अल-आराफ · 106/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
قَالَ إِن كُنتَ جِئْتَ بِآيَةٍ فَأْتِ بِهَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ ۝١٠٦
Qaala in kunta ji`ta bi Aayatin faati bihaaa in kunta minas saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
तो तू बनी ईसराइल को मेरे हमराह करे दे फिरऔन कहने लगा अगर तुम सच्चे हो और वाक़ई कोई मौजिज़ा लेकर आए हो तो उसे दिखाओ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آيَةٍ: निशानी, चमत्कार, वह प्रमाण जो किसी दावे की सच्चाई को सिद्ध करे।
  • الصَّادِقِينَ: सत्यवादी, सच्चे लोग।

व्याख्या:

फ़िरऔन ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) से कहा: "यदि तू अपने दावे में सच्चा है और तूने कोई निशानी (चमत्कार) लाने का दावा किया है, तो उसे मेरे सामने पेश कर। यदि तू सच्चे लोगों में से है, तो अपनी सच्चाई का प्रमाण दिखा।"

फ़िरऔन का यह कथन अहंकार और जिद पर आधारित था। वह मूसा (अलैहिस्सलाम) की बात को झूठलाने के लिए प्रमाण की माँग कर रहा था, जबकि उसे पता था कि मूसा (अलैहिस्सलाम) सच्चे हैं। उसने यह शर्त इसलिए रखी ताकि यदि मूसा (अलैहिस्सलाम) कोई चमत्कार दिखाएँ, तो वह उसे जादू कहकर खारिज कर सके। यह उसकी हठधर्मिता और सत्य को स्वीकार करने से इनकार करने की मानसिकता को दर्शाता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उसकी इस चुनौती को स्वीकार किया और अपनी लाठी तथा सफेद हाथ का चमत्कार प्रस्तुत किया, जो अल्लाह की ओर से स्पष्ट प्रमाण था।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. सत्य के दावे के लिए प्रमाण की आवश्यकता होती है, और अल्लाह के पैग़म्बर अपने दावे की सच्चाई के लिए स्पष्ट चमत्कार प्रस्तुत करते हैं। यह हमें सिखाता है कि सत्य की पुष्टि के लिए ठोस सबूत होने चाहिए।
  2. फ़िरऔन जैसे अहंकारी लोग सत्य को स्वीकार करने के बजाय बहाने बनाते हैं। हमें चाहिए कि जब सत्य स्पष्ट हो जाए, तो उसे तुरंत स्वीकार करें, न कि जिद और घमंड के कारण उसे ठुकराएँ।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के रसूलों का हर कार्य सच्चाई और प्रमाण पर आधारित होता है, और उनकी सच्चाई को छिपाना या झुठलाना विनाश का कारण बनता है।
  4. मुसलमानों के लिए यह सबक है कि वे अपने जीवन में सच्चाई और स्पष्टता को अपनाएँ, और किसी भी मामले में झूठ और धोखे से बचें, क्योंकि अल्लाह सच्चे लोगों के साथ है।


📜 आयत 104-108 — सूरा अल-आराफ

104وَقَالَ مُوسَىٰ يَا فِرْعَوْنُ إِنِّي رَسُولٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
और मूसा ने (फिरऔन से) कहा ऐ फिरऔनमें यक़ीनन परवरदिगारे आलम का रसूल हूँ
105حَقِيقٌ عَلَىٰ أَن لَّا أَقُولَ عَلَى اللَّهِ إِلَّا الْحَقَّ ۚ قَدْ جِئْتُكُم بِبَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَأَرْسِلْ مَعِيَ بَنِي إِسْرَائِيلَ
मुझ पर वाजिब है कि ख़ुदा पर सच के सिवा (एक हुरमत भी झूठ) न कहूँ मै यक़ीनन तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वाजेए व रोशन मौजिज़े लेकर आया हूँ
106قَالَ إِن كُنتَ جِئْتَ بِآيَةٍ فَأْتِ بِهَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तो तू बनी ईसराइल को मेरे हमराह करे दे फिरऔन कहने लगा अगर तुम सच्चे हो और वाक़ई कोई मौजिज़ा लेकर आए हो तो उसे दिखाओ
107فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ
(ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी पस वह यकायक (अच्छा खासा) ज़ाहिर बज़ाहिर अजदहा बन गई
108وَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذَا هِيَ بَيْضَاءُ لِلنَّاظِرِينَ
और अपना हाथ बाहर निकाला तो क्या देखते है कि वह हर शख़्श की नज़र मे जगमगा रहा है
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
106आयत

अनुवाद — अल-आराफ 106

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Saturday, October 3, 2026

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