अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَقِيقٌ: सच्चा, योग्य, जिस पर सत्य बोलना लाज़िमी हो।
- بَيِّنَةٍ: स्पष्ट प्रमाण, चमत्कार, वह निशानी जो सत्य को प्रकट कर दे।
- فَأَرْسِلْ: छोड़ दो, आज़ाद कर दो, रिहा कर दो।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के सामने अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) का एलान करते हुए कहा कि मैं अपने ऊपर यह लाज़िमी और ज़रूरी समझता हूँ कि अल्लाह के बारे में सच के अलावा कुछ न कहूँ। मैं उस पाक ज़ात की तरफ़ से भेजा गया हूँ, और मेरे लिए यह कभी जायज़ नहीं कि उस पर कोई झूठ बोलूँ या उसके नाम पर कोई झूठी बात थोपूँ। मेरी ज़ुबान सिर्फ़ सच बोलती है, क्योंकि मैं उसका नबी हूँ और उसकी तरफ़ से मुझे यही हुक्म मिला है।
फिर हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को बताया कि मैं तुम्हारे पास अपने रब की तरफ़ से एक स्पष्ट प्रमाण और चमत्कार लेकर आया हूँ — वह लाठी और सफ़ेद हाथ (यद-ए-बैज़ा) जो अल्लाह के हुक्म से मेरे सच्चे होने की गवाही देते हैं। यह कोई जादू या धोखा नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से एक रौशन दलील है जो मेरी रिसालत की सच्चाई को साबित करती है।
इसके बाद हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन से एक साफ़ और मुन्सिफ़ाना माँग की — कि बनी इसराईल को मेरे साथ जाने की इजाज़त दे, उन्हें अपनी ग़ुलामी और ज़ुल्म से आज़ाद कर दे। क्योंकि फ़िरऔन ने हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के ज़माने के बाद बनी इसराईल को अपना ग़ुलाम बना लिया था, उन्हें सख़्त मुश्किलों में डाल रखा था, और उनकी इज़्ज़त और आज़ादी छीन ली थी। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा कि उन्हें रिहा कर दे ताकि वे अपने रब की इबादत कर सकें और अपनी मुक़द्दस ज़मीन (फ़िलिस्तीन) की तरफ़ लौट सकें।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच बोलना और सच पर क़ायम रहना नबियों की सुन्नत है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने जिस बहादुरी और साफ़गोई से फ़िरऔन जैसे ज़ालिम के सामने हक़ बयान किया, वह हमारे लिए नमूना है। हमें भी चाहिए कि हर हाल में सच बोलें, अल्लाह के दीन की दावत दें, और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ। अल्लाह अपने नबियों की मदद करता है, और जो लोग उसके दीन के लिए काम करते हैं, उन्हें कभी नाकाम नहीं छोड़ता। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इंसाफ़ और हक़ की बात कहने में किसी ज़ालिम हुक्मरान का डर नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही असली मालिक है और वही सबसे बड़ा मददगार है।
📜 आयत 103-107 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 105
सूरा अल-आराफ आयत 105 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मुझ पर वाजिब है कि ख़ुदा पर सच के सिवा…सूरा आयत 105/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 103–107. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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