अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَدَا لَهُمْ: उन पर प्रकट हो गया / उन्हें दिखाई दे गया
- يُخْفُونَ: वे छिपाते थे
- رُدُّوا: (दुनिया में) लौटा दिए जाएं
- لَعَادُوا: वे लौट जाएंगे
- نُهُوا عَنْهُ: जिससे उन्हें रोका गया था
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों की स्थिति बयान कर रही है जो क़ियामत के दिन जब आज़ाब देखेंगे तो कहेंगे: "काश! हमें दुनिया में वापस भेज दिया जाता तो हम ईमान लाते और अपने रब की आयतों को झुठलाने से बाज़ आते।" अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह बात उनकी सच्ची इच्छा नहीं है, बल्कि उन पर वह सब कुछ प्रकट हो गया जो वे पहले छिपाते थे — यानी उनका निफ़ाक़ (दोहरापन), उनका कुफ़्र और उनके बुरे आमाल, जिन्हें वे दुनिया में छिपाते थे और झूठा दावा करते थे कि हम मुशरिक नहीं थे। जब उनके हाथ-पैर और जिस्म के अंग उनके ख़िलाफ़ गवाही देंगे, तो उनका पर्दा फ़ाश हो जाएगा और सच्चाई सामने आ जाएगी।
अल्लाह तआला आगे फ़रमाता है: "और अगर उन्हें (फ़रज़न) दुनिया में वापस भी लौटा दिया जाए, तो वही करेंगे जिससे उन्हें रोका गया था" — यानी वे फिर से कुफ़्र और शिर्क की तरफ लौट जाएंगे, क्योंकि उनका ईमान का दावा सिर्फ़ ज़बानी था, दिल से नहीं। उनकी फ़ितरत और आदत पहले ही ख़राब हो चुकी थी। "और बेशक वे झूठे हैं" — उनके इस क़ौल में कि "हम दुनिया में लौट जाएं तो ईमान लाएंगे", वे बिल्कुल झूठे हैं, क्योंकि अगर उनमें सच्ची नीयत होती तो दुनिया में ही ईमान ले आते, जबकि उन्होंने दुनिया में हक़ को ठुकराया और रसूलों को झुठलाया।
दावती पहलू (शिक्षाप्रद संदेश):
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से रूबरू कराती है कि आज का वक़्त ही हमारे लिए सबसे कीमती है। क़ियामत के दिन पछताने और दुनिया में लौटने की आरज़ू करने से कुछ हासिल नहीं होगा। अल्लाह तआला ने हमें ज़िंदगी दी है, ताक़त दी है, और कुरआन व सुन्नत के ज़रिए राह दिखाई है — यह हमारे लिए सबसे बड़ी नेमत है। आज हम जिस हालत में हैं, अगर हम सच्चे दिल से तौबा कर लें और अल्लाह की तरफ पलट आएं, तो अल्लाह हमें माफ़ कर देगा और जन्नत की राह दिखाएगा। लेकिन याद रखें — ईमान सिर्फ़ ज़बान का दावा नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन और आमाल से सबूत है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और आख़िरत को भूल जाते हैं, वे उस दिन पछताएंगे, लेकिन पछताने का वक़्त निकल चुका होगा।
आओ, हम इस आयत से सबक़ लें कि अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारें, क्योंकि सच्ची कामयाबी उसी दिन मिलेगी जब हम अपने रब के सामने सर झुकाकर खड़े होंगे और हमारा नामा-ए-आमाल नेकियों से भरा होगा। अल्लाह हमें अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 26-30 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 28
सूरा अल-अनआम आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बल्कि जो (बेईमानी) पहले से छिपाते थे आज (उसकी हक़ीक़त)…सूरा आयत 28/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








