत 32-36 — अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 34
सूरा अल-क़मर आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो हमने उन पर कंकर भरी हवा चलाई मगर लूत…सूरा आयत 34/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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