अल-आराफ · 173/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
أَوْ تَقُولُوا إِنَّمَا أَشْرَكَ آبَاؤُنَا مِن قَبْلُ وَكُنَّا ذُرِّيَّةً مِّن بَعْدِهِمْ ۖ أَفَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ الْمُبْطِلُونَ ۝١٧٣
Aw taqoolooo innamaaa ashraka aabaaa `unaa min qablu wa kunnaa zurriyyatam mim ba`dihim afatuhlikunna bimaa fa`alal mubtiloon
📖 हिंदी अर्थ
या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो बाप दादाओं ही ने पहले शिर्क किया था और हम तो उनकी औलाद थे (कि) उनके बाद दुनिया में आए तो क्या हमें उन लोगों के ज़ुर्म की सज़ा में हलाक करेगा जो पहले ही बातिल कर चुके

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَشْرَكَ – शिर्क किया (अल्लाह के साथ किसी और को साझी ठहराया)
  • ذُرِّيَّةً – संतान, औलाद
  • الْمُبْطِلُونَ – वे लोग जिन्होंने बातिल (असत्य) काम किए, यानी शिर्क करके अपने अमलों को बर्बाद कर लिया

तफसीर:

यह आयत उस महान दिन की ओर इशारा करती है जब अल्लाह तआला सारी इंसानियत से पूछेगा कि क्या तुमने मेरे साथ किसी को साझी ठहराया? उस वक़्त लोग कई तरह के बहाने बनाएँगे। एक बहाना यह भी होगा कि वे कहें: "ऐ हमारे रब! हमने खुद शिर्क नहीं किया, बल्कि हमारे बाप-दादा हमसे पहले शिर्क कर चुके थे, और हम उनकी संतान थे, हमने तो बस उन्हीं का रास्ता अपनाया और उन्हीं की पैरवी की। क्या तू हमें उन लोगों के कर्मों की सज़ा देगा जिन्होंने बातिल काम किए?"

यानी वे अपनी ग़लती का ज़िम्मेदार अपने बुज़ुर्गों को ठहराकर खुद को बरी करना चाहेंगे। मगर अल्लाह तआला ने इसी आयत से पहले यह स्पष्ट कर दिया कि हर इंसान ने अपनी फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) पर अल्लाह के एक होने का इक़रार किया था, और उसे अच्छे-बुरे की पहचान दी गई थी। इसलिए अंधी तक़लीद (अंधानुकरण) करके बाप-दादा के शिर्क को अपनाना और फिर यह कहना कि "हम तो मासूम थे", क़बूल नहीं होगा।

हर इंसान अपने अमल के लिए खुद ज़िम्मेदार है। किसी के लिए यह बहाना जायज़ नहीं कि "मेरे बुज़ुर्गों ने गलती की, मैंने तो बस उनकी नक़ल की।" क्योंकि अल्लाह ने हर इंसान को अक़्ल दी, फ़ितरत दी, और रसूल भेजे। जो सच्चाई की तलाश करना चाहता है, उसे रास्ता मिल जाता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी ज़िम्मेदारी से भाग न सकें। इस्लाम हमें सोच-समझकर दीन अपनाने की तालीम देता है। हमें अपने बुज़ुर्गों की अच्छी बातों को तो अपनाना चाहिए, लेकिन अगर वे किसी गलत रास्ते पर हों, तो हमें सच्चाई को तरजीह देनी चाहिए। अल्लाह ने हम पर बड़ा एहसान किया कि हमें कुरआन और सुन्नत दी, जो हर ज़माने में सच्चाई का मापदंड है। आज हमें चाहिए कि हम अपने दीन को समझें, उस पर अमल करें और दूसरों को भी सच्चाई की दावत दें। याद रखें, क़यामत के दिन कोई किसी का बहाना नहीं सुनेगा — हर शख्स अपने अमल का हिसाब खुद देगा। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को कुरआन और सुन्नत के मुताबिक ढाल लें, ताकि उस दिन हमारा पल्ला भारी हो और हम जन्नत के हक़दार बनें।



📜 आयत 171-175 — अल-आराफ

171۞ وَإِذْ نَتَقْنَا الْجَبَلَ فَوْقَهُمْ كَأَنَّهُ ظُلَّةٌ وَظَنُّوا أَنَّهُ وَاقِعٌ بِهِمْ خُذُوا مَا آتَيْنَاكُم بِقُوَّةٍ وَاذْكُرُوا مَا فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ
तो (ऐ रसूल यहूद को याद दिलाओ) जब हम ने उन (के सरों) पर पहाड़ को इस तरह लटका दिया कि गोया साएबान (छप्पर) था और वह लोग समझ चुके थे कि उन पर अब गिरा और हमने उनको हुक्म दिया कि जो कुछ हमने तुम्हें अता किया है उसे मज़बूती से पकड़ लो और जो कुछ उसमें लिखा है याद रखो ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ
172وَإِذْ أَخَذَ رَبُّكَ مِن بَنِي آدَمَ مِن ظُهُورِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَأَشْهَدَهُمْ عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَلَسْتُ بِرَبِّكُمْ ۖ قَالُوا بَلَىٰ ۛ شَهِدْنَا ۛ أَن تَقُولُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِنَّا كُنَّا عَنْ هَٰذَا غَافِلِينَ
और उसे रसूल वह वक्त भी याद (दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने आदम की औलाद से बस्तियों से (बाहर निकाल कर) उनकी औलाद से खुद उनके मुक़ाबले में एक़रार कर लिया (पूछा) कि क्या मैं तुम्हारा परवरदिगार नहीं हूँ तो सब के सब बोले हाँ हम उसके गवाह हैं ये हमने इसलिए कहा कि ऐसा न हो कहीं तुम क़यामत के दिन बोल उठो कि हम तो उससे बिल्कुल बे ख़बर थे
173أَوْ تَقُولُوا إِنَّمَا أَشْرَكَ آبَاؤُنَا مِن قَبْلُ وَكُنَّا ذُرِّيَّةً مِّن بَعْدِهِمْ ۖ أَفَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ الْمُبْطِلُونَ
या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो बाप दादाओं ही ने पहले शिर्क किया था और हम तो उनकी औलाद थे (कि) उनके बाद दुनिया में आए तो क्या हमें उन लोगों के ज़ुर्म की सज़ा में हलाक करेगा जो पहले ही बातिल कर चुके
174وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं और ताकि वह लोग (अपनी ग़लती से) बाज़ आएं
175وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ الَّذِي آتَيْنَاهُ آيَاتِنَا فَانسَلَخَ مِنْهَا فَأَتْبَعَهُ الشَّيْطَانُ فَكَانَ مِنَ الْغَاوِينَ
और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्श का हाल पढ़ कर सुना दो जिसे हमने अपनी आयतें अता की थी फिर वह उनसे निकल भागा तो शैतान ने उसका पीछा पकड़ा और आख़िरकार वह गुमराह हो गया
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अनुवाद — अल-आराफ 173

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Tuesday, August 18, 2026

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