अल-हाक़्का · 38/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
فَلَا أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ ۝٣٨
Falaaa uqsimu bimaa tubsiroon
📖 हिंदी अर्थ
जो तुम्हें दिखाई देती हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَلَا أُقْسِمُ: "नहीं, मैं शपथ खाता हूँ" — यहाँ "ला" का प्रयोग विस्मयादिबोधक (ताकीद) के लिए है, अर्थात यह निषेध नहीं बल्कि शपथ की पुष्टि के लिए है।
  • بِمَا تُبْصِرُونَ: उन चीज़ों की शपथ जिन्हें तुम देखते हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी अज़ीमुश्शान शपथ के साथ कुरआन की अज़मत और सच्चाई को साबित कर रहे हैं। वह फ़रमाते हैं: "नहीं, मैं शपथ खाता हूँ उन सब चीज़ों की जिन्हें तुम अपनी आँखों से देखते हो — यानी यह पूरा दृश्य जगत, यह आसमान, यह ज़मीन, ये पहाड़, ये समुद्र, ये नक्षत्र, ये पेड़-पौधे, ये जानवर, और तुम्हारा अपना वजूद — और उन चीज़ों की भी शपथ जो तुम्हारी नज़रों से छिपी हैं, जैसे फ़रिश्ते, जिन्न, आख़िरत के मंज़र, जन्नत और जहन्नम।"

यह शपथ इसलिए है कि तुम लोग यह समझ लो कि यह कुरआन कोई इंसानी कलाम नहीं, कोई शायर का काव्य नहीं, और न ही किसी काहिन (ज्योतिषी) की कहानी है। यह तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का कलाम है, जिसे उसने अपने महान रसूल मुहम्मद ﷺ पर उतारा है। जिस तरह तुम अपनी आँखों से इन दृश्यमान चीज़ों को देखकर उनके वजूद पर यक़ीन करते हो, उसी तरह यक़ीन करो कि यह कुरआन अल्लाह की तरफ़ से है।

अफ़सोस की बात है कि तुम लोग बहुत कम ईमान लाते हो! जबकि सच्चाई तुम्हारे सामने रोशन दिन की तरह वाज़ेह है। अगर तुम ज़रा सी भी दिमाग़ से सोचो, अपनी आँखों से देखे गए इस कायनात पर ग़ौर करो — यह इतनी बारीकी से बनी हुई चीज़ें, यह निज़ाम, यह हिकमत — तो तुम्हें यक़ीन हो जाएगा कि इस कायनात का ख़ालिक़ ही इस कुरआन का नाज़िल करने वाला है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम अपने चारों ओर देखते हैं — सूरज की रोशनी, चाँद की चांदनी, हवा का बहना, बारिश का बरसना — तो हर चीज़ हमें अल्लाह की क़ुदरत की याद दिलाती है। और यही कुरआन, जो हमारे पास है, वह उसी क़ुदरत वाले अल्लाह का कलाम है। जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी कायनात पैदा की, उसके लिए क्या मुश्किल है कि वह अपने बंदों को राह दिखाने के लिए किताब भेजे?

इसलिए ऐ इंसान! जब तू अपनी आँखों से इन नेमतों को देखता है, तो उस अल्लाह का शुक्र अदा कर जिसने तुझे ये नेमतें दीं, और उसकी इस आख़िरी किताब पर ईमान ला, क्योंकि यही तेरी कामयाबी का ज़रिया है। यह कुरआन तेरे लिए रहनुमा है, शिफ़ा है, और रहमत है। जो इसे पकड़ लेगा, वह कभी गुमराह नहीं होगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 36-40 — अल-हाक़्का

36وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنْ غِسْلِينٍ
जिसको गुनेहगारों के सिवा कोई नहीं खाएगा
37لَّا يَأْكُلُهُ إِلَّا الْخَاطِئُونَ
तो मुझे उन चीज़ों की क़सम है
38فَلَا أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ
जो तुम्हें दिखाई देती हैं
39وَمَا لَا تُبْصِرُونَ
और जो तुम्हें नहीं सुझाई देती कि बेशक ये (क़ुरान)
40إِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ
एक मोअज़िज़ फरिश्ते का लाया हुआ पैग़ाम है
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अनुवाद — अल-हाक़्का 38

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Tuesday, August 18, 2026

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