अल-अनआम · 57/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
قُلْ إِنِّي عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّي وَكَذَّبْتُم بِهِ ۚ مَا عِندِي مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِهِ ۚ إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ ۖ يَقُصُّ الْحَقَّ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الْفَاصِلِينَ ۝٥٧
Qul innee `alaa baiyinatim mir Rabbee wa kazzabtum bih; maa `indee maa tasta`jiloona bih; inil hukmu illaa lillaahi yaqussul haqqa wa Huwa khairul faasileen
📖 हिंदी अर्थ
तुम कह दो कि मै तो अपने परवरदिगार की तरफ से एक रौशन दलील पर हूं और तुमने उसे झुठला दिया (तो) तुम जिस की जल्दी करते हो (अज़ाब) वह कुछ मेरे पास (एख्तियार में) तो है नहीं हुकूमत तो बस ज़रुर ख़ुदा ही के लिए है वह तो (हक़) बयान करता है और वह तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَيِّنَةٍ: स्पष्ट प्रमाण, दलील और यक़ीन।
  • تَسْتَعْجِلُونَ بِهِ: जिसे तुम जल्दी माँग रहे हो (अज़ाब या चमत्कार)।
  • الْحُكْمُ: फ़ैसला करने का अधिकार।
  • يَقُصُّ الْحَقَّ: सच बयान करता है और सच्चा फ़ैसला सुनाता है।
  • خَيْرُ الْفَاصِلِينَ: सबसे अच्छा फ़ैसला करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि मैं अपने रब की ओर से स्पष्ट प्रमाण और पूर्ण यक़ीन पर हूँ। मैं किसी ख़्वाहिश या अंदाज़े पर नहीं चल रहा, बल्कि अल्लाह की वही (प्रकाशना) मेरे पास आई है जो सत्य और स्पष्ट है। तुम लोगों ने इस सत्य को झुठला दिया, जबकि यही तुम्हारे लिए सबसे बड़ी नेमत थी।

तुम जिस अज़ाब या चमत्कार को जल्दी माँग रहे हो, वह मेरे अधिकार में नहीं है। मैं तो केवल अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाने वाला हूँ। फ़ैसला करने का अधिकार केवल अल्लाह को है। वही तय करता है कि अज़ाब कब आएगा, किस पर आएगा और किस हाल में आएगा। वह सच्चा बयान करता है, सच्चा फ़ैसला सुनाता है, और वही सबसे अच्छा फ़ैसला करने वाला है। उसका फ़ैसला न्याय पर आधारित होता है, उसमें कोई कमी या ज़ुल्म नहीं होता। वह हक़ और बातिल के बीच पूरी तरह अलग कर देता है, और उसका फ़ैसला ही अंतिम और सर्वोत्तम है।


फ़ायदे (सीख):

  1. स्पष्ट प्रमाण पर चलना: एक मोमिन को चाहिए कि वह अंधी परंपराओं या ख़्वाहिशों पर नहीं, बल्कि अल्लाह की ओर से आए स्पष्ट प्रमाण और दलील पर चले। यही उसकी ताक़त और यक़ीन का आधार है।
  2. फ़ैसला अल्लाह के हाथ में: इंसान को अपनी सीमाओं का एहसास होना चाहिए। कई चीज़ें जो लोग जल्दी माँगते हैं, उनका अधिकार अल्लाह के पास है। हमें सब्र करना चाहिए और अल्लाह के फ़ैसले पर भरोसा रखना चाहिए।
  3. अल्लाह का फ़ैसला सबसे अच्छा: अल्लाह का हर फ़ैसला न्याय और हिकमत पर आधारित है। भले ही हमें उसकी मस्लहत (भलाई) समझ न आए, लेकिन उसका फ़ैसला हमेशा बेहतरीन होता है। यह विश्वास दिल को सुकून देता है।
  4. सच्चाई पर अटल रहना: नबी ﷺ ने झुठलाए जाने के बावजूद अपने यक़ीन और सच्चाई पर क़ायम रहकर हमें सिखाया कि सच्चाई पर डटे रहना चाहिए, चाहे लोग मानें या न मानें। अल्लाह का साथ सच्चाई पर चलने वालों के साथ होता है।


📜 आयत 55-59 — अल-अनआम

55وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلِتَسْتَبِينَ سَبِيلُ الْمُجْرِمِينَ
और हम (अपनी) आयतों को यूं तफ़सील से बयान करते हैं ताकि गुनाहगारों की राह (सब पर) खुल जाए और वह इस पर न चले
56قُلْ إِنِّي نُهِيتُ أَنْ أَعْبُدَ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۚ قُل لَّا أَتَّبِعُ أَهْوَاءَكُمْ ۙ قَدْ ضَلَلْتُ إِذًا وَمَا أَنَا مِنَ الْمُهْتَدِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझसे उसकी मनाही की गई है कि मैं ख़ुदा को छोड़कर उन माबूदों की इबादत करुं जिन को तुम पूजा करते हो (ये भी) कह दो कि मै तो तुम्हारी (नाफसानी) ख्वाहिश पर चलने का नहीं (वरना) फिर तो मै गुमराह हो जाऊॅगा और हिदायत याफता लोगों में न रहूँगा
57قُلْ إِنِّي عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّي وَكَذَّبْتُم بِهِ ۚ مَا عِندِي مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِهِ ۚ إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ ۖ يَقُصُّ الْحَقَّ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الْفَاصِلِينَ
तुम कह दो कि मै तो अपने परवरदिगार की तरफ से एक रौशन दलील पर हूं और तुमने उसे झुठला दिया (तो) तुम जिस की जल्दी करते हो (अज़ाब) वह कुछ मेरे पास (एख्तियार में) तो है नहीं हुकूमत तो बस ज़रुर ख़ुदा ही के लिए है वह तो (हक़) बयान करता है और वह तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है
58قُل لَّوْ أَنَّ عِندِي مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِهِ لَقُضِيَ الْأَمْرُ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۗ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِالظَّالِمِينَ
(उन लोगों से) कह दो कि जिस (अज़ाब) की तुम जल्दी करते हो अगर वह मेरे पास (एख्तियार में) होता तो मेरे और तुम्हारे दरमियान का फैसला कब का चुक गया होता और ख़ुदा तो ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है
59۞ وَعِندَهُ مَفَاتِحُ الْغَيْبِ لَا يَعْلَمُهَا إِلَّا هُوَ ۚ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ ۚ وَمَا تَسْقُطُ مِن وَرَقَةٍ إِلَّا يَعْلَمُهَا وَلَا حَبَّةٍ فِي ظُلُمَاتِ الْأَرْضِ وَلَا رَطْبٍ وَلَا يَابِسٍ إِلَّا فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
और उसके पास ग़ैब की कुन्जियॉ हैं जिनको उसके सिवा कोई नही जानता और जो कुछ ख़ुशकी और तरी में है उसको (भी) वही जानता है और कोई पत्ता भी नहीं खटकता मगर वह उसे ज़रुर जानता है और ज़मीन की तारिक़ियों में कोई दाना और न कोई ख़ुश्क चीज़ है मगर वह नूरानी किताब (लौहे महफूज़) में मौजूद है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
57आयत

अनुवाद — अल-अनआम 57

सूरा अल-अनआम आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम कह दो कि मै तो अपने परवरदिगार की तरफ…

सूरा आयत 57/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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