अल-अनआम · 30/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
وَلَوْ تَرَىٰ إِذْ وُقِفُوا عَلَىٰ رَبِّهِمْ ۚ قَالَ أَلَيْسَ هَٰذَا بِالْحَقِّ ۚ قَالُوا بَلَىٰ وَرَبِّنَا ۚ قَالَ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ ۝٣٠
Wa law taraa iz wuqifoo `alaa Rabbihim; qaala alaisa haazaa bilhaqq; qaaloo balaa wa Rabbinaa; qaala fazooqul `azaaba bimaa kuntum takfuroon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) अगर तुम उनको उस वक्त देखते (तो ताज्जुब करते) जब वे लोग ख़ुदा के सामने खड़े किए जाएंगें और ख़ुदा उनसे पूछेगा कि क्या ये (क़यामत का दिन) अब भी सही नहीं है वह (जवाब में) कहेगें कि (दुनिया में) इससे इन्कार करते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وُقِفُوا: रोके गए, खड़े किए गए
  • عَلَىٰ رَبِّهِمْ: अपने रब के सामने (हिसाब के लिए)
  • بَلَىٰ: हाँ (पुष्टि के लिए)
  • فَذُوقُوا: तो चखो (अज़ाब का मज़ा)

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! यदि तुम उस समय को देखते जब क़ियामत के दिन इनकार करने वालों को उनके रब के सामने हिसाब के लिए खड़ा किया जाएगा, तो तुम उनकी बुरी हालत देखकर हैरान रह जाते। अल्लाह तआला उनसे पूछेगा: "क्या यह (जीवित होकर उठना और हिसाब देना) सत्य नहीं है?" वे उस समय अपनी सारी ज़िद और इनकार भूलकर कहेंगे: "हाँ, हमारे रब की क़सम! यह बिल्कुल सत्य है।" तब अल्लाह उनसे कहेगा: "तो अब उस अज़ाब का मज़ा चखो, जो तुमने दुनिया में झुठलाया था, और उसका कारण तुम्हारा कुफ़्र और इनकार था।"

यह आयत उस भयानक दृश्य को चित्रित करती है जब इनकार करने वाले अपने रब के सामने खड़े होंगे। दुनिया में वे जिस बात को झुठलाते थे, उस दिन वह सब सत्य प्रकट हो जाएगा। उनकी ज़बान से निकलेगा कि यह सब सत्य है, लेकिन यह इक़रार उन्हें अज़ाब से नहीं बचा सकेगा, क्योंकि यह स्वीकारोक्ति उस समय बेकार होगी जब उन्होंने दुनिया में इसे झुठलाया था।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. क़ियामत का दिन निश्चित है और हर व्यक्ति को अपने रब के सामने हिसाब के लिए खड़ा होना है। यह विश्वास हमें अपने आचरण को सुधारने की प्रेरणा देता है।
  2. इनकार करने वालों का इक़रार उस दिन उनके किसी काम नहीं आएगा, इसलिए हमें दुनिया में ही सत्य को स्वीकार कर लेना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए।
  3. अल्लाह की रहमत और न्याय दोनों पूर्ण हैं — जो लोग सत्य को झुठलाते हैं, उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला मिलेगा, और जो ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, उनके लिए जन्नत है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें दुनिया की ज़िंदगी में ही अपने रब के सामने खड़े होने की तैयारी करनी चाहिए, ताकि उस दिन हमारा सामना शर्मिंदगी से न हो।


📜 आयत 28-32 — सूरा अल-अनआम

28بَلْ بَدَا لَهُم مَّا كَانُوا يُخْفُونَ مِن قَبْلُ ۖ وَلَوْ رُدُّوا لَعَادُوا لِمَا نُهُوا عَنْهُ وَإِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
बल्कि जो (बेईमानी) पहले से छिपाते थे आज (उसकी हक़ीक़त) उन पर खुल गयी और (हम जानते हैं कि) अगर ये लोग (दुनिया में) लौटा भी दिए जाएं तो भी जिस चीज़ की मनाही की गयी है उसे करें और ज़रुर करें और इसमें शक़ नहीं कि ये लोग ज़रुर झूठे हैं
29وَقَالُوا إِنْ هِيَ إِلَّا حَيَاتُنَا الدُّنْيَا وَمَا نَحْنُ بِمَبْعُوثِينَ
और कुफ्फार ये भी तो कहते हैं कि हमारी इस दुनिया ज़िन्दगी के सिवा कुछ भी नहीं और (क़यामत वग़ैरह सब ढकोसला है) हम (मरने के बाद) भी उठाए ही न जायेंगे
30وَلَوْ تَرَىٰ إِذْ وُقِفُوا عَلَىٰ رَبِّهِمْ ۚ قَالَ أَلَيْسَ هَٰذَا بِالْحَقِّ ۚ قَالُوا بَلَىٰ وَرَبِّنَا ۚ قَالَ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
और (ऐ रसूल) अगर तुम उनको उस वक्त देखते (तो ताज्जुब करते) जब वे लोग ख़ुदा के सामने खड़े किए जाएंगें और ख़ुदा उनसे पूछेगा कि क्या ये (क़यामत का दिन) अब भी सही नहीं है वह (जवाब में) कहेगें कि (दुनिया में) इससे इन्कार करते थे
31قَدْ خَسِرَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِلِقَاءِ اللَّهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا جَاءَتْهُمُ السَّاعَةُ بَغْتَةً قَالُوا يَا حَسْرَتَنَا عَلَىٰ مَا فَرَّطْنَا فِيهَا وَهُمْ يَحْمِلُونَ أَوْزَارَهُمْ عَلَىٰ ظُهُورِهِمْ ۚ أَلَا سَاءَ مَا يَزِرُونَ
उसकी सज़ा में अज़ाब (के मजे) चखो बेशक जिन लोगों ने क़यामत के दिन ख़ुदा की हुज़ूरी को झुठलाया वह बड़े घाटे में हैं यहाँ तक कि जब उनके सर पर क़यामत नागहा (एक दम आ) पहँचेगी तो कहने लगेगें ऐ है अफसोस हम ने तो इसमें बड़ी कोताही की (ये कहते जाएगे) और अपने गुनाहों का पुश्तारा अपनी अपनी पीठ पर लादते जाएंगे देखो तो (ये) क्या बुरा बोझ है जिसको ये लादे (लादे फिर रहे) हैं
32وَمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا إِلَّا لَعِبٌ وَلَهْوٌ ۖ وَلَلدَّارُ الْآخِرَةُ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ يَتَّقُونَ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
और (ये) दुनियावी ज़िन्दगी तो खेल तमाशे के सिवा कुछ भी नहीं और ये तो ज़ाहिर है कि आख़िरत का घर (बेहिश्त) परहेज़गारो के लिए उसके बदर वहॉ (कई गुना) बेहतर है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
30आयत

अनुवाद — अल-अनआम 30

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Friday, October 2, 2026

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