अल-क़मर · 36/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
وَلَقَدْ أَنذَرَهُم بَطْشَتَنَا فَتَمَارَوْا بِالنُّذُرِ ۝٣٦
Wa laqad anzarahum batshatanaa fatamaaraw binnuzur
📖 हिंदी अर्थ
और लूत ने उनको हमारी पकड़ से भी डराया था मगर उन लोगों ने डराते ही में शक़ किया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَطْشَتَنَا: हमारी पकड़, हमारा प्रकोप, अर्थात अल्लाह का कठोर अज़ाब और पकड़।
  • فَتَمَارَوْا: उन्होंने झगड़ा किया, संदेह किया, विवाद किया।
  • بِالنُّذُرِ: चेतावनियों के बारे में, डराने वाली बातों के बारे में।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हमें नबी लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम का वाक़या सुनाते हैं। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को अल्लाह के अज़ाब से डराया और उन्हें चेतावनी दी कि अगर तुम अपनी बुराइयों और गुनाहों से बाज़ न आए, तो अल्लाह की पकड़ तुम्हें अपनी लपेट में ले लेगी। उन्होंने नेकी और परहेज़गारी की राह दिखाई और अल्लाह के अज़ाब से आगाह किया।

लेकिन उस क़ौम का हाल यह था कि उन्होंने उस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। वे नबी की बात पर झगड़ने लगे, उस पर संदेह करने लगे और उसे झूठलाने लगे। उन्होंने सोचा कि यह सिर्फ़ एक डराना है, कोई ठोस बात नहीं। उनका यही रवैया उनकी हलाकत का सबब बना।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के नबियों और उनकी चेतावनियों को कभी हल्का न समझें। जब अल्लाह की तरफ से कोई चेतावनी आए, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए, उस पर विवाद नहीं करना चाहिए। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और जो लोग उसकी चेतावनियों को झुठलाते हैं, वे अक्सर उस अज़ाब का शिकार हो जाते हैं जिससे उन्हें डराया गया था।

यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के दीन की तरफ बुलाने वालों की बातों को ध्यान से सुनें, उन पर अमल करें, और कभी भी अल्लाह के अज़ाब से बेख़ौफ़ न हों। अल्लाह की रहमत के साथ-साथ उसका अज़ाब भी हक़ीक़त है, और ईमानवाला वही है जो दोनों पर यक़ीन रखे और अपने रब की इताअत में ज़िंदगी गुज़ारे।



📜 आयत 34-38 — सूरा अल-क़मर

34إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِبًا إِلَّا آلَ لُوطٍ ۖ نَّجَّيْنَاهُم بِسَحَرٍ
तो हमने उन पर कंकर भरी हवा चलाई मगर लूत के लड़के बाले को हमने उनको अपने फज़ल व करम से पिछले ही को बचा लिया
35نِّعْمَةً مِّنْ عِندِنَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي مَن شَكَرَ
हम शुक्र करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं
36وَلَقَدْ أَنذَرَهُم بَطْشَتَنَا فَتَمَارَوْا بِالنُّذُرِ
और लूत ने उनको हमारी पकड़ से भी डराया था मगर उन लोगों ने डराते ही में शक़ किया
37وَلَقَدْ رَاوَدُوهُ عَن ضَيْفِهِ فَطَمَسْنَا أَعْيُنَهُمْ فَذُوقُوا عَذَابِي وَنُذُرِ
और उनसे उनके मेहमान (फ़रिश्ते) के बारे में नाजायज़ मतलब की ख्वाहिश की तो हमने उनकी ऑंखें अन्धी कर दीं तो मेरे अज़ाब और डराने का मज़ा चखो
38وَلَقَدْ صَبَّحَهُم بُكْرَةً عَذَابٌ مُّسْتَقِرٌّ
और सुबह सवेरे ही उन पर अज़ाब आ गया जो किसी तरह टल ही नहीं सकता था
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
36आयत

अनुवाद — अल-क़मर 36

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Saturday, October 3, 2026

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