अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا تَسْتَعْجِلُونَ بِهِ: जिस (अज़ाब) को तुम जल्दी माँग रहे हो।
- لَقُضِيَ الْأَمْرُ: तो मामला (फ़ैसला) कर दिया जाता।
- أَعْلَمُ بِالظَّالِمِينَ: ज़ालिमों (अत्याचारियों) को सबसे अच्छी तरह जानने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि अगर मेरे पास वह अज़ाब होता जिसे तुम जल्दी माँग रहे हो (यानी अल्लाह की तरफ से मुझे उसे नाज़िल करने का अख़्तियार होता), तो मैं उसे तुम पर तुरंत नाज़िल कर देता और मेरे और तुम्हारे बीच का मामला ख़त्म हो जाता — यानी तुम पर अज़ाब आकर फ़ैसला हो जाता। लेकिन यह बात मेरे इख़्तियार में नहीं है, बल्कि यह अल्लाह ही के हाथ में है। वही जानता है कि ज़ालिमों (मुशरिकों) को कब तक मोहलत देनी है और कब उन्हें पकड़ना है। वह अपनी हिकमत के मुताबिक़ अज़ाब को मुल्तवी रखता है, क्योंकि वह ज़ालिमों के हाल को पूरी तरह जानता है और उनकी सज़ा का सही वक़्त भी उसे ही मालूम है।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह के नबी भी ग़ैब की बातों और अज़ाब के नाज़िल होने के मामले में पूरी तरह अल्लाह के हवाले हैं — यह तौहीद की तालीम है कि सारा इख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह को है।
- अज़ाब में देरी अल्लाह की रहमत और हिकमत की वजह से होती है, ताकि लोगों को तौबा करने का मौक़ा मिले — यह अल्लाह की बंदों पर मेहरबानी है।
- ज़ालिमों को मोहलत मिलना उनके लिए बेहतरी नहीं है, बल्कि अल्लाह उन्हें उनकी सरकशी की वजह से पकड़ने से पहले मौक़ा देता है — इससे मुसलमानों को सब्र और भरोसे की तालीम मिलती है कि अल्लाह का फ़ैसला हर हाल में अदल पर होगा।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि दुश्मनों की धमकियों और उनकी जल्दबाज़ी से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए — वही सबसे बेहतर जानने वाला और फ़ैसला करने वाला है।
📜 आयत 56-60 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 58
सूरा अल-अनआम आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उन लोगों से) कह दो कि जिस (अज़ाब) की तुम…सूरा आयत 58/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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