Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- نِعْمَةً – यह विशेष अनुग्रह और उपकार।
- مِنْ عِندِنَا – हमारी ओर से, विशेष रूप से हमारे ख़ज़ाने से।
- كَذَٰلِكَ – इसी प्रकार, ऐसे ही।
- نَجْزِي – हम बदला देते हैं, प्रतिफल प्रदान करते हैं।
- مَن شَكَرَ – जो कृतज्ञता व्यक्त करे, अर्थात जो अल्लाह के उपकारों को पहचाने और उसकी आज्ञा का पालन करे।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के विनाश के बाद अल्लाह की उस महान कृपा का वर्णन कर रही है, जो उसने अपने नबी और उनके परिवार पर की। जब अल्लाह का अज़ाब उस बुरी क़ौम पर आया, तो हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके ईमानवाले परिवार को उस विनाश से पहले ही निकाल लिया गया। यह नजात (मुक्ति) कोई साधारण बात नहीं थी, बल्कि यह अल्लाह की ओर से एक विशेष नेमत और अनुग्रह था, जो उसने अपनी रहमत से उन्हें प्रदान किया।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस प्रकार हमने लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों को इस भयानक अज़ाब से बचाकर उन पर यह बड़ी कृपा की, उसी प्रकार हम उन लोगों को भी बदला देते हैं जो हमारे उपकारों का शुक्र अदा करते हैं। शुक्र का अर्थ केवल ज़बान से "शुक्र" कहना नहीं है, बल्कि सच्चा शुक्र यह है कि इंसान अल्लाह के दिए हुए उपकारों को पहचाने, उनका सही उपयोग करे, अल्लाह की आज्ञाओं का पालन करे और उसकी नाफ़रमानी से बचे।
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी देती है कि अल्लाह उन लोगों को कभी निराश नहीं करता जो उसके प्रति कृतज्ञ रहते हैं। जो इंसान अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और अधिक नेमतें देता है और मुसीबतों से निकालने का रास्ता दिखाता है। यही वादा क़ुरआन की दूसरी जगह भी है कि "अगर तुम शुक्र करोगे तो मैं तुम्हें और अधिक दूँगा।"
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने जीवन की हर छोटी-बड़ी नेमत पर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए। जब हम अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनेंगे, तो अल्लाह हमें और नेमतें देगा, हमारी मुश्किलें आसान करेगा और हमें आख़िरत में भी कामयाबी प्रदान करेगा। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है जो कभी नहीं बदलती – जो शुक्र करता है, अल्लाह उसे अपनी रहमत से नवाज़ता है।
📜 आयत 33-37 — सूरा अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 35
सूरा अल-क़मर आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हम शुक्र करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते…सूरा आयत 35/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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