अल-आराफ · 176/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
وَلَوْ شِئْنَا لَرَفَعْنَاهُ بِهَا وَلَٰكِنَّهُ أَخْلَدَ إِلَى الْأَرْضِ وَاتَّبَعَ هَوَاهُ ۚ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ الْكَلْبِ إِن تَحْمِلْ عَلَيْهِ يَلْهَثْ أَوْ تَتْرُكْهُ يَلْهَث ۚ ذَّٰلِكَ مَثَلُ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ فَاقْصُصِ الْقَصَصَ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ ۝١٧٦
Wa law shi`naa larafa`naahu bihaa wa laakin nahooo akhlada ilal ardi watta ba`a hawaah; famasaluhoo kamasalil kalb; in tahmil `alaihi yalhas aw tatruk hu yalhas; zaalika masalul qawmil lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa; faqsusil qasasa la`allahum yatafakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
और अगर हम चाहें तो हम उसे उन्हें आयतों की बदौलत बुलन्द मरतबा कर देते मगर वह तो ख़ुद ही पस्ती (नीचे) की तरफ झुक पड़ा और अपनी नफसानी ख्वाहिश का ताबेदार बन बैठा तो उसकी मसल है कि अगर उसको धुत्कार दो तो भी ज़बान निकाले रहे और उसको छोड़ दो तो भी ज़बान निकले रहे ये मसल उन लोगों की है जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो (ऐ रसूल) ये क़िस्से उन लोगों से बयान कर दो ताकि ये लोग खुद भी ग़ौर करें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَخْلَدَ إِلَى الْأَرْضِ: धरती की ओर झुक गया, दुनिया से लगाव रखा और उसी पर टिका रहा।
  • يَلْهَثْ: कुत्ते की तरह जीभ बाहर निकालकर हाँफना।
  • تَحْمِلْ عَلَيْهِ: उसे डाँटे, भगाए या उस पर हमला करे।
  • فَاقْصُصِ الْقَصَصَ: ये किस्से सुनाओ, इतिहास की बातें बताओ।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में एक ऐसे इंसान का ज़िक्र कर रहे हैं जिसे उन्होंने अपनी आयतें और निशानियाँ दी थीं, लेकिन उसने उन्हें ठुकरा दिया और उन पर अमल नहीं किया। अल्लाह फ़रमाते हैं: अगर हम चाहते तो उसे इन आयतों की बरकत से ऊँचा उठा देते, उसे दुनिया और आख़िरत में बुलंद मुक़ाम देते, लेकिन उसने खुद को गिरा लिया। वह दुनिया की तरफ़ झुक गया, उसकी चकाचौंध और लज़्ज़तों में डूब गया, और अपनी नफ़्स की ख्वाहिशों का पैरोकार बन गया। उसने अपनी आख़िरत को बेच दिया और दुनिया को खरीद लिया।

फिर अल्लाह ने उसकी मिसाल कुत्ते से दी — कुत्ता चाहे उसे भगाओ या उसे छोड़ दो, हर हालत में वह हाँफता रहता है, जीभ बाहर निकाले रहता है। यही हाल उस इंसान का है जो अल्लाह की आयतों से दूर हो गया — चाहे उसे नसीहत की जाए या छोड़ दिया जाए, वह अपनी गुमराही और दुनिया के लालच में ही डूबा रहता है। नसीहत उस पर असर नहीं करती और अकेला छोड़ने पर भी वह सीधा नहीं होता। यह उन लोगों की मिसाल है जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया।

अल्लाह अपने नबी ﷺ से फ़रमाते हैं: ये किस्से और हालात लोगों को सुनाओ, ताकि वे सोचें और समझें कि अल्लाह की निशानियों से मुँह मोड़ने का अंजाम क्या होता है। जब वे इन हक़ीक़तों पर ग़ौर करेंगे, तो शायद उनके दिल जाग जाएँ और वे ईमान की राह पर चल पड़ें।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि इल्म और समझ अकेले काफ़ी नहीं, बल्कि उस पर अमल ज़रूरी है। जो इंसान अल्लाह की आयतों को जानकर भी उन पर अमल नहीं करता, वह कुत्ते से भी बदतर हालत में हो जाता है। हमें चाहिए कि हम दुनिया की मोहब्बत को दिल से निकालें और अल्लाह की राह पर चलें। अल्लाह हर उस बंदे को ऊँचा उठाता है जो उसकी आयतों पर अमल करता है। यह किस्से हमारे लिए सबक़ हैं — कि हम उन लोगों की तरह न बनें जो नसीहत सुनकर भी बदलते नहीं। अल्लाह हमें सोचने-समझने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी आयतों पर ईमान लाते हैं और उन पर अमल करते हैं। आमीन।



📜 आयत 174-178 — सूरा अल-आराफ

174وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ وَلَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं और ताकि वह लोग (अपनी ग़लती से) बाज़ आएं
175وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ الَّذِي آتَيْنَاهُ آيَاتِنَا فَانسَلَخَ مِنْهَا فَأَتْبَعَهُ الشَّيْطَانُ فَكَانَ مِنَ الْغَاوِينَ
और (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस शख़्श का हाल पढ़ कर सुना दो जिसे हमने अपनी आयतें अता की थी फिर वह उनसे निकल भागा तो शैतान ने उसका पीछा पकड़ा और आख़िरकार वह गुमराह हो गया
176وَلَوْ شِئْنَا لَرَفَعْنَاهُ بِهَا وَلَٰكِنَّهُ أَخْلَدَ إِلَى الْأَرْضِ وَاتَّبَعَ هَوَاهُ ۚ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ الْكَلْبِ إِن تَحْمِلْ عَلَيْهِ يَلْهَثْ أَوْ تَتْرُكْهُ يَلْهَث ۚ ذَّٰلِكَ مَثَلُ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ فَاقْصُصِ الْقَصَصَ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
और अगर हम चाहें तो हम उसे उन्हें आयतों की बदौलत बुलन्द मरतबा कर देते मगर वह तो ख़ुद ही पस्ती (नीचे) की तरफ झुक पड़ा और अपनी नफसानी ख्वाहिश का ताबेदार बन बैठा तो उसकी मसल है कि अगर उसको धुत्कार दो तो भी ज़बान निकाले रहे और उसको छोड़ दो तो भी ज़बान निकले रहे ये मसल उन लोगों की है जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो (ऐ रसूल) ये क़िस्से उन लोगों से बयान कर दो ताकि ये लोग खुद भी ग़ौर करें
177سَاءَ مَثَلًا الْقَوْمُ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَأَنفُسَهُمْ كَانُوا يَظْلِمُونَ
जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया है उनकी भी क्या बुरी मसल है और अपनी ही जानों पर सितम ढाते रहे
178مَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِي ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
राह पर बस वही शख़्श है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे और जिनको गुमराही में छोड़ दे तो वही लोग घाटे में हैं
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
176आयत

अनुवाद — अल-आराफ 176

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Thursday, October 1, 2026

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