अल-आराफ · 174/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ ۝١٧٤
Wa kazaalika nufassihul Aayaati wa la`allahum yarji`oon
📖 हिंदी अर्थ
और हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं और ताकि वह लोग (अपनी ग़लती से) बाज़ आएं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نُفَصِّلُ: हम स्पष्ट करते हैं, विस्तार से बयान करते हैं।
  • الْآيَاتِ: निशानियाँ, प्रमाण, शिक्षाप्रद घटनाएँ और दलीलें।
  • يَرْجِعُونَ: वे लौट आएँ (अपनी ग़लती से तौबा करके सच्चे मार्ग की ओर)।

तफ़सीर:

जिस प्रकार हमने पिछली उम्मतों के हालात और उनके अंजाम को स्पष्ट रूप से बयान किया, उसी प्रकार हे नबी! हम आपकी क़ौम (कुरैश) के लिए भी अपनी आयतों को विस्तार से स्पष्ट करते हैं। हम उन्हें वे निशानियाँ और सबूत दिखाते हैं जो उन्हें सत्य की ओर मार्गदर्शन करें, और उन्हें उनके उस वादे की याद दिलाते हैं जो उन्होंने अपनी फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) और अक़्ल के आधार पर अपने रब के साथ किया था — कि वे उसे अकेला मानें और उसी की इबादत करें। हमारा यह विस्तृत बयान इसलिए है ताकि वे अपने शिर्क (बहुदेववाद) और कुफ़्र (अविश्वास) से बाज़ आएँ, अपनी ग़लती का एहसास करें, और अपने रब की ओर पलटकर उसकी इबादत और आज्ञाकारिता की ओर लौट आएँ। यह बयान उनके लिए रहमत और हिदायत का ज़रिया है, ताकि वे अंधेरे से निकलकर रोशनी की ओर आएँ।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह तआला अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है — वह उन्हें गुमराही में छोड़ने के बजाय लगातार निशानियाँ और सबूत भेजता है ताकि वे सच्चाई समझ सकें।
  2. क़ुरआन का हर बयान एक दावत है — वह हमें बुलाता है कि हम अपनी ज़िंदगी को देखें, अपनी ग़लतियों से सीखें और अल्लाह की ओर लौटें।
  3. अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है — चाहे इंसान कितनी भी ग़लती कर ले, जब तक वह सच्चे दिल से लौटे, अल्लाह उसे कबूल करता है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन में अल्लाह की आयतों (क़ुरआन, कुदरत के निशान, और इतिहास के सबक) पर ग़ौर करना चाहिए, क्योंकि यही हमें सीधे रास्ते पर चलने में मदद देती हैं।
  5. तौबा (पश्चाताप) सबसे बड़ी नेमत है — जो इंसान अपनी ग़लती पर पछताकर अल्लाह की ओर लौटता है, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उसकी ज़िंदगी में बरकत डालता है।


📜 आयत 172-176 — अल-आराफ

172وَإِذْ أَخَذَ رَبُّكَ مِن بَنِي آدَمَ مِن ظُهُورِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَأَشْهَدَهُمْ عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَلَسْتُ بِرَبِّكُمْ ۖ قَالُوا بَلَىٰ ۛ شَهِدْنَا ۛ أَن تَقُولُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِنَّا كُنَّا عَنْ هَٰذَا غَافِلِينَ
और उसे रसूल वह वक्त भी याद (दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने आदम की औलाद से बस्तियों से (बाहर निकाल कर) उनकी औलाद से खुद उनके मुक़ाबले में एक़रार कर लिया (पूछा) कि क्या मैं तुम्हारा परवरदिगार नहीं हूँ तो सब के सब बोले हाँ हम उसके गवाह हैं ये हमने इसलिए कहा कि ऐसा न हो कहीं तुम क़यामत के दिन बोल उठो कि हम तो उससे बिल्कुल बे ख़बर थे
173أَوْ تَقُولُوا إِنَّمَا أَشْرَكَ آبَاؤُنَا مِن قَبْلُ وَكُنَّا ذُرِّيَّةً مِّن بَعْدِهِمْ ۖ أَفَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ الْمُبْطِلُونَ
या ये कह बैठो कि (हम क्या करें) हमारे तो बाप दादाओं ही ने पहले शिर्क किया था और हम तो उनकी औलाद थे (कि) उनके बाद दुनिया में आए तो क्या हमें उन लोगों के ज़ुर्म की सज़ा में हलाक करेगा जो पहले ही बातिल कर चुके
174وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं और ताकि वह लोग (अपनी ग़लती से) बाज़ आएं
175وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ الَّذِي آتَيْنَاهُ آيَاتِنَا فَانسَلَخَ مِنْهَا فَأَتْبَعَهُ الشَّيْطَانُ فَكَانَ مِنَ الْغَاوِينَ
और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्श का हाल पढ़ कर सुना दो जिसे हमने अपनी आयतें अता की थी फिर वह उनसे निकल भागा तो शैतान ने उसका पीछा पकड़ा और आख़िरकार वह गुमराह हो गया
176وَلَوْ شِئْنَا لَرَفَعْنَاهُ بِهَا وَلَٰكِنَّهُ أَخْلَدَ إِلَى الْأَرْضِ وَاتَّبَعَ هَوَاهُ ۚ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ الْكَلْبِ إِن تَحْمِلْ عَلَيْهِ يَلْهَثْ أَوْ تَتْرُكْهُ يَلْهَث ۚ ذَّٰلِكَ مَثَلُ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ فَاقْصُصِ الْقَصَصَ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
और अगर हम चाहें तो हम उसे उन्हें आयतों की बदौलत बुलन्द मरतबा कर देते मगर वह तो ख़ुद ही पस्ती (नीचे) की तरफ झुक पड़ा और अपनी नफसानी ख्वाहिश का ताबेदार बन बैठा तो उसकी मसल है कि अगर उसको धुत्कार दो तो भी ज़बान निकाले रहे और उसको छोड़ दो तो भी ज़बान निकले रहे ये मसल उन लोगों की है जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो (ऐ रसूल) ये क़िस्से उन लोगों से बयान कर दो ताकि ये लोग खुद भी ग़ौर करें
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
174आयत

अनुवाद — अल-आराफ 174

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Tuesday, August 18, 2026

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