अल-हाक़्का · 25/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
وَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِشِمَالِهِ فَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي لَمْ أُوتَ كِتَابِيَهْ ۝٢٥
Wa ammaa man ootiya kitaabahoo bishimaalihee fa yaqoolu yaalaitanee lam oota kitaaabiyah
📖 हिंदी अर्थ
और जिसका नामए आमाल उनके बाएँ हाथ में दिया जाएगा तो वह कहेगा ऐ काश मुझे मेरा नामए अमल न दिया जाता
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُوتِيَ كِتَابَهُ: जिसे उसका (आमाल का) लेखा-जोखा दिया गया।
  • بِشِمَالِهِ: उसके बाएँ हाथ में।
  • يَا لَيْتَنِي: काश! मैं (ऐसा न होता)।
  • لَمْ أُوتَ كِتَابِيَهْ: मुझे मेरी किताब (लेखा-जोखा) न दी गई होती।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस व्यक्ति को उसका आमाल का लेखा-जोखा उसके बाएँ हाथ में दिया जाएगा—और यह उसकी बदबख़्ती और रुसवाई की निशानी होगी—तो वह उस वक़्त अत्यधिक पछतावे और हसरत के साथ चीख़ उठेगा: "काश! मुझे मेरी किताब ही न दी गई होती!" यह उसकी उस हालत का इज़हार होगा जब वह अपने बुरे आमाल को देखेगा और समझ जाएगा कि उसका अंजाम क्या होने वाला है। उसके दिल में सिर्फ़ यही तमन्ना होगी कि काश वह दुनिया में ही मर गया होता और दोबारा ज़िंदा न किया जाता, ताकि उसे यह रुसवाई और अज़ाब न देखना पड़ता। उसका माल, जो उसने दुनिया में जमा किया था, उसके किसी काम न आएगा, और उसकी सारी दलीलें और बहाने बेकार हो जाएँगे, क्योंकि उसके पास कोई हुज्जत न होगी जिससे वह अपने आप को बचा सके।

यह मंज़र उस व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी रुसवाई और शर्मिंदगी का लम्हा होगा, जब वह अपने किए पर पछताएगा, लेकिन पछतावा उस वक़्त किसी काम न आएगा। यह उन लोगों के लिए एक सख़्त तनबीह है जो आज दुनिया में आमाल की परवाह नहीं करते और आख़िरत को भूल जाते हैं।


दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि आज का हर अमल कल हमारे सामने पेश किया जाएगा। जो व्यक्ति आज नेकियों की राह पर चलता है और अल्लाह की इताअत करता है, उसका लेखा उसके दाएँ हाथ में दिया जाएगा और वह खुशी से अपनी किताब पढ़ेगा। लेकिन जो ग़ाफ़िल रहा और गुनाहों में डूबा रहा, उसका अंजाम यही होगा कि वह हसरत और पछतावे के सिवा कुछ हासिल न करेगा। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में मौका दिया है कि हम अपने आमाल सुधार लें, तौबा कर लें, और उस रास्ते पर चलें जो हमें जन्नत तक पहुँचाए। यही सबसे बड़ी कामयाबी है—कि हम उन लोगों में से हों जिनका लेखा दाएँ हाथ में दिया जाए और वे जन्नत की नेअमतों से हमेशा के लिए नवाज़े जाएँ। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि उस दिन हमें शर्मिंदगी और पछतावे का सामना न करना पड़े।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अल-हाक़्का

23قُطُوفُهَا دَانِيَةٌ
जिनके फल बहुत झुके हुए क़रीब होंगे
24كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا أَسْلَفْتُمْ فِي الْأَيَّامِ الْخَالِيَةِ
जो कारगुज़ारियाँ तुम गुज़िशता अय्याम में करके आगे भेज चुके हो उसके सिले में मज़े से खाओ पियो
25وَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِشِمَالِهِ فَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي لَمْ أُوتَ كِتَابِيَهْ
और जिसका नामए आमाल उनके बाएँ हाथ में दिया जाएगा तो वह कहेगा ऐ काश मुझे मेरा नामए अमल न दिया जाता
26وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ
और मुझे न मालूल होता कि मेरा हिसाब क्या है
27يَا لَيْتَهَا كَانَتِ الْقَاضِيَةَ
ऐ काश मौत ने (हमेशा के लिए मेरा) काम तमाम कर दिया होता
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
25आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 25

सूरा अल-हाक़्का आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिसका नामए आमाल उनके बाएँ हाथ में दिया जाएगा…

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Tuesday, August 18, 2026

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