अल-हाक़्का · 20/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
إِنِّي ظَنَنتُ أَنِّي مُلَاقٍ حِسَابِيَهْ ۝٢٠
Innee zannantu annee mulaaqin hisaabiyah
📖 हिंदी अर्थ
तो मैं तो जानता था कि मुझे मेरा हिसाब (किताब) ज़रूर मिलेगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظَنَنتُ: मुझे यक़ीन था, मैंने निश्चित जान लिया था।
  • مُلَاقٍ: मिलने वाला, सामना करने वाला।
  • حِسَابِيَهْ: मेरा हिसाब (लेखा-जोखा)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस मोमिन (ईमानवाले) बंदे की ख़ुशी और इत्मिनान का दृश्य पेश करती है जिसे उसका आमालनामा (कर्मों की किताब) दाहिने हाथ में दिया जाता है। वह ख़ुशी से चिल्लाकर कहता है: "लो, मेरी किताब पढ़ो!" और फिर उस ख़ुशी की वजह बताता है: "मुझे दुनिया में ही यक़ीन था कि मुझे अपने रब के सामने हाज़िर होना है और मेरा हिसाब होना है।"

यानी उसने दुनिया की ज़िंदगी में इस हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ नहीं किया कि एक दिन उसे अपने कर्मों का लेखा-जोखा देना है। उसने इस यक़ीन को अपने ईमान और नेक अमल का ज़रिया बनाया, अपनी ज़िंदगी को इसी हिसाब के मुताबिक ढाला, और आख़िरत की तैयारी की। यही वजह है कि आज वह उस अंजाम तक पहुँचा है जहाँ उसे हर तरह की ख़ुशी और आराम मिल रहा है — ऊँचे दर्जों वाली जन्नत, जिसके फल उसके बेहद करीब हैं, और जहाँ उसे कहा जा रहा है: "खाओ और पियो मज़े से, हर तकलीफ़ से सलामत रहते हुए, उन नेक अमलों के बदले जो तुमने गुज़रे हुए दिनों में आगे भेजे थे।"

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि आख़िरत पर यक़ीन सिर्फ़ ज़ुबानी बात नहीं, बल्कि एक ज़िंदा हक़ीक़त है जो इंसान के अमल को बदल देती है। जिसे यक़ीन हो कि उसका हर अमल दर्ज किया जा रहा है और एक दिन उसे उसका हिसाब देना है, वह कभी गुनाह की तरफ नहीं बढ़ता, और नेकी में पीछे नहीं रहता। यही वो यक़ीन है जो मुसलमान को दुनिया में सब्र और आख़िरत में कामयाबी देता है। आइए, हम भी अपनी ज़िंदगी में इस यक़ीन को जगाएँ कि हमारा रब हमें देख रहा है, हमारे अमल लिखे जा रहे हैं, और एक दिन हमें अपने हिसाब के साथ उसके सामने पेश होना है। यही यक़ीन हमें उस ख़ुशी तक पहुँचाएगा जो आज उस मोमिन को मिल रही है।

🎧 सुनें

📜 आयत 18-22 — अल-हाक़्का

18يَوْمَئِذٍ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنكُمْ خَافِيَةٌ
उस दिन तुम सब के सब (ख़ुदा के सामने) पेश किए जाओगे और तुम्हारी कोई पोशीदा बात छुपी न रहेगी
19فَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِيَمِينِهِ فَيَقُولُ هَاؤُمُ اقْرَءُوا كِتَابِيَهْ
तो जिसको (उसका नामए आमाल) दाहिने हाथ में दिया जाएगा तो वह (लोगो से) कहेगा लीजिए मेरा नामए आमाल पढ़िए
20إِنِّي ظَنَنتُ أَنِّي مُلَاقٍ حِسَابِيَهْ
तो मैं तो जानता था कि मुझे मेरा हिसाब (किताब) ज़रूर मिलेगा
21فَهُوَ فِي عِيشَةٍ رَّاضِيَةٍ
फिर वह दिल पसन्द ऐश में होगा
22فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٍ
बड़े आलीशान बाग़ में
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
20आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 20

सूरा अल-हाक़्का आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो मैं तो जानता था कि मुझे मेरा हिसाब (किताब)…

सूरा आयत 20/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए