अल-हाक़्का · 29/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
هَلَكَ عَنِّي سُلْطَانِيَهْ ۝٢٩
Halaka `annee sultaaniyah
📖 हिंदी अर्थ
(हाए) मेरी सल्तनत ख़ाक में मिल गयी (फिर हुक्म होगा)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • هَلَكَ (हलक): नष्ट हो गया, खत्म हो गया, गुम हो गया।
  • سُلْطَانِيَهْ (सुल्तानियह): मेरी ताकत, मेरा अधिकार, मेरी दलील (प्रमाण), मेरा वर्चस्व और जो कुछ मैंने दुनिया में इकट्ठा किया था।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन का मंज़र पेश करती है जब बदकार लोगों का अंजाम सामने आएगा। जिस व्यक्ति का आमालनामा (कर्मों की किताब) उसके बाएँ हाथ में दिया जाएगा, वह पछतावे और हसरत के मारे चीख़ उठेगा। वह कहेगा: "काश! मुझे मेरी किताब न दी जाती और मैं अपने अंजाम से बेख़बर रहता। काश! वह मौत जो दुनिया में आई थी, वही आख़िरी फ़ैसला होती और मुझे दोबारा ज़िंदा न किया जाता।" फिर वह अपने उन साधनों को याद करता है जिन पर उसने दुनिया में भरोसा किया था — उसका माल, उसकी दौलत, उसकी इज़्ज़त, उसके रिश्ते और उसकी ताकत — और कहता है: "मेरा माल मेरे किसी काम न आया, मेरी सारी हुकूमत और मेरा सारा अधिकार मुझसे खत्म हो गया, मेरी वह दलील भी गुम हो गई जिसके सहारे मैं दुनिया में जीता था और जिसके बल पर मैं अपने मुक़ाबिलों को दबाता था।"

यानी आज उसके पास न कोई ताकत है, न कोई मददगार, न कोई दलील जो उसे अल्लाह के अज़ाब से बचा सके। उसका पूरा ज़ोर और दबदबा, जो दुनिया में उसे बड़ा बनाता था, आज उससे जुदा हो चुका है। वह बिल्कुल अकेला, बेबस और बेसहारा खड़ा है, और उसकी सारी उम्मीदें मिट्टी में मिल चुकी हैं।

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस चीज़ पर भरोसा कर रहे हैं। क्या हमारा भरोसा सिर्फ़ दौलत, ओहदे और दुनियावी ताकत पर है? याद रखिए! ये सब चीज़ें एक दिन खत्म हो जाने वाली हैं। जिस दिन हम अल्लाह के सामने खड़े होंगे, उस दिन न हमारा पैसा काम आएगा, न हमारी औलाद, न हमारी इज़्ज़त। सिर्फ़ हमारे अच्छे आमाल और अल्लाह पर हमारा भरोसा ही हमें बचा सकते हैं।

तो आज ही से अपनी ज़िंदगी को संवार लीजिए — नमाज़ की पाबंदी कीजिए, अल्लाह की राह में खर्च कीजिए, लोगों के साथ भलाई कीजिए, और अपने रब की रहमत के साये में आने की कोशिश कीजिए। क्योंकि जिस दिन वह ताकत और वह दलील गुम हो जाएगी, उस दिन सिर्फ़ अल्लाह का ज़िक्र और नेक आमाल ही हमारे साथ रहेंगे। अल्लाह हमें उस दिन की रुसवाई से बचाए, आमीन।



📜 आयत 27-31 — सूरा अल-हाक़्का

27يَا لَيْتَهَا كَانَتِ الْقَاضِيَةَ
ऐ काश मौत ने (हमेशा के लिए मेरा) काम तमाम कर दिया होता
28مَا أَغْنَىٰ عَنِّي مَالِيَهْ ۜ
(अफ़सोस) मेरा माल मेरे कुछ भी काम न आया
29هَلَكَ عَنِّي سُلْطَانِيَهْ
(हाए) मेरी सल्तनत ख़ाक में मिल गयी (फिर हुक्म होगा)
30خُذُوهُ فَغُلُّوهُ
इसे गिरफ्तार करके तौक़ पहना दो
31ثُمَّ الْجَحِيمَ صَلُّوهُ
फिर इसे जहन्नुम में झोंक दो,
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
29आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 29

सूरा अल-हाक़्का आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (हाए) मेरी सल्तनत ख़ाक में मिल गयी (फिर हुक्म होगा)

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Wednesday, September 30, 2026

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