अल-आराफ · 110/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
يُرِيدُ أَن يُخْرِجَكُم مِّنْ أَرْضِكُمْ ۖ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ ۝١١٠
Yureedu ai yukhrijakum min ardikum famaazaa taamuroon
📖 हिंदी अर्थ
ये चाहता है कि तुम्हें तुम्हारें मुल्क से निकाल बाहर कर दे तो अब तुम लोग उसके बारे में क्या सलाह देते हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُرِيدُ: चाहता है
  • يُخْرِجَكُم: तुम्हें निकाल दे
  • مِّنْ أَرْضِكُمْ: तुम्हारी धरती से
  • فَمَاذَا تَأْمُرُونَ: तो तुम क्या आदेश/सलाह देते हो

तफ़सीर (व्याख्या):

यह फ़िरऔन का कथन है, जो उसने अपने दरबार के सरदारों से कहा। फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) के जादूगरों पर विजय पाने के बाद अपनी सभा में उपस्थित लोगों से कहा कि यह व्यक्ति (मूसा) चाहता है कि तुम सबको तुम्हारी इस धरती (मिस्र) से निकाल बाहर करे। फ़िरऔन ने उनसे पूछा: "तुम मुझे क्या सलाह देते हो? इस मामले में तुम्हारी क्या राय है?"

फ़िरऔन ने यह बात इसलिए कही ताकि वह अपने लोगों को मूसा (अलैहिस्सलाम) के विरुद्ध भड़का सके और उन्हें यह विश्वास दिला सके कि मूसा का उद्देश्य केवल उन्हें उनकी भूमि से बेदखल करना है। यह फ़िरऔन की ओर से एक चालाकी भरी बात थी, क्योंकि मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कभी ऐसी बात नहीं कही थी। फ़िरऔन ने उन्हें यह डर दिखाया कि यदि मूसा की बात मान ली गई तो वे अपनी ज़मीन, अपनी संपत्ति और अपनी सत्ता से हाथ धो बैठेंगे। इसके बाद उसने उनसे सलाह माँगी कि वे क्या करना उचित समझते हैं।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि बातिल (असत्य) के लोग अपने नेता के इशारे पर सच्चाई को झुठलाने और उसके खिलाफ साज़िश करने में पीछे नहीं रहते। फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) के खिलाफ झूठा प्रचार किया, जैसा कि हर ज़माने में ज़ालिम हुक्काम सच्चाई के दावेदारों के खिलाफ करते आए हैं।
  2. इस आयत से यह भी पता चलता है कि सच्चाई के दावेदार को अपने विरोधियों की चालों से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने नबियों की मदद करता है और उनके दुश्मनों की साज़िशें नाकाम कर देता है।
  3. यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि जब कोई ज़ालिम शासक सच्चाई को दबाने की कोशिश करे, तो उसके झूठे प्रचार से प्रभावित न हों और सच्चाई पर डटे रहें। अल्लाह का वादा है कि सच्चाई ही अंततः जीतेगी।
  4. इस आयत में फ़िरऔन के इस कथन से यह भी सबक मिलता है कि इंसान अपनी ग़लतियों को छुपाने और अपने कुकर्मों को सही ठहराने के लिए दूसरों पर इल्ज़ाम लगाता है, जबकि सच्चा मोमिन वह है जो अपनी ग़लती मान ले और तौबा कर ले।


📜 आयत 108-112 — सूरा अल-आराफ

108وَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذَا هِيَ بَيْضَاءُ لِلنَّاظِرِينَ
और अपना हाथ बाहर निकाला तो क्या देखते है कि वह हर शख़्श की नज़र मे जगमगा रहा है
109قَالَ الْمَلَأُ مِن قَوْمِ فِرْعَوْنَ إِنَّ هَٰذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ
तब फिरऔन के क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा ये तो अलबत्ता बड़ा माहिर जादूगर है
110يُرِيدُ أَن يُخْرِجَكُم مِّنْ أَرْضِكُمْ ۖ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ
ये चाहता है कि तुम्हें तुम्हारें मुल्क से निकाल बाहर कर दे तो अब तुम लोग उसके बारे में क्या सलाह देते हो
111قَالُوا أَرْجِهْ وَأَخَاهُ وَأَرْسِلْ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ
(आख़िर) सबने मुत्तफिक़ अलफाज़ (एक ज़बान होकर) कहा कि (ऐ फिरऔन) उनको और उनके भाई (हारून) को चन्द दिन कैद में रखिए और (एतराफ़ के) शहरों में हरकारों को भेजिए
112يَأْتُوكَ بِكُلِّ سَاحِرٍ عَلِيمٍ
कि तमाम बड़े बड़े जादूगरों का जमा करके अपके पास दरबार में हाज़िर करें
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
110आयत

अनुवाद — अल-आराफ 110

सूरा अल-आराफ आयत 110 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये चाहता है कि तुम्हें तुम्हारें मुल्क से निकाल बाहर…

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Wednesday, September 30, 2026

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