अल-हाक़्का · 24/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا أَسْلَفْتُمْ فِي الْأَيَّامِ الْخَالِيَةِ ۝٢٤
Kuloo washraboo haneee`am bimaaa aslaftum fil ayyaamil khaliyah
📖 हिंदी अर्थ
जो कारगुज़ारियाँ तुम गुज़िशता अय्याम में करके आगे भेज चुके हो उसके सिले में मज़े से खाओ पियो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كُلُوا وَاشْرَبُوا – खाओ और पियो।
  • هَنِيئًا – ऐसा खाना-पीना जिसमें कोई तकलीफ़, दर्द या परेशानी न हो, बल्कि पूरी आराम और खुशी के साथ।
  • بِمَا أَسْلَفْتُمْ – उसके बदले में जो तुमने पहले भेजा (यानी अच्छे कर्म)।
  • فِي الْأَيَّامِ الْخَالِيَةِ – गुज़रे हुए दिनों में (दुनिया की ज़िंदगी में)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को जन्नत में दाखिल करेंगे और उनके आमाल का नामा उनके दाहिने हाथ में देंगे, तो वे खुशी से चीख़ उठेंगे और कहेंगे: "लो, मेरा नामा-ए-आमाल पढ़ो! मुझे यक़ीन था कि मुझे अपने अमल का हिसाब देना है, इसलिए मैंने दुनिया में ईमान और नेक कामों का ज़ख़ीरा जमा कर लिया था।"

फिर अल्लाह तआला उन्हें सम्मान और मुहब्बत के साथ नेकियों का बदला देते हुए फ़रमाएगा: "खाओ और पियो, मज़े से और आराम से!" यानी ऐसा खाना-पीना जो हर तरह की बीमारी, दर्द, अफ़रातफ़री और मुश्किल से पाक हो। वहाँ न कोई पेट की तकलीफ़ होगी, न थकान, न कोई बुरा अंजाम। यह सब उन अच्छे कर्मों का फल है जो तुमने दुनिया के गुज़रे हुए दिनों में किए — नमाज़, रोज़ा, ज़कात, सदक़ा, अच्छा बर्ताव, अल्लाह का ज़िक्र और उसकी राह में मेहनत।

यह वो लम्हा है जब इंसान को अपनी मेहनत का फल मिलता है — बेशक दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी है, लेकिन उसके अच्छे कर्मों की कमाई हमेशा के लिए है। अल्लाह तआला ने अपने रहमत भरे अंदाज़ में नेक लोगों को यह खुशखबरी दी है कि जन्नत की नेअमतें उनके इंतज़ार में हैं, और यह सब उनके अपने हाथों भेजे हुए अच्छे कामों का नतीजा है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की ज़िंदगी एक खेत है — जो आज बोएगा, वही कल काटेगा। अगर हम चाहते हैं कि क़यामत के दिन हमें यह मीठी आवाज़ सुनाई दे — "खाओ और पियो, मज़े से!" — तो आज हमें अपने दिनों को नेकियों से भरना होगा। हर नमाज़, हर रोज़ा, हर अच्छा काम, हर माफ़ी माँगना — यह सब हमारे लिए जन्नत का सामान है।

अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर बहुत मेहरबानी की है कि उसने हमें मौका दिया है — आज हम जी रहे हैं, साँस ले रहे हैं, तो हम अपने आने वाले कल को खूबसूरत बना सकते हैं। यह आयत हमें उम्मीद देती है कि अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है — बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करने की और अपने दिनों को उसकी इबादत और नेक कामों से रोशन करने की।

🎧 सुनें

📜 आयत 22-26 — अल-हाक़्का

22فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٍ
बड़े आलीशान बाग़ में
23قُطُوفُهَا دَانِيَةٌ
जिनके फल बहुत झुके हुए क़रीब होंगे
24كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا أَسْلَفْتُمْ فِي الْأَيَّامِ الْخَالِيَةِ
जो कारगुज़ारियाँ तुम गुज़िशता अय्याम में करके आगे भेज चुके हो उसके सिले में मज़े से खाओ पियो
25وَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِشِمَالِهِ فَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي لَمْ أُوتَ كِتَابِيَهْ
और जिसका नामए आमाल उनके बाएँ हाथ में दिया जाएगा तो वह कहेगा ऐ काश मुझे मेरा नामए अमल न दिया जाता
26وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ
और मुझे न मालूल होता कि मेरा हिसाब क्या है
अल-हाक़्काकुरान सूची
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अनुवाद — अल-हाक़्का 24

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Tuesday, August 18, 2026

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