अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَشْرَكَ – शिर्क किया (अल्लाह के साथ किसी और को साझी ठहराया)
- ذُرِّيَّةً – संतान, औलाद
- الْمُبْطِلُونَ – वे लोग जिन्होंने बातिल (असत्य) काम किए, यानी शिर्क करके अपने अमलों को बर्बाद कर लिया
तफसीर:
यह आयत उस महान दिन की ओर इशारा करती है जब अल्लाह तआला सारी इंसानियत से पूछेगा कि क्या तुमने मेरे साथ किसी को साझी ठहराया? उस वक़्त लोग कई तरह के बहाने बनाएँगे। एक बहाना यह भी होगा कि वे कहें: "ऐ हमारे रब! हमने खुद शिर्क नहीं किया, बल्कि हमारे बाप-दादा हमसे पहले शिर्क कर चुके थे, और हम उनकी संतान थे, हमने तो बस उन्हीं का रास्ता अपनाया और उन्हीं की पैरवी की। क्या तू हमें उन लोगों के कर्मों की सज़ा देगा जिन्होंने बातिल काम किए?"
यानी वे अपनी ग़लती का ज़िम्मेदार अपने बुज़ुर्गों को ठहराकर खुद को बरी करना चाहेंगे। मगर अल्लाह तआला ने इसी आयत से पहले यह स्पष्ट कर दिया कि हर इंसान ने अपनी फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) पर अल्लाह के एक होने का इक़रार किया था, और उसे अच्छे-बुरे की पहचान दी गई थी। इसलिए अंधी तक़लीद (अंधानुकरण) करके बाप-दादा के शिर्क को अपनाना और फिर यह कहना कि "हम तो मासूम थे", क़बूल नहीं होगा।
हर इंसान अपने अमल के लिए खुद ज़िम्मेदार है। किसी के लिए यह बहाना जायज़ नहीं कि "मेरे बुज़ुर्गों ने गलती की, मैंने तो बस उनकी नक़ल की।" क्योंकि अल्लाह ने हर इंसान को अक़्ल दी, फ़ितरत दी, और रसूल भेजे। जो सच्चाई की तलाश करना चाहता है, उसे रास्ता मिल जाता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी ज़िम्मेदारी से भाग न सकें। इस्लाम हमें सोच-समझकर दीन अपनाने की तालीम देता है। हमें अपने बुज़ुर्गों की अच्छी बातों को तो अपनाना चाहिए, लेकिन अगर वे किसी गलत रास्ते पर हों, तो हमें सच्चाई को तरजीह देनी चाहिए। अल्लाह ने हम पर बड़ा एहसान किया कि हमें कुरआन और सुन्नत दी, जो हर ज़माने में सच्चाई का मापदंड है। आज हमें चाहिए कि हम अपने दीन को समझें, उस पर अमल करें और दूसरों को भी सच्चाई की दावत दें। याद रखें, क़यामत के दिन कोई किसी का बहाना नहीं सुनेगा — हर शख्स अपने अमल का हिसाब खुद देगा। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को कुरआन और सुन्नत के मुताबिक ढाल लें, ताकि उस दिन हमारा पल्ला भारी हो और हम जन्नत के हक़दार बनें।
📜 आयत 171-175 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 173
सूरा अल-आराफ आयत 173 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो…सूरा आयत 173/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 171–175. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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