अल-आराफ · 109/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
قَالَ الْمَلَأُ مِن قَوْمِ فِرْعَوْنَ إِنَّ هَٰذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ ۝١٠٩
Qaalal mala-u min qawmi Fir`awna inna haazaa lasaa hirun `aleem
📖 हिंदी अर्थ
तब फिरऔन के क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा ये तो अलबत्ता बड़ा माहिर जादूगर है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الْمَلَأُ: क़ौम के बड़े-बड़े सरदार, रईस और प्रभावशाली लोग।
  • سَاحِرٌ: जादूगर।
  • عَلِيمٌ: बड़ा ज्ञानी, माहिर (यहाँ अर्थ है: जादू में पूरा पारंगत और हुनरमंद)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के सामने अपनी लाठी को साँप बनाकर दिखाया और अपना हाथ चमकता हुआ निकाला, तो यह मंज़र देखकर फ़िरऔन के दरबार के बड़े-बड़े सरदार और रईस हैरान रह गए। लेकिन उन्होंने सच्चाई को क़बूल करने के बजाय उसे जादू का करिश्मा कहकर टाल दिया। उन्होंने आपस में कहा: "यह शख्स (मूसा) कोई नबी नहीं, बल्कि एक बड़ा ही माहिर जादूगर है। इसने अपने जादू के ज़ोर से लोगों की आँखों को धोखा दिया है, जिससे लाठी साँप नज़र आ रही है और हाथ रोशन दिख रहा है।"

वे यह बात जानते हुए भी कह रहे थे कि यह कोई साधारण जादू नहीं, बल्कि बेहद उच्च कोटि का जादू है, जो सिर्फ एक पूरा हुनरमंद जादूगर ही कर सकता है। उनका मक़सद यह था कि लोगों को मूसा (अलैहिस्सलाम) की नबुव्वत पर शक डाला जाए और उनके दिलों में यह बैठाया जाए कि यह कोई रसूल नहीं, बल्कि एक चालबाज़ जादूगर है, जो अपने हुनर से लोगों को गुमराह करना चाहता है। इस तरह उन्होंने सच्चाई को झुठलाने की कोशिश की और अपनी क़ौम को उनके ख़िलाफ़ भड़काने का रास्ता अपनाया।

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें सिखाती है कि जब सच्चाई सामने आती है, तो बड़े-बड़े लोग अक्सर अपनी अकड़ और दुनियावी रुतबे की वजह से उसे क़बूल नहीं करते और बहाने बनाते हैं। वे सच्चाई को दबाने के लिए उसे झूठे नाम दे देते हैं, जैसे यहाँ जादू कहा गया। लेकिन अल्लाह की मदद हमेशा सच्चे लोगों के साथ होती है। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अकेले दम पर फ़िरऔन के पूरे दरबार का मुक़ाबला किया, और आख़िरकार सच्चाई ही जीती। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम सच्चाई पर डटे रहें, चाहे दुनिया के बड़े-बड़े लोग उसका विरोध ही क्यों न करें। अल्लाह सच्चाई का साथ देता है और झूठ को मिटा देता है।



📜 आयत 107-111 — सूरा अल-आराफ

107فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ
(ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी पस वह यकायक (अच्छा खासा) ज़ाहिर बज़ाहिर अजदहा बन गई
108وَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذَا هِيَ بَيْضَاءُ لِلنَّاظِرِينَ
और अपना हाथ बाहर निकाला तो क्या देखते है कि वह हर शख़्श की नज़र मे जगमगा रहा है
109قَالَ الْمَلَأُ مِن قَوْمِ فِرْعَوْنَ إِنَّ هَٰذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ
तब फिरऔन के क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा ये तो अलबत्ता बड़ा माहिर जादूगर है
110يُرِيدُ أَن يُخْرِجَكُم مِّنْ أَرْضِكُمْ ۖ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ
ये चाहता है कि तुम्हें तुम्हारें मुल्क से निकाल बाहर कर दे तो अब तुम लोग उसके बारे में क्या सलाह देते हो
111قَالُوا أَرْجِهْ وَأَخَاهُ وَأَرْسِلْ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ
(आख़िर) सबने मुत्तफिक़ अलफाज़ (एक ज़बान होकर) कहा कि (ऐ फिरऔन) उनको और उनके भाई (हारून) को चन्द दिन कैद में रखिए और (एतराफ़ के) शहरों में हरकारों को भेजिए
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
109आयत

अनुवाद — अल-आराफ 109

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Friday, October 2, 2026

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