अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- إِنْ هِيَ إِلَّا – यह नहीं है, सिवाय इसके
- حَيَاتُنَا الدُّنْيَا – हमारा सांसारिक जीवन
- بِمَبْعُوثِينَ – दोबारा उठाए जाने वाले (जीवित किए जाने वाले)
तफसीर (व्याख्या):
ये आयत उन मुशरिकों (बहुदेववादियों) का कथन बयान कर रही है जो पुनरुत्थान (आख़िरत) को नकारते थे। वे कहते थे: "जीवन केवल यही दुनियावी ज़िंदगी है जो हम अभी जी रहे हैं। इसके बाद कोई जीवन नहीं, कोई हिसाब-किताब नहीं, और न ही हमें मरने के बाद दोबारा उठाया जाएगा।"
यह उनका अंतिम और निर्णायक रुख़ था—वे मृत्यु के बाद के जीवन को पूरी तरह अस्वीकार करते थे और केवल इसी दुनिया की भौतिक ज़िंदगी को ही सच मानते थे। उनका यह विश्वास उनके अहंकार, अज्ञानता और आख़िरत की चेतना से दूर होने का परिणाम था। वे सोचते थे कि मनुष्य केवल शरीर है, और शरीर के मिट्टी में मिल जाने के बाद कुछ भी शेष नहीं रहता।
यह कथन उनके दिलों की सख़्ती और सत्य से मुँह मोड़ने की स्थिति को दर्शाता है। वे अपनी इसी दुनियावी ज़िंदगी में मस्त थे और उन्हें यक़ीन था कि मृत्यु के बाद कोई ज़िम्मेदारी या हिसाब नहीं होगा। उन्होंने अपनी इसी धारणा को अपना धर्म और मार्ग बना लिया था, और इसी के सहारे वे नबी की दावत को झुठलाते थे।
फ़ायदे (सबक़):
- यह आयत हमें सिखाती है कि आख़िरत पर ईमान (विश्वास) एक मुसलमान की पहचान है। जो लोग पुनरुत्थान को नकारते हैं, वे अपने जीवन को बेहद सीमित कर लेते हैं और केवल दुनिया की ख्वाहिशों में डूब जाते हैं।
- यह हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया अंतिम जीवन नहीं है; यह तो एक परीक्षा का स्थान है। असली जीवन आख़िरत का है, जो कभी ख़त्म नहीं होगा।
- मृत्यु के बाद दोबारा उठाए जाने का विश्वास इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है—वह अच्छे कर्म करता है, बुराई से बचता है, और अपने रब के सामने पेश होने की तैयारी करता है।
- यह आयत हमें सब्र और यक़ीन सिखाती है कि भले ही कितने ही लोग आख़िरत को नकारें, सच्चाई वही है जो अल्लाह ने बताई है। हमें अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए।
- इससे हमें यह भी सबक मिलता है कि दुनिया की चमक-दमक और भौतिक सुखों में खोकर हमें उस सच्चाई को नहीं भूलना चाहिए जो हमारे रब ने हमें बताई है। आख़िरत की तैयारी ही असली कामयाबी है।
📜 आयत 27-31 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 29
सूरा अल-अनआम आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कुफ्फार ये भी तो कहते हैं कि हमारी इस…सूरा आयत 29/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








